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स्मार्ट सिटी की दौड़ से बाहर हो गई सुहागनगरी

Thu, 27 Aug 2015 08:15 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Thu, 27 Aug 2015 08:15 PM IST
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Smart City crashed out of the race Suhagnagri
फीरोजाबाद।  स्मार्ट सिटी की दौड़ से फीरोजाबाद बाहर हो गया। इसके लिए केंद्र सरकार ने प्रदेश की  राजधानियों अथवा एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों का शामिल करने का प्रस्ताव रखा था। स्मार्ट सिटी के लिए  राज्य के शहरी विकास विभाग को भी कड़ी मेहनत की जरूरत थी। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण में रुचि न लेना, लक्ष्य के अनुरूप  टैक्स वसूली न होना और जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध न होने की बात सामने आई है। गुरुवार को जारी सूची में फीरोजाबाद का नाम नहीं होने से शहरवासी मायूस नजर आए। हालांकि मानकों को पूरा करने पर छह माह बाद फीरोजाबाद को फिर मौका मिल सकता है।
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केंद्र सरकार ने देश में सौ स्मार्ट सिटीज बनाने की घोषणा की है। स्मार्ट सिटी परियोजना की दौड़ में सुहागनगरी का नाम भले ही हो लेकिन दौड़ से बाहर होने का खतरा शुरू से ही मंडरा रहा था। स्थानीय निकायों की खस्ताहाल वित्तीय स्थिति, खराब गवर्नेंस स्मार्ट सिटी  बनने की राह में बड़ा रोड़ा बने। केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन  में निगम द्वारा लगातार लापरवाही भी इसकी वजह बनी। ऐसे में स्मार्ट सिटी चुनौती प्रतिस्पर्धा के निर्धारित मानकों पर खतरना फीरोजाबाद नगर निगम के  लिए सरल नहीं था।
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बता दें कि करीब आठ लाख की आबादी वाले शहर में आधी आबादी को नगर निगम मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। लाखों लोग आज भी नारकीय हालात से जूझ रही है। जनपद के हजारों मकानों में आजतक स्वच्छ शौचालय तक नहीं बन सके हैं। शासन के लगातार निर्देश के बावजूद नगर निगम स्वकर के हिसाब से वसूली नहीं कर पा रहा है।
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समीक्षा बैठक में कटे थे नगर निगम के अंक
स्मार्ट  सिटीज में मानक अनुसार नगर निगम को ग्रेडिंग के आधार पर नंबर दिए जाते  हैं। फीरोजाबाद नगर निगम में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण,  टैक्स वसूली में पिछड़ने, सफाई व्यवस्था दुरुस्त न होने पर अंक काटे गए थे। यह बात अफसरों ने स्वीकार की है।


बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत
जिले में अभी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर दशा में नहीं हैं। महकमा ध्यान दे तो कई बड़ी सुविधाएं जिले को मुहैया हो सकती है। अभी सरकारी ट्रामा सेंटर अधूरा है तो विकास के लिए बनने वाले मेडिकल कालेज का आधार भी दूर की कौड़ी दिख रहा है। इस तरह सुहागनगरी स्मार्ट सिटी की दौड़ में कैसे जीतेगा।


स्मार्ट सिटी के मानक
- जनता को अच्छे आवास की सुविधा
- स्मार्ट सिटी में सुदृढ़ सफाई व्यवस्था
- जनता को स्वच्छ पेयजल
- यातायात व्यवस्था सुदृढ़ होनी चाहिए
- सड़कों पर अतिक्रमण नहीं होना चाहिए
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की बेहतर व्यवस्था
- शहर के हर घर में शौचालय की व्यवस्था

स्मार्ट सिटी की राह में यह हैं बड़ी दुश्वारियां
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टूटी सड़कों से गुजरने को मजबूर जनता
सुहागनगरी के विकास के नाम पर जिला एवं नगर निगम प्रशासन द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन शहर के लोगों को कच्ची सड़कें, गलियों में जलभराव, टूटी सड़कों से गुजरने को मजबूर होना पड़ता है। जिला एवं नगर निगम द्वारा कई ऐसी सड़कों के निर्माण में लाखों रुपए फूंक दिए, जहां पहले से अच्छी सड़कें बनी थीं।

आधी आबादी को नहीं शुद्ध पानी का इंतजाम
सुहागनगरी में सबसे बड़ी समस्या शुद्ध पेयजल की है। जलनिगम व नगर निगम के सभी संसाधन मिलकर भी जनता की प्यास बुझाने में फेल हैं। आज भी शहर की आधी आबादी को शुद्ध पानी देने का इंतजाम नहीं है। मजबूरी में जनता मोल खरीद कर पानी पीने को मजबूर है।

पालिका से बना निगम, फिर भी संसाधनों का अभाव
शासन द्वारा भले ही पालिका को नगर निगम बना दिया गया। इसके बाद भी संसाधनों का अभाव है। एक साल पूरी होने के बावजूद कई अफसरों की तैनाती नहीं हो सकी। निगम में हर स्तर पर संसाधनों का खासा अभाव है। राज्य  वित्त आयोग के अंतर्गत अब तक निगम को पालिका के समय की 6.32 करोड़ ग्रांट मिल रही थी। इसमें भी करीब 1.50 करोड़ की कटौती कर दी गई। वर्तमान  में 4.91 करोड़ ही ग्रांट मिल रही है।


जाम-अतिक्रमण से जूझ रही जनता
शहर की सड़कों पर जाम और अतिक्रमण की समस्या से जनता पूरी तरह त्रस्त है। शहर के मुख्य चौराहों, मुख्य बाजार से लेकर सार्वजनिक स्थलों पर हर समय जाम की समस्या बनी रहती है। इससे घंटों तक राहगीरों को जाम के झाम से जूझना पड़ता है।



न्यूमेरिक में ले सकते हैं।
- 400 मीट्रिक टन कूड़ा शहर में हर रोज निकलता है
- 350 मीट्रिक टन कूड़ा डिस्पोजल नगर निगम द्वारा किया जाता है
- 50 मीट्रिक टन कूड़ा शहर के खाली पड़े प्लॉटों, सर्विस के नीचे ओवरब्रिज के नीचे  
- 5.2 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित है खत्ताघर का निर्माण कुतकपुर चनौरा में
- 2009 में नगर निगम द्वारा किया गया था भूमि का अधिग्रहण
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