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मनुष्य अज्ञानता के कारण क्षमताओं का कर रहा दुरुपयोग
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sun, 01 Feb 2015 11:13 PM IST
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आचार्य वसुनंदी महाराज के शिष्य जैन मुनि जिनानंद महाराज के सानिध्य में नई
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बस्ती स्थित जैन मंदिर में श्री 1008 शांतिनाथ विधान का आयोजन किया गया।
भक्तजन संगीतमय स्वरलहरियों को सुनकर झूमने को विवश हो गए। विधानाचार्य
पांडेय राजेश जैन थे।
मुनि जिनानंद महाराज ने कहा कि मनुष्य अज्ञानता के कारण अपनी क्षमताओं का दुरुपयोग कर रहा है। इसको दूर करने के लिए जिनवाणी को सुनना आवश्यक हो गया है। देव शास्त्र गुरु की शरण में जाने से दुखों का निवारण होता है। जिसके पास देव-शास्त्र गुरु रूपी कवच ही नहीं है वह सदैव ही खतरे में रहता है। विधान में बैठे श्रावक उच्च गति प्राप्त करने के मार्ग पर बढ़ रहे हैं। प्राचार्य नरेंद्र प्रकाश जैन ने कहा जो भगवान की भक्ति में लीन होते हैं उनका कुछ भी अहित नहीं होता है। श्री 1008 शीतलनाथ धार्मिक संगठन विधान के आयोजन के लिए बधाई का ही पात्र है। विधान में प्रमुख रूप से अध्यक्ष डा. महेंद्र जैन, महामंत्री राहुल जैन इसौली, कोषाध्यक्ष जितेंद्र जैन जीतू, निर्देशक अनिल जैन डब्बू, रोमी जैन, अंशुल जैन, मुकुल जैन, सुकमाल जैन, सुरेशचंद्र जैन इसौली, विजय जैन सहित काफी संख्या में लोग शामिल थे। विधान के बाद संपूर्ण विश्व की शांति कामना के लिए हवन किया। अंत में डा. महेंद्र जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया।
मुनि जिनानंद महाराज ने कहा कि मनुष्य अज्ञानता के कारण अपनी क्षमताओं का दुरुपयोग कर रहा है। इसको दूर करने के लिए जिनवाणी को सुनना आवश्यक हो गया है। देव शास्त्र गुरु की शरण में जाने से दुखों का निवारण होता है। जिसके पास देव-शास्त्र गुरु रूपी कवच ही नहीं है वह सदैव ही खतरे में रहता है। विधान में बैठे श्रावक उच्च गति प्राप्त करने के मार्ग पर बढ़ रहे हैं। प्राचार्य नरेंद्र प्रकाश जैन ने कहा जो भगवान की भक्ति में लीन होते हैं उनका कुछ भी अहित नहीं होता है। श्री 1008 शीतलनाथ धार्मिक संगठन विधान के आयोजन के लिए बधाई का ही पात्र है। विधान में प्रमुख रूप से अध्यक्ष डा. महेंद्र जैन, महामंत्री राहुल जैन इसौली, कोषाध्यक्ष जितेंद्र जैन जीतू, निर्देशक अनिल जैन डब्बू, रोमी जैन, अंशुल जैन, मुकुल जैन, सुकमाल जैन, सुरेशचंद्र जैन इसौली, विजय जैन सहित काफी संख्या में लोग शामिल थे। विधान के बाद संपूर्ण विश्व की शांति कामना के लिए हवन किया। अंत में डा. महेंद्र जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया।