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Firozabad News: मोहम्मद गौरी ने शिकोहाबाद के चौमुखी महादेव मंदिर को बनाया था निशाना
Sat, 14 Feb 2026 12:11 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Sat, 14 Feb 2026 12:11 AM IST
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शिकोहाबाद के चौमुखी महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग। संवाद
- फोटो : शिकोहाबाद के चौमुखी महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग। संवाद
शिकोहाबाद (फिरोजाबाद)। नगर के एटा रोड पर स्थित चौमुखी महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास के उतार-चढ़ाव का गवाह है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा स्थापना से लेकर आक्रांता मोहम्मद गौरी के हमले तक, इस मंदिर की कहानी जितनी प्राचीन है, उतनी ही गौरवशाली भी।
मान्यताओं के अनुसार, मगध नरेश जरासंध के विरुद्ध युद्ध के दौरान स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इस शिवलिंग को स्थापित किया था। यह स्थान प्राचीन यदु-राज्य की रक्षा पंक्ति का मुख्य केंद्र हुआ करता था। मंदिर के महंत रजत शुक्ला बताते हैं कि इस शिवलिंग को संपूर्ण ब्रह्मांडीय शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश के चार मुखों के साथ-साथ ऊपरी भाग पर मां काली की आकृति विराजमान है, जो इसे पूरे ब्रज क्षेत्र में अद्वितीय बनाती है।
मुस्लिम आक्रांता मोहम्मद गौरी ने इस मंदिर की भव्यता को नष्ट करने का प्रयास किया था। हमले में मंदिर की दीवारें ढहा दी गईं, लेकिन शिवलिंग सुरक्षित रहा।
राजस्व रिकॉर्ड और पुराने नक्शों के अनुसार, गौरी के हमले के बाद इस क्षेत्र का नाम किशनपुर मोहम्मदाबाद हो गया था। बाद में, शाहजहां का बड़ा पुत्र और सूफी विचारक दारा शिकोह यहां के परिवेश से प्रभावित होकर भगवंत के बाग में ठहरा। उसी के नाम पर कालांतर में इस नगर का नाम शिकोहाबाद प्रचलित हुआ।
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गौरी की सेना की खंडित तलवार आज भी मौजूद
मंदिर के मलबे से एक प्राचीन तलवार मिली थी, जिसे मोहम्मद गौरी की सेना का बताया जाता है। मंदिर के महंत रजत शुक्ला के अनुसार, इस तलवार का ऊपरी हिस्सा टूटा हुआ है, जो आक्रमण के दौरान हुए संघर्ष की पुष्टि करता है। इस ऐतिहासिक अवशेष को आज भी मंदिर में सहेज कर रखा गया है।
द्वापर का सैन्य महत्व
ब्रज पर शोध करने वाले वृंदावन निवासी जन्मभूमि केस के पैरोकार महेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि मथुरा-आगरा मंडल कृष्ण और जरासंध के बीच हुए 17 युद्धों का गवाह रहा है। प्राचीन काल में चौमुखी मंदिर राज्य की सीमाओं की सुरक्षा के प्रतीक होते थे, जिससे इस मंदिर के सामरिक और आध्यात्मिक महत्व का पता चलता है।
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मान्यताओं के अनुसार, मगध नरेश जरासंध के विरुद्ध युद्ध के दौरान स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इस शिवलिंग को स्थापित किया था। यह स्थान प्राचीन यदु-राज्य की रक्षा पंक्ति का मुख्य केंद्र हुआ करता था। मंदिर के महंत रजत शुक्ला बताते हैं कि इस शिवलिंग को संपूर्ण ब्रह्मांडीय शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश के चार मुखों के साथ-साथ ऊपरी भाग पर मां काली की आकृति विराजमान है, जो इसे पूरे ब्रज क्षेत्र में अद्वितीय बनाती है।
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मुस्लिम आक्रांता मोहम्मद गौरी ने इस मंदिर की भव्यता को नष्ट करने का प्रयास किया था। हमले में मंदिर की दीवारें ढहा दी गईं, लेकिन शिवलिंग सुरक्षित रहा।
राजस्व रिकॉर्ड और पुराने नक्शों के अनुसार, गौरी के हमले के बाद इस क्षेत्र का नाम किशनपुर मोहम्मदाबाद हो गया था। बाद में, शाहजहां का बड़ा पुत्र और सूफी विचारक दारा शिकोह यहां के परिवेश से प्रभावित होकर भगवंत के बाग में ठहरा। उसी के नाम पर कालांतर में इस नगर का नाम शिकोहाबाद प्रचलित हुआ।
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गौरी की सेना की खंडित तलवार आज भी मौजूद
मंदिर के मलबे से एक प्राचीन तलवार मिली थी, जिसे मोहम्मद गौरी की सेना का बताया जाता है। मंदिर के महंत रजत शुक्ला के अनुसार, इस तलवार का ऊपरी हिस्सा टूटा हुआ है, जो आक्रमण के दौरान हुए संघर्ष की पुष्टि करता है। इस ऐतिहासिक अवशेष को आज भी मंदिर में सहेज कर रखा गया है।
द्वापर का सैन्य महत्व
ब्रज पर शोध करने वाले वृंदावन निवासी जन्मभूमि केस के पैरोकार महेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि मथुरा-आगरा मंडल कृष्ण और जरासंध के बीच हुए 17 युद्धों का गवाह रहा है। प्राचीन काल में चौमुखी मंदिर राज्य की सीमाओं की सुरक्षा के प्रतीक होते थे, जिससे इस मंदिर के सामरिक और आध्यात्मिक महत्व का पता चलता है।