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बघेल का एससी दांव टिकट के दावेदारों पर पड़ा भारी
दीपक जैन
Updated Tue, 17 Jan 2017 11:36 PM IST
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टूंडला से भाजपा प्रत्याशी एसपी सिंह बघेल।
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टूंडला सीट (सुरक्षित) पर भाजपा ने पूर्व सांसद एसपी सिंह बघेल को टिकट देकर अन्य दावेदारों को निराश कर दिया है। बघेल का एससी का दांव टिकट के दावेदारों पर भारी पड़ गया।
एसपी सिंह बघेल 2014 में बसपा और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए और अक्षय यादव के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़े थे। चुनाव हारने के बाद बघेल को भाजपा ने पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया था। बघेल भी दलबदल कर भाजपा में पहुंचे हैं। बघेल 1998, 1999 और 2004 में सपा की टिकट से जलेसर संसदीय सीट से चुनाव जीत कर सांसद बने थे। नए परिसीमन में जलेसर सीट समाप्त होने पर उन्होंने फीरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र को राजनीतिक कर्मभूमि बना लिया। उन्होंने 2009 के चुनाव में सपा से टिकट मांगा लेकिन आम चुनाव में जब मुलायम के पुत्र अखिलेश यादव खुद यहां लोकसभा चुनाव लड़ने आए तो बघेल सपा छोड़ कर बसपा में शामिल हो गए। मुकाबले में वह दूसरे स्थान पर रहे। अखिलेश के इस्तीफा देने पर जब डिंपल यादव यहां से लोकसभा का उप चुनाव लड़ी तब भी बघेल बसपा से उनके खिलाफ चुनाव लडे और तीसरे स्थान पर रहे। बसपा ने उन्हें सैफई परिवार से मोर्चा लेने का पुरस्कार देते हुए राज्यसभा में भेज दिया लेकिन मोदी लहर में आम चुनाव के जरिए लोकसभा जाने का लक्ष्य साधते हुए बघेल 2014 के आमचुनाव में बसपा छोड़ दी। दिल्ली की राजनीति में सक्रिय रहे बघेल लखनऊ जाने के लिए विधानसभा क्षेत्र का भी रास्ता चुन सकते हैं इसका अहसास भाजपा के लोगों को तब हुआ जब उन्होंने पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। धनगर जाति का दावा करते हुए उनका एसपी प्रमाण पत्र बनवाना भी इसी रणनीति का हिस्सा था। भाजपा में ही अंदरखाने इसका विरोध भी होने लगा कि जब वह पिछड़ा वर्ग से आते हैं फिर एससी प्रमाणपत्र बनवा कर टूंडला विधानसभा पर क्यों दांव खेल रहे हैं।
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एसपी सिंह बघेल 2014 में बसपा और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए और अक्षय यादव के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़े थे। चुनाव हारने के बाद बघेल को भाजपा ने पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया था। बघेल भी दलबदल कर भाजपा में पहुंचे हैं। बघेल 1998, 1999 और 2004 में सपा की टिकट से जलेसर संसदीय सीट से चुनाव जीत कर सांसद बने थे। नए परिसीमन में जलेसर सीट समाप्त होने पर उन्होंने फीरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र को राजनीतिक कर्मभूमि बना लिया। उन्होंने 2009 के चुनाव में सपा से टिकट मांगा लेकिन आम चुनाव में जब मुलायम के पुत्र अखिलेश यादव खुद यहां लोकसभा चुनाव लड़ने आए तो बघेल सपा छोड़ कर बसपा में शामिल हो गए। मुकाबले में वह दूसरे स्थान पर रहे। अखिलेश के इस्तीफा देने पर जब डिंपल यादव यहां से लोकसभा का उप चुनाव लड़ी तब भी बघेल बसपा से उनके खिलाफ चुनाव लडे और तीसरे स्थान पर रहे। बसपा ने उन्हें सैफई परिवार से मोर्चा लेने का पुरस्कार देते हुए राज्यसभा में भेज दिया लेकिन मोदी लहर में आम चुनाव के जरिए लोकसभा जाने का लक्ष्य साधते हुए बघेल 2014 के आमचुनाव में बसपा छोड़ दी। दिल्ली की राजनीति में सक्रिय रहे बघेल लखनऊ जाने के लिए विधानसभा क्षेत्र का भी रास्ता चुन सकते हैं इसका अहसास भाजपा के लोगों को तब हुआ जब उन्होंने पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। धनगर जाति का दावा करते हुए उनका एसपी प्रमाण पत्र बनवाना भी इसी रणनीति का हिस्सा था। भाजपा में ही अंदरखाने इसका विरोध भी होने लगा कि जब वह पिछड़ा वर्ग से आते हैं फिर एससी प्रमाणपत्र बनवा कर टूंडला विधानसभा पर क्यों दांव खेल रहे हैं।
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