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इस्लाम की खातिर शहादत दी थी हुसैन ने
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Tue, 27 Oct 2015 11:35 PM IST
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शिकोहाबाद। मोहल्ला मोहम्मदमाह तेली गली में कादरी वेलफेयर सोसाइटी की ओर से कादरी उर्दू एकेडमी में इमाम-ए-हुसैन व शहीदाने करबला की याद में मजलिस एंव कुरानख्वानी की गई।
मजलिस में तशरीफ लाये शाही इमाम मेहमान-ए-खुसूसी बलीउद्दीन ने इमाम हुसैन की शहादत बयान किया। करबला के शहीदों के बयान सुनकर लोगों की आंखों में आंसू आ गए।
उन्होंने कहा कि इंसानियत व इस्लाम की खातिर ही नवासा-ए-पैगंबर ने खुद के साथ अपने खानदान को भी शहीद करा दिया। आज उनकी शहादत का ही नतीजा है कि लोग खुले में सांस ले पा रहे हैं। कारी आमिर व हाफिज हारुन ने मरशिये पढ़े। सोसायटी के अध्यक्ष हाफिज कारी मोहम्मद सलीम कादरी ने कहा कि मोहर्रम में मजलिस कराना, सबील लगाना, कुरानख्वानी कराना, गरीबों को खाना खिलाना बड़े सवाब का काम है। इस अवसर पर वसीम कुरैशी, अली बहादुर, इसरत बड़े बाबू, राशिद भाई, हनीफ कुरैशी, शहीद, आजाद कादरी, मुन्ना भाई, असलम कुरैशी, सलमान भाई आदि उपस्थित थे।
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मजलिस में तशरीफ लाये शाही इमाम मेहमान-ए-खुसूसी बलीउद्दीन ने इमाम हुसैन की शहादत बयान किया। करबला के शहीदों के बयान सुनकर लोगों की आंखों में आंसू आ गए।
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उन्होंने कहा कि इंसानियत व इस्लाम की खातिर ही नवासा-ए-पैगंबर ने खुद के साथ अपने खानदान को भी शहीद करा दिया। आज उनकी शहादत का ही नतीजा है कि लोग खुले में सांस ले पा रहे हैं। कारी आमिर व हाफिज हारुन ने मरशिये पढ़े। सोसायटी के अध्यक्ष हाफिज कारी मोहम्मद सलीम कादरी ने कहा कि मोहर्रम में मजलिस कराना, सबील लगाना, कुरानख्वानी कराना, गरीबों को खाना खिलाना बड़े सवाब का काम है। इस अवसर पर वसीम कुरैशी, अली बहादुर, इसरत बड़े बाबू, राशिद भाई, हनीफ कुरैशी, शहीद, आजाद कादरी, मुन्ना भाई, असलम कुरैशी, सलमान भाई आदि उपस्थित थे।
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