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पितृपक्ष पर खग्रास चंद्रग्रहण की छाया
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Thu, 24 Sep 2015 11:26 PM IST
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पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का भाव रखने को ही श्राद्ध कहा जाता है। हिंदू तिथि के दिन पूर्वजों की मृत्यु होती है उसी तिथि के दिन उनका श्राद्ध किया जाता है। अबकी बार 28 सितंबर को पूर्णिमा और प्रतिपदा का श्राद्ध एक साथ मनाया जाएगा इसका कारण प्रतिपदा की तिथि का घटना है अर्थात पहली तिथि का क्षय हुआ है पहला ही श्राद्ध घटा हुआ है और 28 सितंबर को ही ग्रस्तोस्त चंद्र ग्रहण भी है, जो भारत के गुजरात और राजस्थान आदि क्षेत्रों में सुबह 6.37 से 9.57 बजे तक रहेगा।
आश्विन कृष्ण पक्ष के 15 दिनों तक पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए तर्पण से तृप्त होकर लौट जाते है। श्राद्धपक्ष के 16 दिनों में पितृों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि कर्म किया जाता है। इस वर्ष में वर्षों बाद पितृपक्ष का प्रारंभ खग्रास चंद्र ग्रहण से होगा। श्राद्ध संबंधित शास्त्र पद्म पुराण, लिंग पुराण, मत्स्य पुराण, अग्नि पुराण और मदन पारीजात के अनुसार जब कभी पितृपक्ष के दौरान सूर्य और राहू अथवा सूर्य अथवा केतु की युति होती है अथवा सूर्य पर राहू अथवा केतु की दृष्टि पड़ती है तो गज छाया योग निर्मित होता है। गज छाया योग में पितृकर्म श्राद्धकर्म, तर्पण कर्म, पिंडकर्म और पितृकर्म करने से पंचकोटी फल प्राप्त होता है। गज छाया में पितृकर्म करने से पितृगण को शांति प्राप्त होती है। इस वर्ष 2015 में वर्षों पश्चात चंद्रग्रहण, संपूर्ण गज छाया योग के साथ पूर्णिमा व अमावस्या तिथियों का योग बन रहा है। इससे पहले भी चंद्रग्रहण के साथ पितृपक्ष मंगलवार दिनांक 27.09.1977 में पड़ा था। वर्ष 1977 में पितृपक्ष के 16 दिनों में दो ग्रहणों के योग भी बने थे। इस वर्ष 2015 में वर्षों बाद रविवार दिनांक 27.09.15 को पूर्णिमा तिथि पर सोमवार दिनांक 12.10.15 आश्विन अमावस्य तिथि पर संपूर्ण गज छाया योग बन रहे हैं।
शास्त्रों में पितृ को पितृ देव कहा जाता है। इस वर्ष 2015 के पितृपक्ष में पितृ की विधिवत शांति करने से पितृगण शुभाशीष देकर वंश वृद्धि करेंगे। इस वर्ष किए गए पितृ पूजन से परिवार में सुख-शांति, धन-धान्य, यश, वैभव, लक्ष्मी हमेशा बनी रहेगी, जो लोग संतानहीनता से पीड़ित हैं पितृ दोष की शांति से संतान सुख होगा। इस वर्ष श्राद्धपक्ष में किए गए विशेष उपाय से पितृदोष से सम्पूर्ण मुक्ति मिलेगी।
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श्राद्ध तिथियां
दिनांक दिन श्राद्ध तिथियां
28 सितंबर सोमवार प्रतिपदा/पूर्णिमा श्राद्ध<
29 सितंबर मंगलवार द्वितीय तिथि का श्राद्ध
30 सितंबर बुधवार भरणी/तृतीय तिथि का श्राद्ध
1 अक्टूबर बृहस्पतिवार चतुर्थी तिथि का श्राद्ध
2 अक्टूबर शुक्रवार पंचमी तिथि का श्राद्ध
3 अक्टूबर शनिवार षष्ठी तिथि का श्राद्ध
4 अक्टूबर रविवार सप्तमी तिथि का श्राद्ध
5 अक्टूबर सोमवार जीवित्पुत्रिका व्रत /अष्टमी तिथि का श्राद्ध
6 अक्टूबर मंगलवार नवमी तिथि का श्राद्ध
7 अक्टूबर बुधवार दशमी तिथि का श्राद्ध
8 अक्टूबर बृहस्पतिवार एकादशी तिथि का श्राद्ध
9अक्टूबर शुक्रवार संयासियों/द्वादशी तिथि का श्राद्ध
10 अक्टूबर शनिवार त्रयोदशी का श्राद्ध
11 अक्टूबर रविवार शस्त्र,विष,दुर्घटना से मृतों/चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध
़2 सितंबर सोमवार सोमवती अमावश्य/सर्वपितृ श्राद्ध,पितृ विसर्जन
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आश्विन कृष्ण पक्ष के 15 दिनों तक पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए तर्पण से तृप्त होकर लौट जाते है। श्राद्धपक्ष के 16 दिनों में पितृों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि कर्म किया जाता है। इस वर्ष में वर्षों बाद पितृपक्ष का प्रारंभ खग्रास चंद्र ग्रहण से होगा। श्राद्ध संबंधित शास्त्र पद्म पुराण, लिंग पुराण, मत्स्य पुराण, अग्नि पुराण और मदन पारीजात के अनुसार जब कभी पितृपक्ष के दौरान सूर्य और राहू अथवा सूर्य अथवा केतु की युति होती है अथवा सूर्य पर राहू अथवा केतु की दृष्टि पड़ती है तो गज छाया योग निर्मित होता है। गज छाया योग में पितृकर्म श्राद्धकर्म, तर्पण कर्म, पिंडकर्म और पितृकर्म करने से पंचकोटी फल प्राप्त होता है। गज छाया में पितृकर्म करने से पितृगण को शांति प्राप्त होती है। इस वर्ष 2015 में वर्षों पश्चात चंद्रग्रहण, संपूर्ण गज छाया योग के साथ पूर्णिमा व अमावस्या तिथियों का योग बन रहा है। इससे पहले भी चंद्रग्रहण के साथ पितृपक्ष मंगलवार दिनांक 27.09.1977 में पड़ा था। वर्ष 1977 में पितृपक्ष के 16 दिनों में दो ग्रहणों के योग भी बने थे। इस वर्ष 2015 में वर्षों बाद रविवार दिनांक 27.09.15 को पूर्णिमा तिथि पर सोमवार दिनांक 12.10.15 आश्विन अमावस्य तिथि पर संपूर्ण गज छाया योग बन रहे हैं।
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शास्त्रों में पितृ को पितृ देव कहा जाता है। इस वर्ष 2015 के पितृपक्ष में पितृ की विधिवत शांति करने से पितृगण शुभाशीष देकर वंश वृद्धि करेंगे। इस वर्ष किए गए पितृ पूजन से परिवार में सुख-शांति, धन-धान्य, यश, वैभव, लक्ष्मी हमेशा बनी रहेगी, जो लोग संतानहीनता से पीड़ित हैं पितृ दोष की शांति से संतान सुख होगा। इस वर्ष श्राद्धपक्ष में किए गए विशेष उपाय से पितृदोष से सम्पूर्ण मुक्ति मिलेगी।
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श्राद्ध तिथियां
दिनांक दिन श्राद्ध तिथियां
28 सितंबर सोमवार प्रतिपदा/पूर्णिमा श्राद्ध<
29 सितंबर मंगलवार द्वितीय तिथि का श्राद्ध
30 सितंबर बुधवार भरणी/तृतीय तिथि का श्राद्ध
1 अक्टूबर बृहस्पतिवार चतुर्थी तिथि का श्राद्ध
2 अक्टूबर शुक्रवार पंचमी तिथि का श्राद्ध
3 अक्टूबर शनिवार षष्ठी तिथि का श्राद्ध
4 अक्टूबर रविवार सप्तमी तिथि का श्राद्ध
5 अक्टूबर सोमवार जीवित्पुत्रिका व्रत /अष्टमी तिथि का श्राद्ध
6 अक्टूबर मंगलवार नवमी तिथि का श्राद्ध
7 अक्टूबर बुधवार दशमी तिथि का श्राद्ध
8 अक्टूबर बृहस्पतिवार एकादशी तिथि का श्राद्ध
9अक्टूबर शुक्रवार संयासियों/द्वादशी तिथि का श्राद्ध
10 अक्टूबर शनिवार त्रयोदशी का श्राद्ध
11 अक्टूबर रविवार शस्त्र,विष,दुर्घटना से मृतों/चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध
़2 सितंबर सोमवार सोमवती अमावश्य/सर्वपितृ श्राद्ध,पितृ विसर्जन