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बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांध कर रोईं बहनें

Fri, 19 Aug 2016 12:18 AM IST
Amar Ujala
Amar Ujala Updated Fri, 19 Aug 2016 12:18 AM IST
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Sisters stream of tears wash away in prison
जेल में बहा बहनों के आंसू का दरिया - फोटो : Amar Ujala
बदइंतजामी की हुईं शिकार, एंट्री के लिए हुई धक्का-मुक्की
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रक्षाबंधन पर बहनें जेल में निरुद्ध बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधने पहुंची। इस दौरान जेल परिसर का माहौल काफी भावुक करने वाला था। राखी बांधते-बांधते बहनें रो पड़ी। बहनों के आंसू देख भाइयों का भी गला भर आया। जेल में मिलाई के दौरान बदइंतजामी से बहनों को धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। महिलाओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुरुष पुुलिसकर्मी ही जूझ रहे थे। महिला कांस्टेबल दूर खड़ी रहीं। सुबह से जेल परिसर में प्रवेश के लिए बाहर खड़ी महिलाएं खड़े-खड़े थक गयीं। महिलाओं की पुुलिसकर्मियों से झड़पें भी हुईं। जेल में लगभग 1750 बंदी निरुद्ध हैं। लगभग तीन हजार बहनें जेल में राखी बांधने पहुंचीं।
बहनों के जेल पहुंचने का क्रम सुबह सात बजे से शुरू हो गया था। पहले राउंड में जेल प्रशासन ने करीब एक हजार बहनों को सुबह नौ बजे तक जेल में प्रवेश करा लिया था। जो मिलाई करके करीब 11 बजे जेल की चारदीवारी से बाहर निकलीं। इस दौरान जेल के बाहर करीब 15 सौ महिलाओं की भीड़ एकत्रित हो गई। रसूलपुर निवासी आफरीन अपने भाई हाजी सादब को राखी बांधने के लिए पहुंची थी। हाजी सादब हत्या के मामले में बंद है। भाई को जेल की सलाखों से बाहर आता देख आफरीन की आंखों से आंसू छलकने लगे। इस तरह का नजारा जेल के अंदर पार्क में दिखाई दे रहा था। जैसे ही दूसरी मिलाई के लिए प्रशासन ने जेल का गेट खोला तो महिलाओं में आपाधापी मच गई और वे जल्द से जल्द जेल में प्रवेश करने का प्रयास करने लगीं। जेल प्रशासन ने उनको रोकने का प्रयास किया, तो महिलाओं का जेल के सिपाहियों से विवाद हो गया। मामला बढ़ता जेल की चारदीवारी के अंदर बैठे अधिकारी बाहर आ गए। उन्होंने स्थिति को संभालने का प्रयास किया, तो हालात और बिगड़ गए। ऐसे में जेल प्रशासन ने महिलाओं को जेल के गेट के बाहर कर दिया, इससे महिलाओं में भगदड़ मच गई। किसी का बच्चा बिछड़ गया तो किसी की मां और बहन बिछड़ र्गईं। इसके चलते कई बहनें बंदी भाइयों की कलाई पर बिना राखी बांधे जेल के गेट से लौटने को बाध्य हुई।
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मां को तलाश करते हुए भटकता रहा किशोर
आलमपुर जारखी निवासी सौरभ (12) अपनी मां सुनीता के साथ पिता से मिलाई करने के लिए जेल पहुंचा था। भगदड़ के दौरान सौरभ अपनी मां सुनीता से बिछड़ गया और वह रोता बिलखता हुआ मां को तलाश करता रहा। काफी समय बीत जाने के बाद भी उसको उसकी मां नहीं मिली।
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रुपये ले लो मेरी बहन को अंदर करा दो ...
भाई साहब रुपये ले लो मेरी बहन को अंदर करा दो। यह शब्द उस बहन के थे जो अपनी छोटी बहन के साथ भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए जेल पहुंची थी। गेट खुला तो बड़ी बहन तो अंदर प्रवेश कर गई, लेकिन छोटी बहन उससे भीड़ में बिछड़ गई और जेल प्रशासन ने गेट अंदर से बंद कर लिया। इस पर बार-बार बड़ी बहन अधिकारियों से मिन्नत करती रहीं कि भाई साहब पैसे ले लो बहन को अंदर आने दो ...। महिलाओं का आरोप था कि जेल के बाहर सिपाहियों ने मिलाई के लिए पर्ची बनाने के नाम पर पचास रुपये तक लिए।

जेल के अंदर भी नहीं मिला भाई
आगरा निवासी विमलेश को जेल प्रशासन ने सुबह करीब नौ बजे अंदर प्रवेश करा दिया। लेकिन उनकी भाई रोहित, पति अनुराग और पिता लालता प्रसाद से मुलाकात नहीं हो सकी। क्योंकि उनको बैरक से नहीं बुलाया गया था। पीड़िता का कहना था कि उसके पिता खैरगढ़ थाना क्षेत्र के गांव साखनी के रहने वाले है, जो हत्या के आरोप में बंद है। दो घंटे तक इंतजार करने के बाद भी पिता, भाई और पति से मुलाकात नहीं हो सकी।


यह भी मायूस होकर लौटे
रजावली निवासी सुमित्रा, गढ़ी वरन निवासी मुन्नीदेवी और सोनम की अपने भाई और बेटों से मुलाकात नहीं हो सकी। ये लोग जेल के अंदर करीब दो घंटे तक भाइयों का बैरक से बाहर आने का इंतजार करते रहे।
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