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पुत्र वियोग में राजा दशरथ ने त्यागे प्राण
ब्यूरो,अमर उजाला मैनपुरी
Updated Tue, 13 Oct 2015 12:10 AM IST
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फीरोजाबाद। श्रीराम के वन जाते ही अयोध्या नगरी में संकट के बादल छा गए। राजा दशरथ ने पुत्र वियोग में प्राण त्याग दिए, जिससे अयोध्या में शोक की लहर छा गई। श्रीराम के वन में भटकने, दशरथ मरण लीला देख दर्शकों की आंखें भर आईं।
श्री सनातन धर्म रामलीला महोत्सव समिति के तत्वावधान में चल रही रामलीला मंचन के लिए श्रीराम का डोला मैदान में पहुंचते ही लीला मंचन शुरू होता है। रामलीला प्रांगण को वन का रूप दिया गया था। अलग-अलग आश्रम एवं कुटियां बनाई गईं थीं। भगवान राम वन-वन भटकते हुए एक आश्रम से दूसरे आश्रम की ओर जा रहे हैं। उनके साथ सीता व अनुज लक्ष्मण भी वन में भटक रहे हैं। इधर अयोध्या में रानियों के साथ अयोध्यावासी राजा दशरथ की हालत बिगडने के कारण काफी चिंतित थे। राजा दशरथ पुत्र का वियोग बर्दाश्त नहीं कर पाए और पुत्र वियोग में उन्होंने अपने प्राण त्याग दिये।
रामलीला में आज
रामलीला मैदान में मंगलवार को भरत का अवध वासियों के साथ चित्रकूट में श्रीराम से मिलन, श्रीराम द्वारा चरण पादुका देकर विदा करने की लीला मंचन किया जाएगा। समिति द्वारा रात्रि में रसिया का आयोजन भी किया जाएगा।
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श्री सनातन धर्म रामलीला महोत्सव समिति के तत्वावधान में चल रही रामलीला मंचन के लिए श्रीराम का डोला मैदान में पहुंचते ही लीला मंचन शुरू होता है। रामलीला प्रांगण को वन का रूप दिया गया था। अलग-अलग आश्रम एवं कुटियां बनाई गईं थीं। भगवान राम वन-वन भटकते हुए एक आश्रम से दूसरे आश्रम की ओर जा रहे हैं। उनके साथ सीता व अनुज लक्ष्मण भी वन में भटक रहे हैं। इधर अयोध्या में रानियों के साथ अयोध्यावासी राजा दशरथ की हालत बिगडने के कारण काफी चिंतित थे। राजा दशरथ पुत्र का वियोग बर्दाश्त नहीं कर पाए और पुत्र वियोग में उन्होंने अपने प्राण त्याग दिये।
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रामलीला में आज
रामलीला मैदान में मंगलवार को भरत का अवध वासियों के साथ चित्रकूट में श्रीराम से मिलन, श्रीराम द्वारा चरण पादुका देकर विदा करने की लीला मंचन किया जाएगा। समिति द्वारा रात्रि में रसिया का आयोजन भी किया जाएगा।
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