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लिखी जा रही पांच की, मिल रही तीन दिन की दवा
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लिखी जा रही पांच की, मिल रही तीन दिन की दवा
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक मरीज की पर्ची पर पांच दिन की दवा लिख रहे। इसके विपरीत वितरण स्थल से तीन ही दिन की दवाइयां मिल रही हैं। मरीजों का आरोप है कि पर्चे पर लिखी सभी दवाइयां नहीं मिल पा रहीं। दवा बाहर से भी लिखी जा रही है।
गमी के कारण मरीज बढ़े हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में रजिस्ट्रेशन काउंटर से लेकर ओपीडी और दवा की खिड़की पर लंबी कतार देखने को मिल रही है। पंजीयन से दवा लेने तक घंटे भर से अधिक का वक्त लग रहा है। काउंटर पर तीन दिन की ही दवा मिलने से दूर से आने वाले मरीज परेशान हैं। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. श्याममोहन गुप्ता बोले, मरीज को दवा फायदा कर रही है या नहीं। यह तीन दिन में पता चल जाता है। यदि दवा फायदा कर रही है तो मरीज दोबारा दवा ले जा सकता है। लंबी बीमारी है तो उसे हम सात दिन की दवा उपलब्ध करा देते हैं। सभी दवाएं हमारे पास हैं। बाहर से दवा न लिखने के लिए हमने नोटिस जारी कर दिया है। हम पुन: जांच करेंगे।
क्या कहते हैं मरीज
- रसूलपुर से आई गजाला ने कहा कि भतीजे को दस्त हो रहा है। डॉक्टर ने पांच दिन की दवा पर्चे पर लिखी है। मगर तीन दिन की दवा देकर लौटा दिया गया। पर्चे पर लिखीं पांच में से तीन दवाएं ही मिलीं। शेष बाहर से खरीदने के लिए कहा गया है। तीन दिन बाद फिर दवा लेने आएंगे। बाहर की दवा के लिए पैसे नहीं हैं।
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- ढ़ोलपुरा निवासी भान सिंह ने कहा कि शरीर पर खुजली हो गई है। डॉक्टर ने सात दिन की दवा पर्चे पर लिखी। मगर, तीन दिन की दवा मिली है। घर दूर है। ऐसे में दोबारा दवा लेने आने में दिक्कत होती है।
- आजाद नगर निवासी याद राम ने कहा कि सुबह से रजिस्ट्रेशन की लाइन में लगे, दोपहर तक दवा मिल सकी है। पर्चे पर लिखी पूरी दवाइयां नहीं मिली। डॉक्टर ने पांच दिन के बाद दिखाने को कहा है और यहां दवा सिर्फ तीन दिन की दी है।
- हरिदासपुर निवासी रवि कुमार ने बताया कि गले में दिक्कत है। कई किलोमीटर की दूरी तय करके आए हैं। तीन ही दिन की दवा मिली और एक सीरप बाहर से लिखा गया है। जो 200 रुपये का है। इतने रुपये होते तो सरकारी में इलाज कराने क्यों आते।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक मरीज की पर्ची पर पांच दिन की दवा लिख रहे। इसके विपरीत वितरण स्थल से तीन ही दिन की दवाइयां मिल रही हैं। मरीजों का आरोप है कि पर्चे पर लिखी सभी दवाइयां नहीं मिल पा रहीं। दवा बाहर से भी लिखी जा रही है।
गमी के कारण मरीज बढ़े हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में रजिस्ट्रेशन काउंटर से लेकर ओपीडी और दवा की खिड़की पर लंबी कतार देखने को मिल रही है। पंजीयन से दवा लेने तक घंटे भर से अधिक का वक्त लग रहा है। काउंटर पर तीन दिन की ही दवा मिलने से दूर से आने वाले मरीज परेशान हैं। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. श्याममोहन गुप्ता बोले, मरीज को दवा फायदा कर रही है या नहीं। यह तीन दिन में पता चल जाता है। यदि दवा फायदा कर रही है तो मरीज दोबारा दवा ले जा सकता है। लंबी बीमारी है तो उसे हम सात दिन की दवा उपलब्ध करा देते हैं। सभी दवाएं हमारे पास हैं। बाहर से दवा न लिखने के लिए हमने नोटिस जारी कर दिया है। हम पुन: जांच करेंगे।
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क्या कहते हैं मरीज
- रसूलपुर से आई गजाला ने कहा कि भतीजे को दस्त हो रहा है। डॉक्टर ने पांच दिन की दवा पर्चे पर लिखी है। मगर तीन दिन की दवा देकर लौटा दिया गया। पर्चे पर लिखीं पांच में से तीन दवाएं ही मिलीं। शेष बाहर से खरीदने के लिए कहा गया है। तीन दिन बाद फिर दवा लेने आएंगे। बाहर की दवा के लिए पैसे नहीं हैं।
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- ढ़ोलपुरा निवासी भान सिंह ने कहा कि शरीर पर खुजली हो गई है। डॉक्टर ने सात दिन की दवा पर्चे पर लिखी। मगर, तीन दिन की दवा मिली है। घर दूर है। ऐसे में दोबारा दवा लेने आने में दिक्कत होती है।
- आजाद नगर निवासी याद राम ने कहा कि सुबह से रजिस्ट्रेशन की लाइन में लगे, दोपहर तक दवा मिल सकी है। पर्चे पर लिखी पूरी दवाइयां नहीं मिली। डॉक्टर ने पांच दिन के बाद दिखाने को कहा है और यहां दवा सिर्फ तीन दिन की दी है।
- हरिदासपुर निवासी रवि कुमार ने बताया कि गले में दिक्कत है। कई किलोमीटर की दूरी तय करके आए हैं। तीन ही दिन की दवा मिली और एक सीरप बाहर से लिखा गया है। जो 200 रुपये का है। इतने रुपये होते तो सरकारी में इलाज कराने क्यों आते।