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Firozabad News: शौचालयों की बदहाली न बन जाए स्वच्छता रैंकिंग में गिरावट का कारण

Tue, 25 Nov 2025 10:23 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 25 Nov 2025 10:23 PM IST
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Poor condition of toilets should not become the reason for decline in cleanliness ranking.
फोटो 32 महिलाओं की सुविधा के लिए सैलई में छह माह पूर्व बने शौचालय पर लटका ताला।  संवाद
फिरोजाबाद। स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 की तैयारी में जुटे नगर निगम की रैंकिंग पर सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों की बदहाल स्थिति बट्टा लगा सकती है। स्वच्छ भारत मिशन और आकांक्षा योजना के तहत बने अधिकांश शौचालय मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं, जिससे रिड्यूज, रिसाइकिल, रियूज के मूल सिद्धांत पर आधारित इस सर्वेक्षण में शहर की नेगेटिव मार्किंग हो सकती है।
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नगर निगम भले ही खुले में शौच से मुक्त होने का दावा करे, लेकिन हकीकत में शहर में स्थापित अधिकांश शौचालयों में साफ-सफाई, रखरखाव और संसाधनों का अभाव है। शौचालयों के अंदर और बाहर गंदगी पसरी है और कई स्थानों पर सीवरेज का पानी सड़क पर बह रहा है। शौचालयों में पानी, प्रकाश, शीशा, हैंडवॉस और तौलिया जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मुख्य चौराहों पर बने शौचालयों में टूटे-फूटे टाइल्स और टोंटियों से रिसता पानी आम दृश्य है।
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महिलाओं के लिए पिंक शौचालयों में सुविधाओं का अभाव
महिलाओं की सुविधा के लिए कैला देवी मंदिर, एसपी सिटी कार्यालय, सदर बाजार और आसफबाद फ्लाईओवर जैसे प्रमुख स्थानों पर बनाए गए पिंक शौचालयों की स्थिति भी खस्ताहाल है। मानकों के विपरीत, इन शौचालयों में सैनेटरी वेस्ट एकत्रीकरण के लिए डस्टबिन, सैनेटरी पैड मशीन, तौलिया, और संक्रमण की रोकथाम के लिए तरल दवा जैसी आवश्यक सुविधाओं का अभाव है।
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इन स्थानों पर बदहाल व्यवस्थाएं

निगम द्वारा कुल 54 शौचालयों का निर्माण कराया गया है, लेकिन महत्वपूर्ण स्थानों पर भी ये बद से बदतर स्थिति में हैं। बस स्टैंड स्थित शौचालय में टाइल्स टूटे हैं, और महिला शौचालय में हैंडवॉस, शीशा व प्रकाश व्यवस्था नहीं है। सैलई और स्वर्गाश्रम (छारबाग) स्थित शौचालय हमेशा तालों में कैद रहते हैं, जिससे लोगों को सुविधा नहीं मिल पाती।



सीवरेज सड़क पर:

क्लब चौराहा, कोटला चुंगी, ककरऊ कोठी और आसफाबाद शौचालयों का सीवरेज सीधे सड़कों पर फैल रहा है।



निगम परिसर में भी गंदगी

शौचालयों के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी स्वयं नगर निगम की है, लेकिन निगम कार्यालय में बने शौचालय की स्थिति भी बदतर है। गेट पर कबाड़, गंदगी और दुर्गंध के कारण निगम के कर्मचारी भी असहज महसूस करते हैं।




सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव के लिए नामित संस्था आर्य भट्ट के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि नये सिरे से संस्था नामित कर व्यवस्थाएं सुधारी जाएंगी।

- आशीष शुक्ला, एक्सईएन निर्माण एवं नोडल स्वच्छ सर्वेक्षण

फोटो 32 महिलाओं की सुविधा के लिए सैलई में छह माह पूर्व बने शौचालय पर लटका ताला।  संवाद

फोटो 32 महिलाओं की सुविधा के लिए सैलई में छह माह पूर्व बने शौचालय पर लटका ताला।  संवाद

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