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पंचशील सिद्धांत को अपनाने पर जोर दिया, अहंकार, तृष्णा से दूर रहने का संदेश
अमर उजाला ब्यूरो फीरोजाबाद।
Updated Sat, 22 Oct 2016 11:28 PM IST
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बुद्धम् शरणम् गच्छामि से गूंजी धम्म यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
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नगर में शनिवार को बौद्ध धर्म के अनुयायियों की ओर से धम्म यात्रा निकाली गई। इस दौरान बुद्धम शरणम् गच्छामि की गूंज से संपूर्ण यात्रा गूंज उठी। पूज्य भदंत बुद्ध शरण महास्थविर के निर्देशन में धम्म यात्रा का शुभारंभ कोटला चुंगी चौराहा से प्रारंभ हुई। यात्रा जगह-जगह स्वागत किया गया। बाद में यह पीडी जैन कालेज मैदान में आयोजित दो दिवसीय भिक्षु महासम्मेलन में पहुंची। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बौद्ध भिक्षुओं को भगवान बुद्ध का शांति का संदेश मानने, पंचशील सिद्धांत अपनाने तथा जीवों पर दया करने का आह्वान किया गया। साथ ही ज्ञानार्जन करके समाज को सही रास्ते पर ले जाने की बात बताई गई।
इस दौरान अखिल भारतीय बौद्ध संघ के राष्ट्रीय महासचिव एवं भदंत प्रज्ञादीप महास्थिविर ने भगवान बुद्ध और बाबा साहेब डा.भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके सम्मेलन का शुभारंभ किया। अखिल भारतीय भिक्षु महासंघ के अध्यक्ष भदंत आनंद महास्थविर ने कहा भिक्षु किसी का गुलाम नहीं होता। भिक्षु हमेशा मानवता का पुजारी है और रहेगा। गुजरात से आए भिक्षु देवानंद ने कहा कि तथागत के संदेश को जीवन में उतारना ही इस बौद्ध महासम्मेलन की सार्थकता है। हमें रोग, भय एवं दुख से मुक्ति मिल जाएगी। वहीं, जापान के कोवेसिटी यूनीवर्सिटी में प्रोफेसर बौद्ध भिक्षु भदंत रवि ने कहा कि हम सभी बुद्धम् शरणम् गच्छामि... बोलते हैं लेकिन जाते नहीं है। यदि चले जाएं तो फिर तो कोई दिक्कत नहीं होगी। बताया कि थाईलैंड में बौद्ध धर्म को अपनाने वाला ही शासक बनता है। केपी सिंह बौद्ध एडवोकेट ने कहा कि पंचशील को अपनाना जरूरी है। दिल्ली से आए महीपाल सिंह महीप ने भिक्षु के 227 नियम अपने आप में एक कानून है। बाबा साहेब ने 24 नवंबर 1949 में संविधान सभा में भाषण ही दिया तो उसी का अंश है। अध्यक्षता करते हुए भदंत बुध शरण महास्थविर ने बौद्ध धर्म का महत्व समझाया।
भगवान बुद्ध के प्रतिमा का अनावरण
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। रत्नपुंज बुद्ध बिहार नगला मिर्जा बड़ा पर धम्म यात्रा के समापन के साथ भिक्षु संघ ने भगवान बुद्ध के प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान आयोजित समिति के मीत्तल प्रसाद निमेष, गजेंद्र सिंह बौद्ध एडवोकेट, हेमराज सिंह, रामवीर सिंह तारबाबू, बीडी देशमुख, प्रदीप कुमार गौतम, मुरारी लाल सभासद, डा. वीरालाल आनंद,वीरी सिंह आनंद व इं. हरीमोहन,राजवीर सिंह सिद्धार्थ आदि रहे।
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साहित्यिक किताबों के लगे थे काउंटर
सम्मेलन स्थल पर बौद्ध धर्म के अनेक पाठ्य पुस्तकों के काउंटर लगाए गए थे ताकि बौद्ध उपासक वहां से पाठ्य पुस्तकों की खरीददारी कर सकें। महिलाएं, पुुरुष ही नहीं बल्कि छात्र एवं छात्राएं खरीददारी कर रहीं थी।
वालंटियर संभाले थे व्यवस्थाएं
बौद्ध अनुयायी युवा उपासक (वालंटियर) बौद्ध सम्मेलन की सुरक्षा व्यवस्था की कमान को संभाले हुए थे। हालांकि सुरक्षा के लिहाज से क्यूआरटी की गाड़ी तैनात थी। लेकिन वहां पर आने वाले वाहनों को व्यवस्थित ढंग से खड़ा कराने तथा कार्यक्रम में आने वालों को बैठाने तक की व्यवस्थाओं की कमान वालंटियरों ने संभाल रखी थी।
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इस दौरान अखिल भारतीय बौद्ध संघ के राष्ट्रीय महासचिव एवं भदंत प्रज्ञादीप महास्थिविर ने भगवान बुद्ध और बाबा साहेब डा.भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके सम्मेलन का शुभारंभ किया। अखिल भारतीय भिक्षु महासंघ के अध्यक्ष भदंत आनंद महास्थविर ने कहा भिक्षु किसी का गुलाम नहीं होता। भिक्षु हमेशा मानवता का पुजारी है और रहेगा। गुजरात से आए भिक्षु देवानंद ने कहा कि तथागत के संदेश को जीवन में उतारना ही इस बौद्ध महासम्मेलन की सार्थकता है। हमें रोग, भय एवं दुख से मुक्ति मिल जाएगी। वहीं, जापान के कोवेसिटी यूनीवर्सिटी में प्रोफेसर बौद्ध भिक्षु भदंत रवि ने कहा कि हम सभी बुद्धम् शरणम् गच्छामि... बोलते हैं लेकिन जाते नहीं है। यदि चले जाएं तो फिर तो कोई दिक्कत नहीं होगी। बताया कि थाईलैंड में बौद्ध धर्म को अपनाने वाला ही शासक बनता है। केपी सिंह बौद्ध एडवोकेट ने कहा कि पंचशील को अपनाना जरूरी है। दिल्ली से आए महीपाल सिंह महीप ने भिक्षु के 227 नियम अपने आप में एक कानून है। बाबा साहेब ने 24 नवंबर 1949 में संविधान सभा में भाषण ही दिया तो उसी का अंश है। अध्यक्षता करते हुए भदंत बुध शरण महास्थविर ने बौद्ध धर्म का महत्व समझाया।
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भगवान बुद्ध के प्रतिमा का अनावरण
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। रत्नपुंज बुद्ध बिहार नगला मिर्जा बड़ा पर धम्म यात्रा के समापन के साथ भिक्षु संघ ने भगवान बुद्ध के प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान आयोजित समिति के मीत्तल प्रसाद निमेष, गजेंद्र सिंह बौद्ध एडवोकेट, हेमराज सिंह, रामवीर सिंह तारबाबू, बीडी देशमुख, प्रदीप कुमार गौतम, मुरारी लाल सभासद, डा. वीरालाल आनंद,वीरी सिंह आनंद व इं. हरीमोहन,राजवीर सिंह सिद्धार्थ आदि रहे।
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साहित्यिक किताबों के लगे थे काउंटर
सम्मेलन स्थल पर बौद्ध धर्म के अनेक पाठ्य पुस्तकों के काउंटर लगाए गए थे ताकि बौद्ध उपासक वहां से पाठ्य पुस्तकों की खरीददारी कर सकें। महिलाएं, पुुरुष ही नहीं बल्कि छात्र एवं छात्राएं खरीददारी कर रहीं थी।
वालंटियर संभाले थे व्यवस्थाएं
बौद्ध अनुयायी युवा उपासक (वालंटियर) बौद्ध सम्मेलन की सुरक्षा व्यवस्था की कमान को संभाले हुए थे। हालांकि सुरक्षा के लिहाज से क्यूआरटी की गाड़ी तैनात थी। लेकिन वहां पर आने वाले वाहनों को व्यवस्थित ढंग से खड़ा कराने तथा कार्यक्रम में आने वालों को बैठाने तक की व्यवस्थाओं की कमान वालंटियरों ने संभाल रखी थी।