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नाम का ट्रामा सेंटर, मरीजों को किया जाता रेफर
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फिरोजाबाद। जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिल गया। स्टाफ की संख्या में इजाफा हो गया। लेकिन मरीजों को ट्रॉमा सेंटर में पर्याप्त उपचार नहीं मिल पा रहा। गंभीर मरीजों को आज भी आगरा या फिर निजी अस्पताल में रेफर किए जाने का खेल चल रहा है। कई बार रेफर के चक्कर में मरीज की जान चली जाती है। इसको लेकर कई बार अस्पताल में हंगामे भी हुए। तीमारदारों ने तोड़फोड़ करने के साथ ही स्टाफ के साथ अभद्रता तक की। लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं में किसी तरह की बदलाव होता नजर नहीं आ रहा।
मेडिकल कालेज परिसर में बने सरकारी ट्रॉमा सेंटर की बात की जाए तो यहां की स्थिति काफी दयनीय है। ऑपरेशन थिएटर में ताला पड़ा है। मशीनों पर धूल जमी है। ऑपरेशन करने वाले औजारों में उपयोग में न होने के कारण जंग लग गई है। एक्सरे मशीन डेढ़ साल से अधिक समय से बंद पड़ी है। अल्ट्रासांउड सेवा भी पटरी पर नहीं लौट सकी। जिसके चलते मरीज को समय पर उपचार न मिलने के कारण वह दम तोड़ देते हैं।
माह में 45 से 50 गंभीर मरीज किए जाते आगरा रेफर
सरकारी ट्रामा सेंटर के अभिलेखों पर गौर किया जाए तो यहां से प्रतिदिन दो से तीन मरीजों को आगरा रेफर किया जाता है। माह में यह आंकड़ा 45 से 50 मरीजों का बैठता है।
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केवल प्राथमिक उपचार की है सुविधा
ट्रॉमा सेंटर में जहां मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार मुहैया कराया जाता है। जो पीएससी और सीएचसी पर भी है। यहां आने वाले पेट दर्द या फिर उल्टी दस्त के दवा मरीजों को दी जाती है या फिर जेल जाने वाले आरोपियों अथवा मारपीट की घटना में घायल हुए लोगों के मेडिकल किए जाते है। इसके अलावा कोई और सुविधा यहां नहीं है।
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मेडिकल कालेज परिसर में बने सरकारी ट्रॉमा सेंटर की बात की जाए तो यहां की स्थिति काफी दयनीय है। ऑपरेशन थिएटर में ताला पड़ा है। मशीनों पर धूल जमी है। ऑपरेशन करने वाले औजारों में उपयोग में न होने के कारण जंग लग गई है। एक्सरे मशीन डेढ़ साल से अधिक समय से बंद पड़ी है। अल्ट्रासांउड सेवा भी पटरी पर नहीं लौट सकी। जिसके चलते मरीज को समय पर उपचार न मिलने के कारण वह दम तोड़ देते हैं।
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माह में 45 से 50 गंभीर मरीज किए जाते आगरा रेफर
सरकारी ट्रामा सेंटर के अभिलेखों पर गौर किया जाए तो यहां से प्रतिदिन दो से तीन मरीजों को आगरा रेफर किया जाता है। माह में यह आंकड़ा 45 से 50 मरीजों का बैठता है।
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केवल प्राथमिक उपचार की है सुविधा
ट्रॉमा सेंटर में जहां मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार मुहैया कराया जाता है। जो पीएससी और सीएचसी पर भी है। यहां आने वाले पेट दर्द या फिर उल्टी दस्त के दवा मरीजों को दी जाती है या फिर जेल जाने वाले आरोपियों अथवा मारपीट की घटना में घायल हुए लोगों के मेडिकल किए जाते है। इसके अलावा कोई और सुविधा यहां नहीं है।