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सुहागनगरी फिरोजाबाद: आपके हाथ में सजने वाली रंग-बिरंगी कांच की चूड़ियां इस तरह होती हैं तैयार, VIDEO में देखें

Wed, 23 Aug 2023 07:42 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Wed, 23 Aug 2023 07:42 PM IST
सार

आपके हाथ में सजने वाली रंग-बिरंगी कांच की चूड़ियां सुहागनगरी फिरोजाबाद की भट्ठियों में तैयार की जाती हैं। VIDEO में देखें चूड़ियों में जुड़ाई का काम कैसे होता है। 

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See in VIDEO how glass bangles are prepared in Firozabad
सुहागनगरी फिरोजाबाद: आपके हाथ में सजने वाली रंग-बिरंगी कांच की चूड़ियां इस तरह होती हैं तैयार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुहागनगरी फिरोजाबाद में बनी चूड़ियों की खनक पूरे देश में सुनाई देती है। फिरोजाबाद प्रदेश का एकमात्र ऐसा शहर है जहां कांच की रंग-बिरंगी चूड़ियां बनाई जाती हैं। यहां बनी चूड़ियों की सप्लाई देश के हर एक प्रांत, शहर, कसबा और गांव में होती है। आज इस खबर पर हम चूड़ियां बनाने के कारखानों और उनके प्रॉसेस के बारे में बात करेंगे। 

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बताते चलें कि चूड़ियां सिर्फ कारखाने में ही बनकर तैयार नहीं होती हैं। यह कारखानों में ढलने के बाद कई हाथों से गुजरती हैं। तब जाकर महिलाओं की कलाई में सजने के लिए तैयार हो पाती हैं। फिरोजाबाद में लगभग शहर की हर गली में चूड़ी बनाने, सजाने, ढालने का काम होता है। अब क्रम से बात बात करते हैं कि चूड़ी कितनी प्रॉसेस से गुजरने के बाद पहनने के लिए तैयार होती है। 
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सबसे पहले कारखाने में कांच को लगाकर सादी चूड़ी ढाली जाती है। इसके बाद इसकी जुड़ाई का काम होता है। चूड़ी की जुड़ाई का काम काफी बारीक होता है। यहां आग की मदद से एक-एक चूड़ी को जोड़ा जाता है। जुड़ाई का काम जिले में घर-घर होता है। यहां पुरुष ही नहीं महिलाएं भी इस काम को बेहतर तरीके से कर लेती हैं। 


जिले में लगभग हर घर के लोग किसी न किसी माध्यम से चूड़ी के काम से जुड़े हैं। यह उनके लिए घर में रहकर एक अच्छे रोजगार का काम करता है। यहां पर आपको यह भी बताते चलें कि महिलाओं के हाथों में सजने वाली रंग-बिरंगी चूड़ियां बनाने वाले मजदूरों की जिंदगी काफी बदरंग सी होती है। 

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चूड़ी तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में चूड़ी जिड़ाई के बारे में बात करें तो जुड़ाई का काम आसान नहीं होता है। इन सभी प्रक्रिया में चूड़ी जुड़ाई के बारे में बात करें तो जुड़ाई का काम काफी कठिनाई भरा होता है। लोग अपनी सेहत को दांव पर लगाकर स्थाई रूब से आग से जुड़ाई का काम करते हैं। 

चूड़ी जुड़ाई मिट्टी के तेल की लैंप या गैस लेंप से निकलने वाली लौ से किया जाता है। लौ के सामने लाकर एक-एक चूड़ी को जोड़ा जाता है। इस काम के लिए कमरा भी ऐसा चुना जाता है जहां हवा न आए। ताकि लैंप से निकलने वाली लौ सीधी जलती रहे, उसमें लहर न हो। तभी चूड़ी ठीक से जुड़ पाती है। इस काम से जुड़े लोगों को सांस से संबंधी बीमारी होने का खतरा बराबर बना रहता है।

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जुड़ाई होने के बाद यह झलाई के लिए आगे बढ़ा दी जाती है। चूड़ियों की झलाई करने के बाद छंटाई का काम होता है। अच्छी चूड़ियां छांटी जाती है और खराब को हटा दिया जाता है। इसके बाद इन्हें पकाई के लिए भेजा जाता है। चूड़ी की पकाई का काम होने के बाद इन्हें सजावट के लिए भेजा जाता है। यहां पर कारीगर महिलाएं और पुरुष इस पर तरह तरह की डिजाइन बनाते हैं। 

विशेष बात यह है कि महिलाएं घर का काम करने और बच्चों को संभालने के साथ ही चूड़ी की जुड़ाई का काम करती हैं। यह उनके लिए काफी चैलेंजिंग होता है लेकिन फिर भी वह इसे पूरी लगन के साथ रुचि लेकर करती हैं। इससे वह घर का खर्च चलाने में पुरुषों का सहयोग करती हैं। इन सभी प्रकिया से गुजरने के बाद चूड़ियां कलाई में सजने के लिए तैयार होती हैं।

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