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एनजीटी ने मांगा सुप्रीम कोर्ट का आदेश
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
Updated Tue, 21 Feb 2017 11:07 PM IST
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- फोटो : file photo
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कांच उद्योग से बढ़ रहे प्रदूषण, क्षमता विस्तार के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने विपक्ष के वकील से सुप्रीम कोर्ट का आदेश मांगा है, जिसमें क्षमता विस्तार पर रोक लगाने की बात कही गई है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष के वकीलों में बहस भी हुई।
बता दें कि नई दिल्ली की सेफ संस्था द्वारा फिरोजाबाद के कांच उद्योग से बढ़ रहे प्रदूषण, इकाइयों द्वारा क्षमता विस्तार करने, अफसरों द्वारा गलत रूप से इकाइयों के संचालन की अनुमति देने से मामले में सितंबर-15 में एनजीटी में याचिका दायर की है। एनजीटी में मंगलवार को सुनवाई के दौरान सेफ संस्था के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्षमता विस्तार पर रोक लगाई गई है। इसके बावजूद कांच इकाइयों ने क्षमता विस्तार किया। एनजीटी के चीफ जस्टिस ने पूछा सुप्रीम कोर्ट ने क्षमता विस्तार के संबंध में क्या आदेश दिया है? इसकी कॉपी उपलब्ध कराएं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वकील ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वर्ष 1996 तक कोयले से इकाइयों का संचालन होता था। हाईकोर्ट की रोक के बाद नेचुरल गैस से इकाइयां संचालित हैं। गैस आने के कारण कुछ इकाइयों में क्षमता विस्तार हुआ है, लेकिन क्षमता विस्तार पर रोक का कोई आदेश नहीं है। दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद सुनवाई के लिए तिथि 20 मार्च निर्धारित कर दी गई है।
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बता दें कि नई दिल्ली की सेफ संस्था द्वारा फिरोजाबाद के कांच उद्योग से बढ़ रहे प्रदूषण, इकाइयों द्वारा क्षमता विस्तार करने, अफसरों द्वारा गलत रूप से इकाइयों के संचालन की अनुमति देने से मामले में सितंबर-15 में एनजीटी में याचिका दायर की है। एनजीटी में मंगलवार को सुनवाई के दौरान सेफ संस्था के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्षमता विस्तार पर रोक लगाई गई है। इसके बावजूद कांच इकाइयों ने क्षमता विस्तार किया। एनजीटी के चीफ जस्टिस ने पूछा सुप्रीम कोर्ट ने क्षमता विस्तार के संबंध में क्या आदेश दिया है? इसकी कॉपी उपलब्ध कराएं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वकील ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वर्ष 1996 तक कोयले से इकाइयों का संचालन होता था। हाईकोर्ट की रोक के बाद नेचुरल गैस से इकाइयां संचालित हैं। गैस आने के कारण कुछ इकाइयों में क्षमता विस्तार हुआ है, लेकिन क्षमता विस्तार पर रोक का कोई आदेश नहीं है। दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद सुनवाई के लिए तिथि 20 मार्च निर्धारित कर दी गई है।
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