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Firozabad News: नाली के विवाद में किसान की जिंदा जलाकर हत्या के चार दोषियों को आजीवन कारावास

Tue, 18 Nov 2025 07:49 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Tue, 18 Nov 2025 07:49 PM IST
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Four people were sentenced to life imprisonment for burning a farmer alive in a drain dispute.
सांकेतिक  - फोटो : सांकेतिक
- एका थाना क्षेत्र के गांव नगला वली में 19 जून 2017 की रात हुई थी जघन्य वारदात
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संवाद न्यूज एजेंसी

फिरोजाबाद। एका थाना क्षेत्र के गांव नगला वली में 19 जून 2017 की रात नाली के विवाद के प्रतिशोध में सोते हुए किसान संतोष कुमार सिंह की जिंदा जलाकर हत्या के मामले में चार आरोपियों को कोर्ट ने मंगलवार को दोषी करार दिया। एडीजे प्रथम सुनील कुमार सिंह की कोर्ट ने चारों दोषियों को आजीवन कारावास और 40-40 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है। अर्थदंड से प्राप्त धनराशि में से 50 फीसदी मृतक संतोष के परिजन को देने का भी आदेश दिया है। मृत्यु पूर्व बयान और सामान आशय भी सजा का आधार बना।
किसान संतोष कुमार सिंह के बेटे जयकिशन ने थाना एका में केस दर्ज कराया था, जिसमें आरोप था 19 जून 2017 की रात करीब 11:30 बजे उनके पिताजी संतोष कुमार घर के बाहर चारपाई पर सो रहे थे। उसी समय गांव के रमेश चन्द्र, विजय कुमार, भूरी देवी और टीटू कुमार उर्फ श्यामब्रेश सहित छह लोग उनके घर पर चढ़ आए। इन्होंने प्लास्टिक की कट्टी से पेट्रोल पिता पर पलट दिया और आग लगा दी। यह जघन्य घटना उनकी मां कृष्णा देवी, भाई रामकुमार और चाचा संजय कुमार ने देखी। गंभीर रूप से घायल पिता संतोष कुमार को तुरंत आगरा के अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज केस की विवेचना करते हुए कोर्ट में इनके खिलाफ मजबूत साक्ष्यों, गवाहों सहित चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन की कड़ी पैरवी के चलते मंगलवार को आरोपियों को कोर्ट ने साक्ष्यों व गवाही के आधार पर दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
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पेट्रोल की कट्टी और गवाहों के बयान ने तय की सजा

शुरुआत में यह मुकदमा धारा हत्या के प्रयास के तहत दर्ज किया गया था, लेकिन संतोष कुमार की मृत्यु के बाद इसे हत्या की धारा में पुलिस द्वारा बदला गया। पुलिस ने घटनास्थल से एक माचिस और एक 5-लीटर की कैन जिसमें लगभग 500 ग्राम पेट्रोलियम तरल पदार्थ था, बरामद किया गया था। इस बरामदगी ने यह सिद्ध किया कि आग दुर्घटनावश नहीं, बल्कि सोची-समझी योजना के तहत लगाई गई थी। शिकायत (तहरीर) में जयकिशन ने छह व्यक्तियों (रमेश चन्द्र, विजय कुमार, वीकेश कुमार, भूरी देवी, टीटू कुमार उर्फ श्यामब्रेश और विकास कुमार) का नाम लिया था। विवेचना के क्रम में पुलिस ने सभी साक्ष्यों की गहनता से जांच की। पुलिस ने वीकेश कुमार और विकास कुमार की नामजदगी गलत पाते हुए इनके नाम केस से निकाले थे।
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