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मरीजों के भगवान से मानवता शर्मसार

Tue, 27 Sep 2016 01:11 AM IST
Amar Ujala
Amar Ujala Updated Tue, 27 Sep 2016 01:11 AM IST
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humanity shamed to God of patients
मरीजों के भगवान से मानवता शर्मसार - फोटो : Amar Ujala
गर्भवती को नहीं मिला इलाज, ई-रिक्शा में दम तोड़ा
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नगर विधायक से कराया फोन फिर भी नहीं मिला उपचार
हालत गंभीर होने की बात कह, दी आगरा ले जाने की सलाह

उपचार न मिलने पर गर्भवती महिला ने महिला अस्पताल के गेट पर ही दम तोड़ दिया। पीड़ित परिवार प्रसूता को समय से उपचार दिलाने के लिए अधिकारियों से गुहार करता रहा, लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। महिला की मौत के बाद परिवारीजन शव को लेकर घर चले गए और अंतिम संस्कार कर दिया।
उत्तर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कबीरनगर गली नंबर पांच निवासी राजा शंखबार की पत्नी गुड्डी देवी (35) को सुबह करीब साढे पांच बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गुड्डी देवी नौ माह की गर्भवती थीं। परिवारीजन ईरिक्शा से महिला को प्रसव के लिए सुबह करीब छह बजे जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां तैनात चिकित्सक और स्टाफ ने महिला को उपचार देने के नाम पर आगरा ले जाने की बात कही। पति राजा काफी गिड़गिड़या और आगरा ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने को कहा लेकिन चिकित्सकों ने उसकी कोई मदद नहीं की। थक हार कर राजा ई रिक्शा से पत्नी को प्राइवेट नर्सिंग होम ले गया। यहां चिकित्सकों ने इतना खर्च बता दिया कि उसकी इलाज कराने की हिम्मत नहीं हुई। उसे कुछ नहीं सूझा तो वह ईरिक्शा सहित महिला को आर्य नगर स्थित नगर विधायक मनीष असीजा के आवास पर ले गया। तब तक साढे़ सात बज चुके थे। विधायक तुरंत आवास से बाहर आए और महिला की हालत देख उन्होंने सीएमएस से फोन पर बातकर महिला को भर्ती करने को कहा। विधायक के कहने पर पति महिला को फिर महिला अस्पताल ले आया। महिला अस्पताल में उसे भर्ती किया जाता तब तक अस्पताल के गेट के सामने ईरिक्शा में ही उसने दम तोड़ दिया। परिवारीजनों ने महिला के शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग की लेकिन इस पर भी अस्पताल प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए। वे शव को लेकर घर आ गए। राजा का कहना है कि यदि उसकी पत्नी को समय रहते उपचार मिल जाता तो उसकी जान नहीं जाती। उसकी मौत के लिए डाक्टर दोषी है। उसने महिला डाक्टर से काफी मिन्नत की थी। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा पाता।
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मृत अवस्था में लाई गई थी महिला
महिला को परिवारीजन मृत अवस्था में अस्पताल लेकर आए थे। चिकित्सक द्वारा उसको अस्पताल से भगाया नहीं गया था। महिला के परिवारीजनों ने चिकित्सक पर जो आरोप लगाए है, वे पूरी तरह से निराधार हैं।
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उपमा सिंह, सीएमएस जिला महिला अस्पताल फीरोजाबाद।

जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल, दम तोड़ रहे मरीज
बुखार और खासी से पीड़ित मरीज भी होते हैं आगरा रेफर
उपचार के अभाव में दम तोड़ चुके हैं कई मरीज

शासन और प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का दावा भले ही करते हों, लेकिन जिला महिला अस्पताल हो अथवा जिला अस्पताल या फिर ट्रामा सेंटर। यहां की व्यवस्थाएं खराब हैं। कभी चिकित्सक आपात कालीन ड्यूटी को छोड़कर गायब हो जाते है, तो कभी कॉल ट्रांसफर में बच्चों के प्राण निकल जाते हैं, तो कभी गर्भवती महिलाओं की हालत गंभीर बताते हुए उनको निजी अस्पताल अथवा आगरा ले जाने की सलाह दी जाती है। ऐसे मामलों की सूची काफी लंबी है।
31 अगस्त की सुबह करीब सात बजे नगला हंशी निवासी दो माह की गर्भवती महिला सुमित्रा को उसकी मां उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर आई थी। महिला बुखार से पीड़ित थी। चिकित्सकों ने सुमित्रा की हालत गंभीर बताते हुए उसको उपचार देने से मना कर दिया था। इसको लेकर परिवारीजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। इसके बाद भी महिला को उपचार नहीं मिला तो परिवारीजन महिला को आर्यनगर स्थित एक नर्सिंग होम लेकर पहुंचे। यहां प्राथमिक उपचार के बाद महिला की हालत में सुधार हुआ और परिवारीजन उसको घर ले गए।

दूसरा मामला 11 अगस्त का है। टूंडला थाना क्षेत्र के नगला गोला निवासी धर्मेंद्र ने अपनी पुत्री को जिला अस्पताल लेकर आए। पहले तो बाल रोग चिकित्सक ने बच्ची को भर्ती करने के नाम पर हाथ खड़े कर दिए। परिवारीजनों ने विरोध किया तो उसको भर्ती कर लिया गया। देर रात बच्ची की हालत बिगड़ी तो न चिकित्सक मिले और न ही स्वास्थ्य कर्मचारी। ऐसे में बच्ची के प्राण निकल गए।
तीसरा मामला 18 अगस्त की रात का है। डा. भरत गोस्वामी द्वारा ड्यूटी छोड़कर चले जाने के कारण विद्युत करंट से अचेत हुए कोटला रोड निवासी अभिषेक की मौत हो गई। उपचार के अभाव में मरीजों द्वारा लगातार दम तोड़ने के बाद भी विभागीय अधिकारी इस ओर चुप्पी साधे बैठे हैं। मामला प्रकाश में आने पर जांच कराने की बात तो की जाती है, लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकलता।


झूठी घोषणाएं कर रही है सरकार: असीजा
विधायक मनीष असीजा का कहना है कि महिला जिला अस्पताल के चिकित्सकों का व्यवहार शर्मनाक है। इससे पहले भी इलाज के अभाव में तीन मौतें हो चुकी हैं। विधानसभा में उन्होंने यह मुद्दा उठाया था। 108 एंबुलेंस आदि के प्रचार-प्रसार पर करोड़ रुपया खर्च कर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है। लेकिन मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपया बर्बाद हो रहा है।

 
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