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Firozabad News: फर्जी पर्ची बनाकर किराया डकारने वाला बस स्टैंड का इंचार्ज निलंबित
Tue, 31 Dec 2024 11:56 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Tue, 31 Dec 2024 11:56 PM IST
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फिरोजाबाद। बस स्टैंड परिसर में राजस्थान रोडवेज की बस को रात गुजारने के लिए किराए की सरकारी रसीद कटवानी पड़ती है। बस स्टैंड के प्रभारी फर्जी रसीद के सहारे पूरा किराया डकारते रहे थे। मामले का खुलासा महज परिचालक से दो टिकट लेने पर शिकोहाबाद डिपो में तैनात एक अधिकारी ने किया। मामले में जांच के बाद आरएम इटावा ने बस स्टैंड के प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
शहर के लोगों को राजस्थान की यात्रा के लिए राजस्थान रोडवेज की दो बस फिरोजाबाद को दी गई हैं। जिससे यहां के लोगों को दिक्कत न हो। यहां टोंक डिपो और अजमेर डिपो की दो बस आती हैं। जिसमें से अजमेर डिपो की बस सुबह ही यहां से निकल जाती है। जबकि टोंक डिपो की बस शाम को निकलती है। गैर प्रांत के रोडवेज की बस को यहां रात गुजारने के लिए 590 रुपये की रसीद कटवानी पड़ती है। यह धनराशि सरकारी कोटे में जाती है।
आरोप है कि पिछले करीब सात से आठ महीने से फिरोजाबाद बस स्टैंड पर प्रभारी के रूप में नियुक्त आलोक यादव जालसाजी कर किराए की फर्जी रसीद काटकर सरकारी धनराशि को डकार रहे थे। मामले का खुलासा तब हुआ जब शिकोहाबाद डिपो में तैनात कुंवरपाल सिंह ने हाथ से कटने वाली टिकट की गिनती की।
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उन्होंने दो टिकट कम होने की बात कही तो परिचालक ने दो टिकट फिरोजाबाद बस स्टैंड प्रभारी द्वारा लिए जाने की बात बताई। जब मामले की जांच हुई तो पता चला कि स्टेशन प्रभारी गलत तरीके से कमाई कर रहे थे। फिर राजस्थान रोडवेज बस के आने वाले किराए का आकलन कराया गया तो छह महीने का किराया कम बैठा, लेकिन जब उन बसों के परिचालकों से जानकारी की गई। पता चला कि वह प्रतिदिन किराया देकर रसीद प्राप्त करते हैं। रसीदों का मिलान करने पर रसीद फर्जी साबित हुईं।
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शहर के लोगों को राजस्थान की यात्रा के लिए राजस्थान रोडवेज की दो बस फिरोजाबाद को दी गई हैं। जिससे यहां के लोगों को दिक्कत न हो। यहां टोंक डिपो और अजमेर डिपो की दो बस आती हैं। जिसमें से अजमेर डिपो की बस सुबह ही यहां से निकल जाती है। जबकि टोंक डिपो की बस शाम को निकलती है। गैर प्रांत के रोडवेज की बस को यहां रात गुजारने के लिए 590 रुपये की रसीद कटवानी पड़ती है। यह धनराशि सरकारी कोटे में जाती है।
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आरोप है कि पिछले करीब सात से आठ महीने से फिरोजाबाद बस स्टैंड पर प्रभारी के रूप में नियुक्त आलोक यादव जालसाजी कर किराए की फर्जी रसीद काटकर सरकारी धनराशि को डकार रहे थे। मामले का खुलासा तब हुआ जब शिकोहाबाद डिपो में तैनात कुंवरपाल सिंह ने हाथ से कटने वाली टिकट की गिनती की।
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उन्होंने दो टिकट कम होने की बात कही तो परिचालक ने दो टिकट फिरोजाबाद बस स्टैंड प्रभारी द्वारा लिए जाने की बात बताई। जब मामले की जांच हुई तो पता चला कि स्टेशन प्रभारी गलत तरीके से कमाई कर रहे थे। फिर राजस्थान रोडवेज बस के आने वाले किराए का आकलन कराया गया तो छह महीने का किराया कम बैठा, लेकिन जब उन बसों के परिचालकों से जानकारी की गई। पता चला कि वह प्रतिदिन किराया देकर रसीद प्राप्त करते हैं। रसीदों का मिलान करने पर रसीद फर्जी साबित हुईं।