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समर्पण भाव से ही परमात्मा की होती है प्राप्ति : विवेक सागर
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रफ़रोजाबाद ! विभव नगर स्थित जैन मंदिर में पूजा करती महिला श्रद्धालुओं की भीड़
- फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन भी मंदिर आस्था का केंद्र बने रहे। नसियाजी मंदिर में आचार्य विवेक सागर महाराज और छदामीलाल जैन मंदिर में जैनाचार्य सुरत्न सागर महाराज ने प्रवचन दिए। दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की गई।
नसियाजी मंदिर में जैन आचार्य विवेक सागर महाराज ने कहा कि समर्पण मूक होता है, परमात्मा समर्पण से प्राप्त होता है अहंकार से नहीं। प्रत्येक आत्मा के अंत में परमात्मा की ज्योति झिलमिला रही हैं। पाप और पुण्य के खेल का नाम संसार है। किसी का अहंकार धरती पर स्थायी नहीं रहा। रावण, कंस अपने अहंकार के वशीभूत होकर सामने खड़ी मृत्यु को नहीं पहचान सके।
राम ने विनम्रता से संधि प्रस्ताव भेजा था कि मुझे युद्ध से कोई सरोकार नहीं, लेकिन अहंकारी रावण ने उनका तिरस्कार किया। मंदिर में सामूहिक पूजा की गई। उधर, सुरत्न सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में शांतिनाथ विधान का आयोजन किया गया। पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर गांधी नगर, जैन नगर खेड़ा, गली लोहियान मंदिर, घेरखोखल, सुहागनगरी में भगवान मुनि सुब्रतनाथ जिनालय में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्घालु पहुंचे। कस्बा खैरगढ़ के भगवान मुनि सुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भी दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की गई। महिला और पुरुषों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।
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नसियाजी मंदिर में जैन आचार्य विवेक सागर महाराज ने कहा कि समर्पण मूक होता है, परमात्मा समर्पण से प्राप्त होता है अहंकार से नहीं। प्रत्येक आत्मा के अंत में परमात्मा की ज्योति झिलमिला रही हैं। पाप और पुण्य के खेल का नाम संसार है। किसी का अहंकार धरती पर स्थायी नहीं रहा। रावण, कंस अपने अहंकार के वशीभूत होकर सामने खड़ी मृत्यु को नहीं पहचान सके।
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राम ने विनम्रता से संधि प्रस्ताव भेजा था कि मुझे युद्ध से कोई सरोकार नहीं, लेकिन अहंकारी रावण ने उनका तिरस्कार किया। मंदिर में सामूहिक पूजा की गई। उधर, सुरत्न सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में शांतिनाथ विधान का आयोजन किया गया। पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर गांधी नगर, जैन नगर खेड़ा, गली लोहियान मंदिर, घेरखोखल, सुहागनगरी में भगवान मुनि सुब्रतनाथ जिनालय में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्घालु पहुंचे। कस्बा खैरगढ़ के भगवान मुनि सुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भी दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की गई। महिला और पुरुषों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।
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