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नहीं लगे रेडियो फ्रीक्वेंसी युक्त मीटर
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sun, 28 Dec 2014 11:40 PM IST
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जनपद में बिजली चोरी में विभागीय लापरवाही बाधक बनी हुई है। विभाग छह माह बाद भी रेडियो फ्रीक्वेंसी युक्त मीटर लगाने को टेंडर प्रक्रिया पूर्ण नहीं कर सका। इससे न तो बिजली चोरी रुक पा रही और नहीं मीटर रीडरों की मनमानी पर अंकुश लगा।
जनपद में व्यापक पैमान पर बिजली चोरी हो रही है, जिससे विभाग को बिजली खरीद के सापेक्ष करीब 8-10 करोड़ की हर माह चपत लग रही है। शासन द्वारा बिजली चोरी रोकने एवं मीटर रीडरों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए जनपद के टूंडला, फीरोजाबाद व शिकोहाबाद में रेडियो फ्रीक्वेंसी युक्त मीटर लगाने के निर्देश दिए गए थे।
रेडिया फ्रीक्वेंसी युक्त मीटर लगने के बाद रीडिंग लेने के लिए मीटर रीडरों को एक डिवाइस मुहैया कराई जाती। उस डिवाइस से सभी कनेक्शनों की रीडिंग स्वयं डिवाइस में फीड हो जाती। बाद में डिवाइस को कंप्यूटर से अटैच करते ही सभी उपभोक्ताओं की रीडिंग अपडेट होने की प्रक्रिया होती। रेडियो फ्रीक्वेंसी युक्त मीटर लगाने का दूसरा खास मकसद बिजली चोरी पर लगाम लगाना भी था, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते शासन की मंशा अधूरी रह गई।
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विभाग द्वारा अभी तक रेडिया फ्रीक्वेंसी युक्त मीटर लगाने को टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी नहीं जा सकी। सूत्रों की मानें तो विभाग द्वारा उक्त मीटर लगाए जाने की फिलहाल कोई संभावना भी नहीं हैं, क्योंकि रेडिया फ्रीक्वेंसी युक्त मीटर की उपलब्धता नहीं है। इसके अलावा इन मीटरों की कीमत इलेक्ट्रानिक मीटर से कहीं अधिक है।
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जनपद में व्यापक पैमान पर बिजली चोरी हो रही है, जिससे विभाग को बिजली खरीद के सापेक्ष करीब 8-10 करोड़ की हर माह चपत लग रही है। शासन द्वारा बिजली चोरी रोकने एवं मीटर रीडरों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए जनपद के टूंडला, फीरोजाबाद व शिकोहाबाद में रेडियो फ्रीक्वेंसी युक्त मीटर लगाने के निर्देश दिए गए थे।
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रेडिया फ्रीक्वेंसी युक्त मीटर लगने के बाद रीडिंग लेने के लिए मीटर रीडरों को एक डिवाइस मुहैया कराई जाती। उस डिवाइस से सभी कनेक्शनों की रीडिंग स्वयं डिवाइस में फीड हो जाती। बाद में डिवाइस को कंप्यूटर से अटैच करते ही सभी उपभोक्ताओं की रीडिंग अपडेट होने की प्रक्रिया होती। रेडियो फ्रीक्वेंसी युक्त मीटर लगाने का दूसरा खास मकसद बिजली चोरी पर लगाम लगाना भी था, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते शासन की मंशा अधूरी रह गई।
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विभाग द्वारा अभी तक रेडिया फ्रीक्वेंसी युक्त मीटर लगाने को टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी नहीं जा सकी। सूत्रों की मानें तो विभाग द्वारा उक्त मीटर लगाए जाने की फिलहाल कोई संभावना भी नहीं हैं, क्योंकि रेडिया फ्रीक्वेंसी युक्त मीटर की उपलब्धता नहीं है। इसके अलावा इन मीटरों की कीमत इलेक्ट्रानिक मीटर से कहीं अधिक है।