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किसानों पर परेशानी की बारिश, फसलों को नुकसान
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
Updated Fri, 10 Mar 2017 10:38 PM IST
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बारिश के कारण खेतों में पड़ा आलू।
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मौसम ने गुरुवार की रात करवट बदल ली। इससे जहां लोगों ने ठंड महसूस किया। वहीं, इससे आलू, सरसों और गेहूं की फसल नुकसान होने से किसानों की नींद उड़ गई। तेज हवाएं चलने व बरसात से सरसों की फसल खेतों में गिर गई। बरसात से सबसे अधिक आलू और सरसों की फसल को नुकसान होने का अनुमान है।
नारखी क्षेत्र में बारिश से सबसे अधिक सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। किसानों ने सरसों की फसल को काट कर खेत पर ही छोड़ दिया था। बरसात से सरसों में फफूंदी लगने से सड़ जाती है। गेहूं की फसल भी प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि बरसात से सरसों व गेहूं की फसल को 25 से 30 प्रतिशत नुकसान हुआ है। खेतों में आलू की खुदाई का कार्य भी चल रहा था। खेतों पड़ा आलू भी बरसात में भीगने से 15 से 20 प्रतिशत नुकसान का अनुमान है। किसानों को चिंता सता रही है कि आगे भी बरसात होती रही तो फसलें सड़ जाएंगी, जिससे बड़ा नुकसान होगा।
फरिहा क्षेत्र में भी बरसात से आलू और सरसों की फसल सर्वाधिक नुकसान हुआ है। नोटबंदी के कारण पैसे का अभाव में किसान मजदूरों का इंतजाम नहीं कर सके। इससे समय पर आलू की खोदाई नहीं हो सकी। किसानों का कहना है कि बरसात से आलू, सरसों और गेहूं की 25 प्रतिशत फसल को नुकसान है।
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सिरसागंज क्षेत्र में सर्वाधिक आलू की फसल बर्बादी हुई है। वर्तमान में 80 प्रतिशत खेतों में आलू की खोदाई का कार्य चल रहा है। सुबह से देर रात तक मजदूर आलू खोदने में लगे रहे हैं। ट्रालियां में आलू भरकर कोल्डस्टोरज में ले जाने रखा था। खतों में आलू के ढेर लगे हैं। किसानों का कहना है कि बरसात होने के कारण खोदा गया आलू कोल्डस्टोरेज में नहीं रख सकेंगे। इससे सड़ने का डर रहता है। वहीं खेत की मिट्टी गीली होने के कारण खोदाई का कार्य भी नहीं हो सकेगा, जिससे बाहर से आई लेबर खाली बैठी रहेगी।
जसराना क्षेत्र में आलू की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है। सरसों, गेहूं व जौ की फसल भी प्रभावित हुई। बरसात होने के बाद हवा चलने से किसानों के होश उड़ गए हैं। किसानों का कहना है कि यदि तेज धूप निकली तो आलू सड जाएगा। बरसात की संभावना को देखते हुए किसानों ने खेतों में पड़े आलू को तिरपाल से ढकना शुरु कर दिया है।
बोले किसान
गांव पलिया सलेमपुर निवासी प्रशांत यादव का कहना है कि उनके क्षेत्र में प्रमुख रूप से जौ व गेहूं की फसल होती है। बरसात के कारण पकने को तैयार फसल खेतों में गिर गई है। इससे पैदावार पर असर पड़ेगा। नगला शादी निवासी किसान जगदीश राजपूत का कहना है कि खेत में सरसों की फसल कटी रखी थी। बरसात होने के कारण पूरी फसल भीग गई। पानी पड़ने से दाना सड़ जाएगा। उससे निकलने वाले तेल की गुणवत्ता खराब होगी तथा तेल की मात्रा भी कम रहेगी। दारापुर निवासी मनोज ने कहा कि बरसात के कारण आलू के खेतों में पानी भर गया, जिससे आलू की खोदाई प्रभावित होगी। खेतों में पानी भरने से आलू सड़ने की संभावना है। आलू का रंग भी बदल जाएगा। कौरारा बुजुर्ग निवासी विपिन चौहान ने कहा कि बरसात ने आलू किसानों का बहुत नुकसान हुआ है। खेतों में खोदा पड़ा आलू भीगने के कारण सड़ जाएगा। वहीं कोल्डस्टोरेज वाले भी आलू रखने में परेशान करेंगे।
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नारखी क्षेत्र में बारिश से सबसे अधिक सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। किसानों ने सरसों की फसल को काट कर खेत पर ही छोड़ दिया था। बरसात से सरसों में फफूंदी लगने से सड़ जाती है। गेहूं की फसल भी प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि बरसात से सरसों व गेहूं की फसल को 25 से 30 प्रतिशत नुकसान हुआ है। खेतों में आलू की खुदाई का कार्य भी चल रहा था। खेतों पड़ा आलू भी बरसात में भीगने से 15 से 20 प्रतिशत नुकसान का अनुमान है। किसानों को चिंता सता रही है कि आगे भी बरसात होती रही तो फसलें सड़ जाएंगी, जिससे बड़ा नुकसान होगा।
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फरिहा क्षेत्र में भी बरसात से आलू और सरसों की फसल सर्वाधिक नुकसान हुआ है। नोटबंदी के कारण पैसे का अभाव में किसान मजदूरों का इंतजाम नहीं कर सके। इससे समय पर आलू की खोदाई नहीं हो सकी। किसानों का कहना है कि बरसात से आलू, सरसों और गेहूं की 25 प्रतिशत फसल को नुकसान है।
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सिरसागंज क्षेत्र में सर्वाधिक आलू की फसल बर्बादी हुई है। वर्तमान में 80 प्रतिशत खेतों में आलू की खोदाई का कार्य चल रहा है। सुबह से देर रात तक मजदूर आलू खोदने में लगे रहे हैं। ट्रालियां में आलू भरकर कोल्डस्टोरज में ले जाने रखा था। खतों में आलू के ढेर लगे हैं। किसानों का कहना है कि बरसात होने के कारण खोदा गया आलू कोल्डस्टोरेज में नहीं रख सकेंगे। इससे सड़ने का डर रहता है। वहीं खेत की मिट्टी गीली होने के कारण खोदाई का कार्य भी नहीं हो सकेगा, जिससे बाहर से आई लेबर खाली बैठी रहेगी।
जसराना क्षेत्र में आलू की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है। सरसों, गेहूं व जौ की फसल भी प्रभावित हुई। बरसात होने के बाद हवा चलने से किसानों के होश उड़ गए हैं। किसानों का कहना है कि यदि तेज धूप निकली तो आलू सड जाएगा। बरसात की संभावना को देखते हुए किसानों ने खेतों में पड़े आलू को तिरपाल से ढकना शुरु कर दिया है।
बोले किसान
गांव पलिया सलेमपुर निवासी प्रशांत यादव का कहना है कि उनके क्षेत्र में प्रमुख रूप से जौ व गेहूं की फसल होती है। बरसात के कारण पकने को तैयार फसल खेतों में गिर गई है। इससे पैदावार पर असर पड़ेगा। नगला शादी निवासी किसान जगदीश राजपूत का कहना है कि खेत में सरसों की फसल कटी रखी थी। बरसात होने के कारण पूरी फसल भीग गई। पानी पड़ने से दाना सड़ जाएगा। उससे निकलने वाले तेल की गुणवत्ता खराब होगी तथा तेल की मात्रा भी कम रहेगी। दारापुर निवासी मनोज ने कहा कि बरसात के कारण आलू के खेतों में पानी भर गया, जिससे आलू की खोदाई प्रभावित होगी। खेतों में पानी भरने से आलू सड़ने की संभावना है। आलू का रंग भी बदल जाएगा। कौरारा बुजुर्ग निवासी विपिन चौहान ने कहा कि बरसात ने आलू किसानों का बहुत नुकसान हुआ है। खेतों में खोदा पड़ा आलू भीगने के कारण सड़ जाएगा। वहीं कोल्डस्टोरेज वाले भी आलू रखने में परेशान करेंगे।