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एनजीटी ने उड़ाई सुहागनगरी के उद्यमियों की नींद

Thu, 02 Jul 2015 09:57 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Thu, 02 Jul 2015 09:57 PM IST
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NGT flown  sleep of entrepreneurs of Suhagnagri
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सुहागनगरी के उद्यमियों की नींद उड़ा दी है। 60 इकाइयों को बंद कराने की खबर की हकीकत जानने को दिनभर फोन घनघनाते रहे। हालांकि अफसर कुछ भी कहने से बचते नजर आए।
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सुहागनगरी में कई इकाइयां रातों रात क्षमता वृद्धि कर बड़ी इकाइयों की कतार में खड़ी हो गई हैं तो कई इकाइयां मानकों को ताक पर रखकर संचालित हो रही हैं। केंद्र सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा शहर में संचालित इकाइयों का सर्वे किया गया, जिसमें यह हकीकत सामने आई थी कि कई इकाइयों में स्थापित फर्नेश का साइज व होल्डिंग कैपेसिटी में वृद्धि की गई है। यह रिपोर्ट जिला प्रशासन द्वारा टीटीजेड अथॉरिटी को सौंपी गई थी। सात जनवरी 15 को टीटीजेड अध्यक्ष द्वारा बुलाई गई बैठक में बड़ी इकाइयों को राहत देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अब टीटीजेड में नई इकाइयों की स्थापना एवं क्षमता वृद्धि नहीं की जाएगी। यदि कोई आवेदन आता है तो उसे टीटीजेड अथॉरिटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। राहत पाने वाली इकाइयों में यही 60 इकाईयां थी, जिन्हें टीटीजेड अथॉरिटी ने हरी झंडी दे दी थी। अब एनजीटी ने सूचना अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर ही याचिका दायर कर इन इकाइयों को बंद करने की मांग उठाई है। केंद्र द्वारा इन इकाइयों के संबंध में जवाब मांगे जाने से उद्यमियों की नींद उड़ गई है। इन 60 इकाइयों में कौन-कौन सी इकाइयां शामिल हैं, यह जानने को दिनभर उद्यमियों के फोन घनघनाते रहे।
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बोतल कारोबार समाप्त करने को लाबिंग कर रहे बड़े ग्रुप
एनजीटी द्वारा 60 इकाइयों को बंद किए जाने की मांग के पीछे सुहागनगरी के बोतल कारोबार को समाप्त करने के पीछे लगातार बड़े ग्रुप लाबिंग कर रहे हैं। पूर्व में भी सुहागनगरी के कांच उत्पादों की खराब गुणवत्ता, प्रदूषण बढ़ाने सहित कई आरोप लगाते हुए बोतल कारोबार को बंद कराने की मांग उठाई गई थी।
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मानक से कम है प्रदूषण
उद्योग एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसर सुहागनगरी के प्रदूषण को मानक से काफी नीचे मानते हैं। हालांकि सुहागनगरी में आएसपीएम का मानक छह गुना से अधिक है, परंतु अफसरों का तर्क है कि वर्तमान में आरएसपीएम सभी जिलों में बड़ा हुआ है।
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