{"_id":"69e14f057c6b9b8de00eadd2","slug":"firozabad-news-hemofilia-firozabad-news-c-169-1-sagr1024-172605-2026-04-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Firozabad News: मां ने खोया लाड़ला, अब बीमार बेटा काट रहा चक्कर, जिले में न जांच, न इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Firozabad News: मां ने खोया लाड़ला, अब बीमार बेटा काट रहा चक्कर, जिले में न जांच, न इलाज
विज्ञापन
फोटो 32 मिथलेश
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। जिले का स्वास्थ्य महकमा हर साल विश्व हीमोफीलिया दिवस पर जागरूकता के खोखले दावे तो करता है, लेकिन हकीकत यह है कि जिले में इस जानलेवा बीमारी से लड़ने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। यहां कहानी एक ऐसे परिवार की है जिसने 14 साल पहले सिस्टम की बेरुखी के कारण अपना एक बेटा खो दिया। आज उस मां का दूसरा बीमार बेटा अपनी और अपने जैसे दर्जनों मरीजों की सांसों के लिए शासन की फाइलों से लड़ रहा है।
रहना निवासी मिथलेश शर्मा का घर 2012 में उस वक्त मातम में डूब गया था, जब उनका बेटा हीमोफीलिया से जंग हार गया। जिले में इलाज न होने और समय पर फैक्टर (रक्त का थक्का जमाने वाला इंजेक्शन) न मिलने की कीमत इस परिवार ने अपने कलेजे के टुकड़े को खोकर चुकाई।
मिथलेश का दूसरा बेटा अंकित वर्मा भी इसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है। मां की उम्र बढ़ी तो अब अंकित ने इस लड़ाई की कमान खुद संभाल ली है। 2019 से अंकित दफ्तर-दफ्तर भटक रहा है। विडंबना देखिए कि जिस स्वास्थ्य विभाग के पास मरीजों का कोई सरकारी आंकड़ा तक नहीं है, वहां अंकित ने खुद मेहनत कर 36 मरीजों को खोज निकाला।
विज्ञापन
विज्ञापन
फिरोजाबाद। जिले का स्वास्थ्य महकमा हर साल विश्व हीमोफीलिया दिवस पर जागरूकता के खोखले दावे तो करता है, लेकिन हकीकत यह है कि जिले में इस जानलेवा बीमारी से लड़ने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। यहां कहानी एक ऐसे परिवार की है जिसने 14 साल पहले सिस्टम की बेरुखी के कारण अपना एक बेटा खो दिया। आज उस मां का दूसरा बीमार बेटा अपनी और अपने जैसे दर्जनों मरीजों की सांसों के लिए शासन की फाइलों से लड़ रहा है।
रहना निवासी मिथलेश शर्मा का घर 2012 में उस वक्त मातम में डूब गया था, जब उनका बेटा हीमोफीलिया से जंग हार गया। जिले में इलाज न होने और समय पर फैक्टर (रक्त का थक्का जमाने वाला इंजेक्शन) न मिलने की कीमत इस परिवार ने अपने कलेजे के टुकड़े को खोकर चुकाई।
विज्ञापन
मिथलेश का दूसरा बेटा अंकित वर्मा भी इसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है। मां की उम्र बढ़ी तो अब अंकित ने इस लड़ाई की कमान खुद संभाल ली है। 2019 से अंकित दफ्तर-दफ्तर भटक रहा है। विडंबना देखिए कि जिस स्वास्थ्य विभाग के पास मरीजों का कोई सरकारी आंकड़ा तक नहीं है, वहां अंकित ने खुद मेहनत कर 36 मरीजों को खोज निकाला।

फोटो 32 मिथलेश
विज्ञापन