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कांच उत्पाद : यूरोप-अमेरिका से मिले आर्डर होने लगे निरस्त
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कांच उत्पाद : यूरोप-अमेरिका से मिले आर्डर होने लगे निरस्त
- दो माह 10-15 प्रतिशत कैंसल, करोड़ों के आर्डर होल्ड
- चीन और वियतनाम की ओर रुख कर रहे ग्राहक
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। रूस-यूक्रेन युद्ध, सोडा-एस और कांच उत्पाद तैयार कराने में प्रयुक्त कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण पूर्व में मिले आर्डर निरस्त किए जा रहे हैं। दो माह में ही 10 से 15 प्रतिशत तक आर्डर निरस्त हो चुके हैं। करोड़ों के आर्डर होल्ड किए जा चुके हैं। यही नहीं यूरोप और अमेरिका से कांच उत्पादों की मांग भी एक माह में दस फीसदी तक घटी है।
शहर के प्रमुख कांच निर्यातकों की मानें तो निर्यात इकाइयों में निरंतर होने वाले उत्पादन की प्रक्रिया थम गई है। दो माह में फिरोजाबाद से अमेरिका और यूरोपियन देशों में होने वाला कांच उत्पादों का निर्यात 10 से 15 प्रतिशत तक घट गया है। कारण कि ये आर्डर निरस्त कर दिया गया है। निर्यात घटने के कारण कांच उत्पाद तैयार करने वाली अति सूक्ष्म स्तर की करीब 20 इकाइयों में ताले लटक गए हैं।
इन देशों के आर्डर हो रहे रद
कांच उत्पाद तैयार कराने वाले सोडा-एस की कीमत में करीब 30 प्रतिशत, विदेशों से आयतित कांच भंगार, नेचुरल गैस और कैडियम, सिल्वर आदि केमिकल के दामों में भी वृद्धि के कारण फिरोजाबाद के कांच उत्पादों की लागत भी 25-30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। कीमतें बढ जाने की वजह से स्वीडन, हालैंड, फिनलैंड, आस्ट्रेलिया, अमेरिका से मिले 200 करोड़ के आर्डरों में 10 से 15 प्रतिशत को विदेशी वायरर्स ने निरस्त कर दिया है। करोड़ों के आर्डर होल्ड भी कर दिए गए हैं।
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अन्य देश बन रहे प्रतिस्पर्धी
समुद्री भाड़ा बढ़ जाने के कारण अमेरिका सहित कई अन्य देशों ने फिरोजाबाद से आयतित कांच उत्पादों के आर्डर स्थगित कर दिए हैं। सस्ते माल भाड़ा के चक्कर में पोलेंड, टर्की, वियतनाम, इंडोनेशिया और चीन की ओर रुख करने लगे हैं। वियतनाम से अमेरिका और अन्य यूरोपियन देशों का भाड़ा दस हजार डॉलर है। वहीं भारत से अमेरिका तक यही माल भाड़ा दोगुना से भी ज्यादा है।
यूरोप-अमेरिका से आर्डर निरस्त और स्थगित होने से शहर का कांच निर्यात उद्योग को झटका लगा है। करोड़ों की विदेशी मुद्रा अर्जन करने वाला कांच उद्योग में मंदी के कारण कांच श्रमिकों के समक्ष रोजगार का भी संकट बढ़ेगा।
- राजीव गुप्ता कांच निर्यातक
रूस-यूक्रेन युद्ध, सोडा-एस के अलावा कच्चे माल की कीमतों में इजाफा हो जाने के कारण कांच उत्पादों की लागत 30 फीसदी से अधिक बढ़ गई है। हमने केंद्रीय वित्त मंत्री से सोडा-एस के निर्यात पर टैक्स सीमा बढ़ाने और आयतित सोडा-एस पर टैक्स घटाने की मांग की है।
- मुकेश बंसल टोनी, अध्यक्ष, ग्लास एक्सपोर्ट मेन्युफैक्चरर एसोसिएशन
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- दो माह 10-15 प्रतिशत कैंसल, करोड़ों के आर्डर होल्ड
- चीन और वियतनाम की ओर रुख कर रहे ग्राहक
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। रूस-यूक्रेन युद्ध, सोडा-एस और कांच उत्पाद तैयार कराने में प्रयुक्त कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण पूर्व में मिले आर्डर निरस्त किए जा रहे हैं। दो माह में ही 10 से 15 प्रतिशत तक आर्डर निरस्त हो चुके हैं। करोड़ों के आर्डर होल्ड किए जा चुके हैं। यही नहीं यूरोप और अमेरिका से कांच उत्पादों की मांग भी एक माह में दस फीसदी तक घटी है।
शहर के प्रमुख कांच निर्यातकों की मानें तो निर्यात इकाइयों में निरंतर होने वाले उत्पादन की प्रक्रिया थम गई है। दो माह में फिरोजाबाद से अमेरिका और यूरोपियन देशों में होने वाला कांच उत्पादों का निर्यात 10 से 15 प्रतिशत तक घट गया है। कारण कि ये आर्डर निरस्त कर दिया गया है। निर्यात घटने के कारण कांच उत्पाद तैयार करने वाली अति सूक्ष्म स्तर की करीब 20 इकाइयों में ताले लटक गए हैं।
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इन देशों के आर्डर हो रहे रद
कांच उत्पाद तैयार कराने वाले सोडा-एस की कीमत में करीब 30 प्रतिशत, विदेशों से आयतित कांच भंगार, नेचुरल गैस और कैडियम, सिल्वर आदि केमिकल के दामों में भी वृद्धि के कारण फिरोजाबाद के कांच उत्पादों की लागत भी 25-30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। कीमतें बढ जाने की वजह से स्वीडन, हालैंड, फिनलैंड, आस्ट्रेलिया, अमेरिका से मिले 200 करोड़ के आर्डरों में 10 से 15 प्रतिशत को विदेशी वायरर्स ने निरस्त कर दिया है। करोड़ों के आर्डर होल्ड भी कर दिए गए हैं।
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अन्य देश बन रहे प्रतिस्पर्धी
समुद्री भाड़ा बढ़ जाने के कारण अमेरिका सहित कई अन्य देशों ने फिरोजाबाद से आयतित कांच उत्पादों के आर्डर स्थगित कर दिए हैं। सस्ते माल भाड़ा के चक्कर में पोलेंड, टर्की, वियतनाम, इंडोनेशिया और चीन की ओर रुख करने लगे हैं। वियतनाम से अमेरिका और अन्य यूरोपियन देशों का भाड़ा दस हजार डॉलर है। वहीं भारत से अमेरिका तक यही माल भाड़ा दोगुना से भी ज्यादा है।
यूरोप-अमेरिका से आर्डर निरस्त और स्थगित होने से शहर का कांच निर्यात उद्योग को झटका लगा है। करोड़ों की विदेशी मुद्रा अर्जन करने वाला कांच उद्योग में मंदी के कारण कांच श्रमिकों के समक्ष रोजगार का भी संकट बढ़ेगा।
- राजीव गुप्ता कांच निर्यातक
रूस-यूक्रेन युद्ध, सोडा-एस के अलावा कच्चे माल की कीमतों में इजाफा हो जाने के कारण कांच उत्पादों की लागत 30 फीसदी से अधिक बढ़ गई है। हमने केंद्रीय वित्त मंत्री से सोडा-एस के निर्यात पर टैक्स सीमा बढ़ाने और आयतित सोडा-एस पर टैक्स घटाने की मांग की है।
- मुकेश बंसल टोनी, अध्यक्ष, ग्लास एक्सपोर्ट मेन्युफैक्चरर एसोसिएशन