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मरीजों को रेफर करने की डीएम के सामने खुली पोल
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Mon, 05 Oct 2015 07:28 PM IST
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जिला अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लेने के लिए डीएम ने सोमवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। गंभीर बीमारी न होने पर भी मरीजों को आगरा भेजने की जिला अस्पताल की रणनीति उजागर हो गई। डीएम ने सीएमएस से लेकर चिकित्सक और सफाई कर्मचारियों को जमकर लताड़ा। इस दौरान उन्हें फार्मासिस्ट कक्ष और चिकित्सक कक्ष बदहाल नजर आया। मरीजों के स्वास्थ्य के प्रति अनदेखी करने पर सीएमएस को कार्रवाई करने की चेतावनी दे डाली।
सुबह करीब दस बजे डीएम अचानक जिला अस्पताल परिसर में प्रवेश कर गए। आपातकालीन विभाग में ईएमओ की कुर्सी पर बैठकर अभिलेखों को चैक किया तो दांतों तले उंगली दबा गए। हादसों में घायल लोगों के साथ दांत टूटे, सांप काटने और आग से झुलसे मरीजों तक को आगरा रेफर किया गया था। डीएम ने इसका कारण पूछा तो चिकित्सकों से लेकर सीएमएस तक के पास इसका जवाब नहीं था। डीएम बोले ऐसे भी मरीज यदि आगरा रेफर हुए तो जिला अस्पताल का लाभ क्या है? ऐसे में तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से काम चल जाएगा। उन्होंने सीएमएस को चेतावनी दी कि एक रजिस्टर आपातकालीन कक्ष के गेट पर रखा जाए, जिसमें आगरा रेफर किए जाने वाले मरीज के तीमारदार का नाम, पता, मोबाइल नंबर भी दर्ज होना चाहिए। इससे कभी मरीज के तीमारदार से संपर्क कर जानकारी की जाए कि उसको आगरा ले जाने की आखिर क्या जरूरत थी। फार्मासिस्ट ड्यूटी कक्ष और चिकित्सक कक्ष का हाल देख उन्होंने फार्मासिस्ट के साथ चिकित्सकों को भी फटकार लगाई। बाथरूम में गदंगी देख सफाई कर्मचारियों को हटाने के साथ ही जेल भेजने की चेतावनी दे डाली। वार्डों में भर्ती मरीजों से पूछताछ की। एक मरीज ने बाहर से दवा लिखने की बात कही, तो डीएम ने सीएमएस से उसका कारण पूछ लिया। मरीजों की भीड़ देख अतिरिक्त दवा काउंटर खुलवाने के आदेश दिए। डीएम का निरीक्षण करीब तीन घंटे तक चला।
शासनादेश बताना पड़ा महंगा
विगत दिवस नगर मजिस्ट्रेट रवींद्र सिंह द्वारा किए निरीक्षण के बाद सीएमएस ने शासनादेश की कापी कार्यालय में टांग दी थी। शासनादेश के अनुसार जिला अस्पताल का निरीक्षण करने का अधिकार डीएम अथवा फिर उनसे बड़े अधिकारियों के पास होता है। इस आदेश को लेकर डीएम सीएमएस से खफा नजर आए।
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शून्य होगी रेफर रिपोर्ट तो मनेगा त्योहार
जिस दिन जिला अस्पताल से मरीजों के रेफर करने की रिपोर्ट शून्य होगी। उस दिन त्योहार मनाया जाएगा। यह घोषणा डीएम विजय किरन आनंद ने अस्पताल के निरीक्षण के दौरान की।
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सुबह करीब दस बजे डीएम अचानक जिला अस्पताल परिसर में प्रवेश कर गए। आपातकालीन विभाग में ईएमओ की कुर्सी पर बैठकर अभिलेखों को चैक किया तो दांतों तले उंगली दबा गए। हादसों में घायल लोगों के साथ दांत टूटे, सांप काटने और आग से झुलसे मरीजों तक को आगरा रेफर किया गया था। डीएम ने इसका कारण पूछा तो चिकित्सकों से लेकर सीएमएस तक के पास इसका जवाब नहीं था। डीएम बोले ऐसे भी मरीज यदि आगरा रेफर हुए तो जिला अस्पताल का लाभ क्या है? ऐसे में तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से काम चल जाएगा। उन्होंने सीएमएस को चेतावनी दी कि एक रजिस्टर आपातकालीन कक्ष के गेट पर रखा जाए, जिसमें आगरा रेफर किए जाने वाले मरीज के तीमारदार का नाम, पता, मोबाइल नंबर भी दर्ज होना चाहिए। इससे कभी मरीज के तीमारदार से संपर्क कर जानकारी की जाए कि उसको आगरा ले जाने की आखिर क्या जरूरत थी। फार्मासिस्ट ड्यूटी कक्ष और चिकित्सक कक्ष का हाल देख उन्होंने फार्मासिस्ट के साथ चिकित्सकों को भी फटकार लगाई। बाथरूम में गदंगी देख सफाई कर्मचारियों को हटाने के साथ ही जेल भेजने की चेतावनी दे डाली। वार्डों में भर्ती मरीजों से पूछताछ की। एक मरीज ने बाहर से दवा लिखने की बात कही, तो डीएम ने सीएमएस से उसका कारण पूछ लिया। मरीजों की भीड़ देख अतिरिक्त दवा काउंटर खुलवाने के आदेश दिए। डीएम का निरीक्षण करीब तीन घंटे तक चला।
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शासनादेश बताना पड़ा महंगा
विगत दिवस नगर मजिस्ट्रेट रवींद्र सिंह द्वारा किए निरीक्षण के बाद सीएमएस ने शासनादेश की कापी कार्यालय में टांग दी थी। शासनादेश के अनुसार जिला अस्पताल का निरीक्षण करने का अधिकार डीएम अथवा फिर उनसे बड़े अधिकारियों के पास होता है। इस आदेश को लेकर डीएम सीएमएस से खफा नजर आए।
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शून्य होगी रेफर रिपोर्ट तो मनेगा त्योहार
जिस दिन जिला अस्पताल से मरीजों के रेफर करने की रिपोर्ट शून्य होगी। उस दिन त्योहार मनाया जाएगा। यह घोषणा डीएम विजय किरन आनंद ने अस्पताल के निरीक्षण के दौरान की।