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प्रकृति को संजोने लिए कल्पद्रुम विधान में की गई अर्चना
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Mon, 11 Apr 2016 11:39 PM IST
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प्रकृति को संजोने लिए कल्पद्रुम विधान में की गई अर्चना
- फोटो : अमर उजाला
नगर में आयोजित कल्पद्रुम महामंडल विधान से कस्बे का माहौल भक्तिमय हो गया है। महामंडल विधान के दूसरे दिन प्रकृति की अमूल्य धरोहरों को संजोने के लिये देवताओं को प्रसन्न किया गया। विधान में मंत्रोच्चारण कर श्रद्धालुओं ने आहुतियां दीं। मंत्रों की ध्वनि और संगीतमय भजनों से परिसर गूंजता रहा।
महावीर दिगंबर जैन इंटर कालेज में आयोजित कल्पद्रुुम महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के दूसरे दिन प्रकृतिक धरोहरों को मानव कल्याण के लिये सुरक्षित करने के लिये श्रद्धालुओं ने हवन में आहुतियां प्रदान की। सुबह से आरंभ महामंडल विधान में शिखरों पर आसीन 56 इंद्र-इंद्राणियों ने आहूतियां दी और प्रकृति की रक्षा का संकल्प लिया। पंडाल में बैठे श्रद्धालु मग्न होकर भक्ति गीतों पर नृत्य करने लगे। आर्यिका श्री 105 सृष्टि भूषण माताजी ने कहा कि आज इस धरा पर मनुष्य जीवन यापन कर रहे हैं तो यह प्रकृति की देन है। शुद्ध जल, शुद्ध वायु, हरे भरे वृक्ष और उनसे मिलने वाले स्वादिष्ट फलों का हम आनंद लेते हैं लेकिन हमें स्मरण रखना चाहिए कि प्रभु द्वारा दी गई प्राकृतिक सपंदाओं के लिये हमें उनका धन्यवाद देना नही भूलना चाहिए। अंत में सभी श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर की महाआरती में भाग लिया।
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महावीर दिगंबर जैन इंटर कालेज में आयोजित कल्पद्रुुम महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के दूसरे दिन प्रकृतिक धरोहरों को मानव कल्याण के लिये सुरक्षित करने के लिये श्रद्धालुओं ने हवन में आहुतियां प्रदान की। सुबह से आरंभ महामंडल विधान में शिखरों पर आसीन 56 इंद्र-इंद्राणियों ने आहूतियां दी और प्रकृति की रक्षा का संकल्प लिया। पंडाल में बैठे श्रद्धालु मग्न होकर भक्ति गीतों पर नृत्य करने लगे। आर्यिका श्री 105 सृष्टि भूषण माताजी ने कहा कि आज इस धरा पर मनुष्य जीवन यापन कर रहे हैं तो यह प्रकृति की देन है। शुद्ध जल, शुद्ध वायु, हरे भरे वृक्ष और उनसे मिलने वाले स्वादिष्ट फलों का हम आनंद लेते हैं लेकिन हमें स्मरण रखना चाहिए कि प्रभु द्वारा दी गई प्राकृतिक सपंदाओं के लिये हमें उनका धन्यवाद देना नही भूलना चाहिए। अंत में सभी श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर की महाआरती में भाग लिया।
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