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जिला अस्पताल में मरीजों को लिखी जा रही बाहर की दवाएं
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जिला अस्पताल स्थित चर्म रोग ओपीडी पर चिकित्सक को परेशानी दिखाते मरीज
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। मौसम परिवर्तन के साथ-साथ लोग बुखार, सर्दी-जुकाम का शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में उल्टी-दस्त, खांसी-जुकाम और बुखार के इलाज के लिए डॉक्टर की बाहर की दवाएं लिख रहे हैं।
जिला अस्पताल के वार्डों में बुखार, दस्त, पेट दर्द सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज भर्ती हैं। इनमें से कई मरीजों के पास बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदी गई दवाएं थीं। मरीजों ने कहा कि अच्छे इलाज के नाम पर चिकित्सक या अन्य स्टाफ मेडिकल स्टोर से दवा लेने को कहते हैं। कई मरीज तो ऐसे हैं, जिनकी दवाएं नाम मात्र के लिए अस्पताल की चल रही हैं। वह बाहर से खरीदी दवाओं के सहारे ही इलाज करा रहे हैं। यहां तक कि उल्टी, दस्त के मरीजों को भी बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं।
मरीज बोले पैसा नहीं मजबूरी में लाते हैं से बाहर से महंगी दवाएं
- चर्म रोग विभाग के डॉक्टर के पास आई थी। डॉक्टर साहब ने पूछा कि बाहर की दवा लिख दूं। मैने बाहर से दवाएं खरीदी हैं। दवाएं काफी महंगी आई हैं। बताया कि चर्म रोग से जुड़ी दवाएं अस्पताल में आती नहीं हैं।
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क्षमा - कोटला रोड
- बाल रोग वार्ड में तीन दिन से बच्चा भर्ती है। उसे दस्त हो गए हैं। डॉक्टर साहब ने बाहर की दवा लिख दी। पहले दिन मैने मना किया कि मुझ पर रुपये नहीं हैं। आराम नहीं मिला तो मजबूरी में बाहर मेडिकल स्टोर से लिखी दवा ले आई हूं।
कृष्णा देवी - रसूलपुर
- वार्ड नंबर चार में भर्ती हुए मुझे करीब आठ दिन हो गए। एसिडिटी की समस्या है। चिकित्सक ने बाहर की सभी दवाएं लिख दीं। चिकित्सक से कहा भी कि बाहर की दवा नहीं खरीद पाऊंगा। इसके बाद भी कुछ दवाएं बाहर से लेकर आनी पड़ी। कल्याण सिंह - शिकोहाबाद
मेडिकल कॉलेज में भांजे को बुखार की दवा दिलाने के लिए आया था। ओपीड़ी में बैठे चिकित्सक ने कहा कि दूसरे डॉक्टर को दिखाओ। दोपहर 12:30 बजे मेडिसन विभाग में अन्य डॉक्टर उठ गए। अब डाक्टर आएंगे या नहीं. इंतजार कर रहे हैं।
श्रीकृष्ण्, शिकोहाबाद
दवा कंपनियों के प्रतिनिधि रहते हैं सक्रिय
जिला अस्पताल की ओपीडी में चिकित्सक के आसपास दवा कंपनियों से जुडे़ प्रतिनिधि (एमआर) सक्रिय रहते हैं। खांसी-जुकाम के सीरप के साथ-साथ चर्म रोग से जुड़ी दवाओं को सैंपल इनके पास रहते हैं। कुछ चिकित्सकों के पास यह प्रतिनिधि इस तरह बैठते हैं कि मरीज और तीमारदार इन्हें मेडिकल स्टाफ समझ बैठते हैं। खास बात यह है चिकित्सक द्वारा लिखी जाने वाली बाहर की अधिकांश दवाएं जिला अस्पताल के सामने बने मेडिकल स्टोरों के अलावा अन्य स्थानों पर मुश्किल से मिलती हैं।
अस्पताल में सभी दवाएं उपलब्ध हैं। ओपीडी में चिकित्सकों से बाहर की दवाएं लिखने को साफ मना किया गया है। कुछ मरीज चिकित्सकों से आग्रह करके बाहर की दवा लिखवा लेते हैं। चिकित्सकों से फिर कहेंगे कि अस्पताल के मेडिकल स्टोर में जो दवाएं हैं उन्हीं को लिखें, बाहर की दवाएं न लिखें।
डॉ. आरके पांडेय, सीएमएस
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जिला अस्पताल के वार्डों में बुखार, दस्त, पेट दर्द सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज भर्ती हैं। इनमें से कई मरीजों के पास बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदी गई दवाएं थीं। मरीजों ने कहा कि अच्छे इलाज के नाम पर चिकित्सक या अन्य स्टाफ मेडिकल स्टोर से दवा लेने को कहते हैं। कई मरीज तो ऐसे हैं, जिनकी दवाएं नाम मात्र के लिए अस्पताल की चल रही हैं। वह बाहर से खरीदी दवाओं के सहारे ही इलाज करा रहे हैं। यहां तक कि उल्टी, दस्त के मरीजों को भी बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं।
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मरीज बोले पैसा नहीं मजबूरी में लाते हैं से बाहर से महंगी दवाएं
- चर्म रोग विभाग के डॉक्टर के पास आई थी। डॉक्टर साहब ने पूछा कि बाहर की दवा लिख दूं। मैने बाहर से दवाएं खरीदी हैं। दवाएं काफी महंगी आई हैं। बताया कि चर्म रोग से जुड़ी दवाएं अस्पताल में आती नहीं हैं।
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क्षमा - कोटला रोड
- बाल रोग वार्ड में तीन दिन से बच्चा भर्ती है। उसे दस्त हो गए हैं। डॉक्टर साहब ने बाहर की दवा लिख दी। पहले दिन मैने मना किया कि मुझ पर रुपये नहीं हैं। आराम नहीं मिला तो मजबूरी में बाहर मेडिकल स्टोर से लिखी दवा ले आई हूं।
कृष्णा देवी - रसूलपुर
- वार्ड नंबर चार में भर्ती हुए मुझे करीब आठ दिन हो गए। एसिडिटी की समस्या है। चिकित्सक ने बाहर की सभी दवाएं लिख दीं। चिकित्सक से कहा भी कि बाहर की दवा नहीं खरीद पाऊंगा। इसके बाद भी कुछ दवाएं बाहर से लेकर आनी पड़ी। कल्याण सिंह - शिकोहाबाद
मेडिकल कॉलेज में भांजे को बुखार की दवा दिलाने के लिए आया था। ओपीड़ी में बैठे चिकित्सक ने कहा कि दूसरे डॉक्टर को दिखाओ। दोपहर 12:30 बजे मेडिसन विभाग में अन्य डॉक्टर उठ गए। अब डाक्टर आएंगे या नहीं. इंतजार कर रहे हैं।
श्रीकृष्ण्, शिकोहाबाद
दवा कंपनियों के प्रतिनिधि रहते हैं सक्रिय
जिला अस्पताल की ओपीडी में चिकित्सक के आसपास दवा कंपनियों से जुडे़ प्रतिनिधि (एमआर) सक्रिय रहते हैं। खांसी-जुकाम के सीरप के साथ-साथ चर्म रोग से जुड़ी दवाओं को सैंपल इनके पास रहते हैं। कुछ चिकित्सकों के पास यह प्रतिनिधि इस तरह बैठते हैं कि मरीज और तीमारदार इन्हें मेडिकल स्टाफ समझ बैठते हैं। खास बात यह है चिकित्सक द्वारा लिखी जाने वाली बाहर की अधिकांश दवाएं जिला अस्पताल के सामने बने मेडिकल स्टोरों के अलावा अन्य स्थानों पर मुश्किल से मिलती हैं।
अस्पताल में सभी दवाएं उपलब्ध हैं। ओपीडी में चिकित्सकों से बाहर की दवाएं लिखने को साफ मना किया गया है। कुछ मरीज चिकित्सकों से आग्रह करके बाहर की दवा लिखवा लेते हैं। चिकित्सकों से फिर कहेंगे कि अस्पताल के मेडिकल स्टोर में जो दवाएं हैं उन्हीं को लिखें, बाहर की दवाएं न लिखें।
डॉ. आरके पांडेय, सीएमएस