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हिम्मत हार जाता तो न मैं बचता और न साथी: सुमन
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Thu, 14 Jul 2016 10:46 PM IST
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घायल सुमन शंकर शर्मा
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आतंकी हमले में घायल हुए सीआरपीएफ के जवान सुमन शंकर मिश्रा बुधवार रात को घर आ गए। उनके घर आते ही परिवार में खुशियां छा गईं। परिवार वालों ने गांव में प्रसाद का वितरण किया। बच्चे पिता से लिपट गए।
आतंकी हमले में घायल हुए हिरन गांव निवासी सीआरपीएफ के जवान सुमनशंकर शर्मा बुधवार को देर रात घर लौट आए। आतंकियों की गोली पेट में लगने से घायल सुमन शंकर ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि 25 जून को 161 बटालियन के करीब एक सैकड़ा से अधिक जवान एनुअल फायरिंग करके लौट रहे थे। तीन गाड़ियों में सबसे आगे ट्रक, बीच में हमारी बस और पीछे स्वराज माजदा थी। बस में 40 जवान सवार थे। सामने खड़े पांच आतंकियों ने सबसे पहले आगे चल रहे ट्रक को निशाना बनाने का प्रयास किया। लेकिन चालक ने तेजी से गाड़ी को आगे बढ़ा दिया। बीच में हमारी बस फंसते ही सामने खड़े पांच आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला किया। हम लोग हिम्मत नहीं हारे, हिम्मत हार जाता तो न मैं बचता और न हमारे साथी। गोली का जवाब तुरंत देना शुरू कर दिया। पीछे से आ रही स्वराज माजदा के भी जवान उतरे और फायरिंग की। करीब 25 मिनट में पांचों आतंकियों को ढेर कर दिया। आतंकियों को मारने के बाद घायल हुए पांच साथियों को मैंने खुद गाड़ी में चढ़ाया था। स्वराज माजदा गाड़ी का चालक कुलविंदर भी घायल हो गया। हमारी गाड़ी में 12 जवान ही सुरक्षित बचे थे। आठ जवान आतंकी हमले में मारे गए और शेष घायल हो गए।
ऊपर वाले ने बचा लिया मेरा सिंदूर
सीआरपीएफ के जवान सुमन शंकर शर्मा के घर वापस आने पर पत्नी पूनम शर्मा ईश्वर का शुक्रिया अदा कर रही थी। उन्होंने कहा कि मेरी मांग का सिंदूर तो ऊपर वाले ने बचा लिया। उसी पर भरोसा था। मैं तो हमेशा ईश्वर को याद करती रही।
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पिता के आते ही गले ले लिपट गई बेटियां
सुमन शंकर शर्मा बुधवार को देर रात्रि करीब 1.30 बजे निजी वाहन से घर लौटे तो परिजन जाग रहे थे। बड़ी बेटी जाहन्वी एवं मान्वी ने पिता को देखा तो वह गले से लिपट गई। सुमन शंकर के चोट लगे होने के बाद भी बेटियों को गले लगा लिया। पत्नी पूनम शर्मा ने बड़े बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
गांव में खुशी का आलम, बांटा गया मिष्ठान
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। सुमन शंकर शर्मा के गांव वापस आने के बाद खुशी का आलम है। पिता रामनिवास शर्मा एवं मां सरोज देवी ने सुबह से प्रसाद बांटना शुरू कर दिया। सुमन शंकर शर्मा ने एसआरके कालेज में शिक्षा ग्रहण की। सीआरपीएफ में करीब 14 वर्ष से हैं।
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आतंकी हमले में घायल हुए हिरन गांव निवासी सीआरपीएफ के जवान सुमनशंकर शर्मा बुधवार को देर रात घर लौट आए। आतंकियों की गोली पेट में लगने से घायल सुमन शंकर ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि 25 जून को 161 बटालियन के करीब एक सैकड़ा से अधिक जवान एनुअल फायरिंग करके लौट रहे थे। तीन गाड़ियों में सबसे आगे ट्रक, बीच में हमारी बस और पीछे स्वराज माजदा थी। बस में 40 जवान सवार थे। सामने खड़े पांच आतंकियों ने सबसे पहले आगे चल रहे ट्रक को निशाना बनाने का प्रयास किया। लेकिन चालक ने तेजी से गाड़ी को आगे बढ़ा दिया। बीच में हमारी बस फंसते ही सामने खड़े पांच आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला किया। हम लोग हिम्मत नहीं हारे, हिम्मत हार जाता तो न मैं बचता और न हमारे साथी। गोली का जवाब तुरंत देना शुरू कर दिया। पीछे से आ रही स्वराज माजदा के भी जवान उतरे और फायरिंग की। करीब 25 मिनट में पांचों आतंकियों को ढेर कर दिया। आतंकियों को मारने के बाद घायल हुए पांच साथियों को मैंने खुद गाड़ी में चढ़ाया था। स्वराज माजदा गाड़ी का चालक कुलविंदर भी घायल हो गया। हमारी गाड़ी में 12 जवान ही सुरक्षित बचे थे। आठ जवान आतंकी हमले में मारे गए और शेष घायल हो गए।
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ऊपर वाले ने बचा लिया मेरा सिंदूर
सीआरपीएफ के जवान सुमन शंकर शर्मा के घर वापस आने पर पत्नी पूनम शर्मा ईश्वर का शुक्रिया अदा कर रही थी। उन्होंने कहा कि मेरी मांग का सिंदूर तो ऊपर वाले ने बचा लिया। उसी पर भरोसा था। मैं तो हमेशा ईश्वर को याद करती रही।
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पिता के आते ही गले ले लिपट गई बेटियां
सुमन शंकर शर्मा बुधवार को देर रात्रि करीब 1.30 बजे निजी वाहन से घर लौटे तो परिजन जाग रहे थे। बड़ी बेटी जाहन्वी एवं मान्वी ने पिता को देखा तो वह गले से लिपट गई। सुमन शंकर के चोट लगे होने के बाद भी बेटियों को गले लगा लिया। पत्नी पूनम शर्मा ने बड़े बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
गांव में खुशी का आलम, बांटा गया मिष्ठान
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। सुमन शंकर शर्मा के गांव वापस आने के बाद खुशी का आलम है। पिता रामनिवास शर्मा एवं मां सरोज देवी ने सुबह से प्रसाद बांटना शुरू कर दिया। सुमन शंकर शर्मा ने एसआरके कालेज में शिक्षा ग्रहण की। सीआरपीएफ में करीब 14 वर्ष से हैं।