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..........छोड़ क्यों गए तुम रो रहा वतन, स्वर्ग से अब तो आ जाइए अटल
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टूंडला में कवि सम्मेलन का शुभारंभ करते राज्यमंत्री चौधरी उदयभान सिंह
- फोटो : TUNDLA
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टूंडला (फिरोजाबाद)। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मजयंती के अवसर पर नगर के आर्य समाज मंदिर में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री चौधरी उदयभान सिंह ने किया। कवि अंगद धारिया ने पढ़ा कि ‘छोड़ क्यों गए तुम रो रहा वतन, स्वर्ग से अब तो आ जाइए अटल।’
कवि सम्मेलन का शुभारंभ आगरा से आईं कवियत्री डॉ. मंजू दीक्षित ने सरस्वती वंदना के साथ किया। मैनपुरी के कवि मनोज चौहान ने ‘स्वर्ग से दो दुआएं और यहां आकर देखो, तुम्हारी याद में यहां साहित्य की गंगा बहाई है।’ सिकंदराराऊ की कवियत्री उन्नति भारद्वाज ने पढ़ा कि ‘परमाणु परीक्षण हो या फिर कारगिल की गौरव गाथा, युग-युग तक नहीं अब कोई दूजा अटल होगा।’
कवि प्रवीन प्रज्ञासू ने पढ़ा कि अपनी माटी के वंदन में गीत अनोखे गाए, मैं तुझको हिंदुस्तान कहूं या अपनी पहचान। अलीगढ़ के कवि मणि मधुकर मूसल ने पढ़ा कि ‘गर्भ में हत्या न हो बेटी बचाए हम, बेटी है रोशनी घर की उसको पढ़ाए हम।’ सबरस मुड़सानी और दिलीप गौड़ ने भी काव्य पाठ किया। भाजपा जिला महामंत्री दीपक चौधरी, नगर अध्यक्ष रूपेश शुक्ला, सुशील पोनियां, दीपक राजोरिया, डॉ. बहादुर सिंह, अवधेश पालीवाल, दुष्यंत जादौन, डॉ. गौतम सिंह नौहवार, जयजीव पाराशर आदि मौजूद रहे। संचालन कवि राम राहुल ने किया।
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कवि सम्मेलन का शुभारंभ आगरा से आईं कवियत्री डॉ. मंजू दीक्षित ने सरस्वती वंदना के साथ किया। मैनपुरी के कवि मनोज चौहान ने ‘स्वर्ग से दो दुआएं और यहां आकर देखो, तुम्हारी याद में यहां साहित्य की गंगा बहाई है।’ सिकंदराराऊ की कवियत्री उन्नति भारद्वाज ने पढ़ा कि ‘परमाणु परीक्षण हो या फिर कारगिल की गौरव गाथा, युग-युग तक नहीं अब कोई दूजा अटल होगा।’
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कवि प्रवीन प्रज्ञासू ने पढ़ा कि अपनी माटी के वंदन में गीत अनोखे गाए, मैं तुझको हिंदुस्तान कहूं या अपनी पहचान। अलीगढ़ के कवि मणि मधुकर मूसल ने पढ़ा कि ‘गर्भ में हत्या न हो बेटी बचाए हम, बेटी है रोशनी घर की उसको पढ़ाए हम।’ सबरस मुड़सानी और दिलीप गौड़ ने भी काव्य पाठ किया। भाजपा जिला महामंत्री दीपक चौधरी, नगर अध्यक्ष रूपेश शुक्ला, सुशील पोनियां, दीपक राजोरिया, डॉ. बहादुर सिंह, अवधेश पालीवाल, दुष्यंत जादौन, डॉ. गौतम सिंह नौहवार, जयजीव पाराशर आदि मौजूद रहे। संचालन कवि राम राहुल ने किया।
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