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Firozabad News: एसटीपी से निकलने वाला झाग युक्त पानी यमुना में हो रहा प्रवाहित
Wed, 27 Nov 2024 11:51 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Wed, 27 Nov 2024 11:51 PM IST
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यमुना में प्रवाहित होता झाग युक्त पानी।
- फोटो : यमुना में प्रवाहित होता झाग युक्त पानी।
फिरोजाबाद। सोफीपुर स्थित एसटीपी से निकलने वाला झाग युक्त पानी यमुना में प्रवाहित हो रहा है। बुधवार को यमुना नदी में झाग युक्त पानी दिखाई दिया। ऐसे में यमुना में केमिकल युक्त पानी प्रवाहित होने की आशंका बढ़ गई है। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) और निगम के जलकल विभाग ने यमुना नदी में झागयुक्त पानी की जांच कराने की बात कही है। जिले की सीमा में प्रवाहित यमुना नदी के पानी में रसायनिक तत्व खास तौर पर डिटर्जेंट व कांच व चूड़ी साफ करने में प्रयुक्त केमिकल की मात्रा बढ़ने की आशंका है। इन दिनों सोफीपुर एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी में झाग उत्पन्न हो रहा है। यही झाग युक्त पानी सीधे यमुना नदी में प्रवाहित हो रहा है। बुधवार की सुबह करीब आठ बजे एसटीपी से निकलकर यमुना में जा रहे पानी में झाग दिखाई दिए। हालांकि जानकारी मिलने पर निगम के जलकल और पीसीबी ने यमुना में झाग युक्त पानी की जांच कराने की बात कही है।
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अमोनिया व फास्फेट बढ़ा सकते हैं पशु पालकों की मुश्किल
विशेषज्ञों के अनुसार यमुना नदी में दिख रहा झाग संभवत: अमोनिया और फास्फेट की मात्रा में बढ़ोत्तरी के कारण हैं। जिले की सीमा में प्रवाहित यमुना नदी के सहारे बसे करीब 32 गांव हैं। इन गांव में ज्यादातर दुधारू व पालतू पशु यमुना के तटवर्ती क्षेत्र में विचरते हैं। ऐसे में पशुओं में स्किन, गले और सांस संबंधी रोग हो सकते हैं।
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आवासीय व औद्योगिक सेक्टर से निकले पानी की होगी जांच
एसटीपी से निकलकर यमुना नदी के पानी में उत्पन्न झाग को लेकर पीसीबी व नगर निगम सतर्क हो गया है। सूत्रों के अनुसार शहर से यमुना नदी की ओर जाने वाले आवासीय व औद्योगिक सेक्टर सीवरेज पानी की जांच कराई जाएगी।
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यमुना के पानी की हर पखवाड़ा जांच कराई जा रही है। एसटीपी से निकलने वाले पानी में झाग किन कारणों से उत्पन्न हो रहा है, इसकी जांच के लिए नमूना संकलित किया गया है। राजकीय प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।राजेंद्र प्रसाद, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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अमोनिया व फास्फेट बढ़ा सकते हैं पशु पालकों की मुश्किल
विशेषज्ञों के अनुसार यमुना नदी में दिख रहा झाग संभवत: अमोनिया और फास्फेट की मात्रा में बढ़ोत्तरी के कारण हैं। जिले की सीमा में प्रवाहित यमुना नदी के सहारे बसे करीब 32 गांव हैं। इन गांव में ज्यादातर दुधारू व पालतू पशु यमुना के तटवर्ती क्षेत्र में विचरते हैं। ऐसे में पशुओं में स्किन, गले और सांस संबंधी रोग हो सकते हैं।
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आवासीय व औद्योगिक सेक्टर से निकले पानी की होगी जांच
एसटीपी से निकलकर यमुना नदी के पानी में उत्पन्न झाग को लेकर पीसीबी व नगर निगम सतर्क हो गया है। सूत्रों के अनुसार शहर से यमुना नदी की ओर जाने वाले आवासीय व औद्योगिक सेक्टर सीवरेज पानी की जांच कराई जाएगी।
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यमुना के पानी की हर पखवाड़ा जांच कराई जा रही है। एसटीपी से निकलने वाले पानी में झाग किन कारणों से उत्पन्न हो रहा है, इसकी जांच के लिए नमूना संकलित किया गया है। राजकीय प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।राजेंद्र प्रसाद, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड