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Firozabad News: पांच दशक पहले बना कामाख्या मंदिर है आस्था का केंद्र
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जसराना का मां कामाख्या धाम। संवाद
फिरोजाबाद। जसराना कस्बे में स्थित मां कामाख्या धाम भक्तों की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है, जिसका इतिहास पांच दशक से भी पुराना है। पहले यह स्थान खंडहर था, जिसे लोग टकापसेरी आश्रम के नाम से जानते थे। इस मंदिर की नींव साल 1976 में रखी गई थी और 31 अक्तूबर 1984 को इसकी स्थापना हुई।
इस मंदिर में साल भर भक्तों की भीड़ लगी रहती है, खासकर चैत्र और शारदीय नवरात्र में। यहां साल में एक बार, असम के गुवाहाटी स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ कामाख्या धाम की तर्ज पर, जून के महीने में ''अंबुबाची महोत्सव'' का आयोजन किया जाता है। इस महोत्सव में यूपी के कई जिलों के साथ-साथ दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों से भी हजारों की संख्या में भक्त आते हैं।
मंदिर का इतिहास और महत्व
मंदिर के महंत महेश स्वरूप ब्रह्मचारी बताते हैं कि यह मंदिर स्वामी माधवानंद ने स्थापित किया था, जो खुद मां कामाख्या के अनन्य भक्त थे। उन्होंने ही इस खंडहर स्थल को साफ कराकर यहां पूजा-अर्चना शुरू की। ऐसा माना जाता है कि मंदिर की स्थापना के समय मां के चरणों से कई दिनों तक जलधारा बहती रही थी।
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मंदिर में मां कामाख्या के अलावा मां विंध्यवासिनी, नर्मदेश्वर महादेव, मां कैला, मां काली, राम दरबार और राधा-कृष्ण की भी मूर्तियां स्थापित हैं। हर साल 31 अक्तूबर को मंदिर का स्थापना दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यहां आने वाले भक्तों के रहने और खाने की व्यवस्था मंदिर समिति द्वारा की जाती है।
ऐसे पहुंचें
जसराना का यह मंदिर जिला मुख्यालय से 28 किमी और शिकोहाबाद रेलवे स्टेशन से 20 किमी दूर है। यहां पहुंचने के लिए सरकारी और निजी बसें तथा अन्य निजी वाहन आसानी से उपलब्ध हैं। मंदिर के पास ही कई दुकानें हैं, जहां से भक्त प्रसाद और पूजा-सामग्री ले सकते हैं।
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इस मंदिर में साल भर भक्तों की भीड़ लगी रहती है, खासकर चैत्र और शारदीय नवरात्र में। यहां साल में एक बार, असम के गुवाहाटी स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ कामाख्या धाम की तर्ज पर, जून के महीने में ''अंबुबाची महोत्सव'' का आयोजन किया जाता है। इस महोत्सव में यूपी के कई जिलों के साथ-साथ दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों से भी हजारों की संख्या में भक्त आते हैं।
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मंदिर का इतिहास और महत्व
मंदिर के महंत महेश स्वरूप ब्रह्मचारी बताते हैं कि यह मंदिर स्वामी माधवानंद ने स्थापित किया था, जो खुद मां कामाख्या के अनन्य भक्त थे। उन्होंने ही इस खंडहर स्थल को साफ कराकर यहां पूजा-अर्चना शुरू की। ऐसा माना जाता है कि मंदिर की स्थापना के समय मां के चरणों से कई दिनों तक जलधारा बहती रही थी।
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मंदिर में मां कामाख्या के अलावा मां विंध्यवासिनी, नर्मदेश्वर महादेव, मां कैला, मां काली, राम दरबार और राधा-कृष्ण की भी मूर्तियां स्थापित हैं। हर साल 31 अक्तूबर को मंदिर का स्थापना दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यहां आने वाले भक्तों के रहने और खाने की व्यवस्था मंदिर समिति द्वारा की जाती है।
ऐसे पहुंचें
जसराना का यह मंदिर जिला मुख्यालय से 28 किमी और शिकोहाबाद रेलवे स्टेशन से 20 किमी दूर है। यहां पहुंचने के लिए सरकारी और निजी बसें तथा अन्य निजी वाहन आसानी से उपलब्ध हैं। मंदिर के पास ही कई दुकानें हैं, जहां से भक्त प्रसाद और पूजा-सामग्री ले सकते हैं।