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स्वास्थ्य योजनाएं अनेक, लेकिन व्यवस्थाएं फेल

Tue, 04 Oct 2016 01:19 AM IST
Amar Ujala
Amar Ujala Updated Tue, 04 Oct 2016 01:19 AM IST
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Many health plans, but the system failed
स्वास्थ्य योजनाएं अनेक, लेकिन व्यवस्थाएं फेल - फोटो : Amar Ujala
- अलग-अलग योजनाओं के  नाम पर पानी की तरह बहाया जा रहा पैसा
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- करोड़ों खर्च होने के बाद भी नहीं मिल रहा जनता को योजनाओं का लाभ

स्वास्थ्य विभाग में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। करोड़ों रुपया इन योजनाओं पर खर्च किया जा रहा है फिर भी लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।
सुविधाओं के नाम पर सिर्फ कागजी घोडे़ दौड़ाए जा रहे हैं। योजनाओं पर करोड़ों रुपया खर्च हुआ, मगर मरीजों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है।

संपूर्णा क्लीनिक का नहीं मिल पा रहा लाभ
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जिला महिला अस्पताल में संपूर्णा क्लीनिक की स्थापना की गई थी। इसका उद्देश्य महिलाओं को बेहतर उपचार देना था। सरकार की मंशा के अनुरूप यहां उपचार नहीं मिल पा रहा है। यहां महिलाओं का ब्लड़ प्रेशर, खून की जांच, बच्चेदानी की जांच आदि बीमारियाें का विशेष रूप से इलाज होना था। इसके लिए लाखों रुपये का बजट खर्च कर दिया गया। औपचारिकता के लिए एनसीडी क्लीनिक की एक काउंसलर को अटैच किया गया है। बाकी कोई स्टाफ इसमें तैनात नहीं किया गया है।
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वृद्धजन वार्ड का नहीं खुल सका ताला
60 वर्ष की आयु के बुजुर्गों को अलग से इलाज की शासन ने व्यवस्था की थी। मगर यहां वृद्धजनों के लिए योजना फेल साबित हुई। वार्ड को तैयार करने में दो लाख रुपये खर्च कर दिए गए। एक चिकित्सक की तैनाती भी कर दी गई। मगर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से वृद्धजन वार्ड का ताला नहीं खुल सका है। यहां चिकित्सक आते हैं, ड्यूटी करके चले जाते हैं।
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शव वाहन बन गया शोपीस
गरीब लोग शव को अस्पतालों से रिक्शे या ठेले पर घर ले जाते थे। या फिर दूर-दराज के इलाकों के लिए प्राइवेट एंबुलेंस करनी पड़ती थी, जिसका किराया गरीबों के बजट में नहीं था। शासन ने शव वाहन दिया। मगर कोई गाइडलाइन नहीं आई और उसे चलाने के लिए कोई ड्राइवर भी तैनात नहीं किया गया। लाखों की धनराशि से खरीदा गया शव वाहन एक भी शव को ले जाने के काम नहीं आया। महज शोपीस बनकर रह गया।

ट्रामा सेंटर बनाने का असल मकसद फेल
सरकारी ट्रामा सेंटर का निर्माण एक करोड 50 लाख 71 हजार रुपये की लागत से किया गया। मगर यहां सुविधाएं झोलाछाप क्लीनिक जैसी हैं। यहां अनट्रेंड एवं बाहरी लोगों के भरोसे व्यवस्थाएं रहती हैं। घायलों को आज भी आगरा भी रेफर किया जाता है। नई योजना के नाम पर बजट खर्च हुआ है। इसमें पुरानी इमरजेंसी को शिफ्ट कर दिया गया है।


क्या कहते हैं अधिकारी
यह सब शासन की व्यवस्थाएं हैं। जो भी संसाधन हैं, हम इनमें ही बढ़िया करने का प्रयास करते हैं। वृद्ध वार्ड जल्द शुरू करा दिया जाएगा। थोड़ा बहुत काम रह गया है। वहीं, संपूर्णा क्लीनिक की जांच हम स्वयं करेंगे।
डॉ. पुष्कर आनंद, सीएमओ
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