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नोटबंदी ने ले ली बालिका की जान
ब्यूरो, अमर उजाला,फीरोजाबाद
Updated Sun, 27 Nov 2016 11:45 PM IST
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नोटबंदी लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। नोटबंदी ने मटसेना के गांव ऊंधनी निवासी दो साल की बालिका रिया की जान ले ली। परिवार वालों पर पांच-पांच सौ के पुराने नोट थे इसलिए चिकित्सकों ने इलाज देने से मना कर दिया। परिवारीजन बच्ची को लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक घूमते रहे।
मटसेना के गांव ऊंधनी निवासी जगराम की बेटी रिया को शनिवार को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। परिवारीजनों ने उसका इलाज गांव के चिकित्सक से ही कराया। हालत गंभीर होने पर परिवारीजन बाइक से बालिका को शहर ले आए। पहले वह सर्विस रोड स्थित एक चिकित्सक के पास गए लेकिन वहां चिकित्सक ने इलाज शुरू करने से पहले प्रचलित करेंसी के बारे में पूछा। परिवारीजनों ने कहा कि अभी पांच-पांच सौ के नोट ही हैं। बैंक भी आज बंद हैं। वहां इलाज नहीं मिला तो दूसरे चिकित्सक के पास लेकर दौड़े लेकिन रास्ते में बच्ची ने दम तोड़ दिया। बेबस परिवारीजन बच्ची के शव को गांव ले आए और यहां उसका अंतिम संस्कार कर दिया। कुछ दिन पहले जलेसर रोड पर एक चिकित्सक के यहां एका क्षेत्र की बच्ची की जान चली गई थी। खैरगढ़ में बैंक से कैश न मिलने पर किसान ने आत्महत्या कर ली थी।
यह मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। पहले ही कहा जा चुका है कि इमरजेंसी सेवाओं में चिकित्सक मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं। करेंसी के अभाव में इलाज न देना गलत है।
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डा. पुष्कर आनंद - सीएमओ
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मटसेना के गांव ऊंधनी निवासी जगराम की बेटी रिया को शनिवार को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। परिवारीजनों ने उसका इलाज गांव के चिकित्सक से ही कराया। हालत गंभीर होने पर परिवारीजन बाइक से बालिका को शहर ले आए। पहले वह सर्विस रोड स्थित एक चिकित्सक के पास गए लेकिन वहां चिकित्सक ने इलाज शुरू करने से पहले प्रचलित करेंसी के बारे में पूछा। परिवारीजनों ने कहा कि अभी पांच-पांच सौ के नोट ही हैं। बैंक भी आज बंद हैं। वहां इलाज नहीं मिला तो दूसरे चिकित्सक के पास लेकर दौड़े लेकिन रास्ते में बच्ची ने दम तोड़ दिया। बेबस परिवारीजन बच्ची के शव को गांव ले आए और यहां उसका अंतिम संस्कार कर दिया। कुछ दिन पहले जलेसर रोड पर एक चिकित्सक के यहां एका क्षेत्र की बच्ची की जान चली गई थी। खैरगढ़ में बैंक से कैश न मिलने पर किसान ने आत्महत्या कर ली थी।
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यह मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। पहले ही कहा जा चुका है कि इमरजेंसी सेवाओं में चिकित्सक मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं। करेंसी के अभाव में इलाज न देना गलत है।
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