{"_id":"5e7e203e8ebc3e7741395627","slug":"lockdown-firozabad-news-agr435675490","type":"story","status":"publish","title_hn":"लॉकडाउन: अग्रवाल धर्मशाला में फंसे बिहार के बीस से अधिक लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लॉकडाउन: अग्रवाल धर्मशाला में फंसे बिहार के बीस से अधिक लोग
विज्ञापन
लॉकडाउन के दौरान फिरोजाबाद में फसें बिहार के कुछ परिवार अग्रवाल धर्मशाला में रहकर कर रहे है गुजा?
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। चूड़ी लेने फिरोजाबाद आई बिहार की 20 से अधिक महिलाएं पुरुष लॉकडाउन के दौरान फिरोजाबाद में फंस गए। यह लोग लोहा मंडी स्थित अग्रवाल धर्मशाला में रुके हुए है। इन लोगों ने माल तो खरीद लिया। लेकिन अब इनके पास न तो घर जाने के लिए पैसे बचे हैं और न ही राशन लेने के लिए। ऐसे में यह लोग बिहार जाने के लिए परेशान है।
घर वापस जाने की व्यवस्था कराने की मांग को लेकर यह लोग बृहस्पतिवार सुबह कोतवाली दक्षिण भी पहुंचे थे। लेकिन वहां से भी इनको बिहार जाने के लिए कोई रास्ता दिखाई नहीं दिया। इस कारण वापस धर्मशाला आ गए। यह लोग बिहार के देवू सराय के रहने वाले है। मालादेवी, बविता देवी, चांद कुमार, गुड्डू, सुनीता, अजय कुमार आदि ने बताया कि वह लोग 16 मार्च को बिहार से निकले थे।
दिल्ली और जयपुर से माल खरीदने के बाद 21 मार्च को फिरोजाबाद से माल खरीदकर एकत्रित किया। 22 को घर वापसी होती, इससे पूर्व ही ट्रेनें भी बंद हो गईं। अब न तो किराए के लिए रुपये हैं। ना ही राशन के लिए। बुधवार को धर्मशाला के मैनेजर पं. मुन्नालाल ने राशन की व्यवस्था करा दी थी। गैस सिलिंडर देने के साथ ही लकड़ी आदि भी दी। लेकिन अब राशन कहां से आए। दुकानदारों ने भी उधार देने से मना कर दिया है। क्योंकि वह यहां की रहने वाली नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
घर वापस जाने की व्यवस्था कराने की मांग को लेकर यह लोग बृहस्पतिवार सुबह कोतवाली दक्षिण भी पहुंचे थे। लेकिन वहां से भी इनको बिहार जाने के लिए कोई रास्ता दिखाई नहीं दिया। इस कारण वापस धर्मशाला आ गए। यह लोग बिहार के देवू सराय के रहने वाले है। मालादेवी, बविता देवी, चांद कुमार, गुड्डू, सुनीता, अजय कुमार आदि ने बताया कि वह लोग 16 मार्च को बिहार से निकले थे।
विज्ञापन
दिल्ली और जयपुर से माल खरीदने के बाद 21 मार्च को फिरोजाबाद से माल खरीदकर एकत्रित किया। 22 को घर वापसी होती, इससे पूर्व ही ट्रेनें भी बंद हो गईं। अब न तो किराए के लिए रुपये हैं। ना ही राशन के लिए। बुधवार को धर्मशाला के मैनेजर पं. मुन्नालाल ने राशन की व्यवस्था करा दी थी। गैस सिलिंडर देने के साथ ही लकड़ी आदि भी दी। लेकिन अब राशन कहां से आए। दुकानदारों ने भी उधार देने से मना कर दिया है। क्योंकि वह यहां की रहने वाली नहीं है।
विज्ञापन