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Firozabad News: 15 चूड़ी पकाई भट्ठियों में तालाबंदी, 50 हजार कामगारों पर संकट
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फिरोजाबाद। दस दिन से केरोसिन की किल्लत के कारण शहर के 15 चूड़ी पकाई भट्ठियों में ताले लटक गए हैं। इन पकाई भट्ठियों में काम करने वाले 50 हजार से अधिक जुड़ाई श्रमिकों की आजीविका ठप हो गई है। जबकि कई अन्य पकाई भट्ठियां बंद होने की कगार पर है। शासन-प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी चूड़ी जुड़ाई कार्य में प्रयुक्त सफेद केरोसिन की किल्लत का समाधान नहीं हो पाया है।
करीब दस दिन से शहर में सफेद केरोसिन की किल्लत चल रही है। ऐसे में कारखानों में प्रतिदिन तैयार होने वाले करीब 1.25 लाख तोड़ा चूड़ी की जुड़ाई का काम प्रभावित है। कारखानों में कटी हुई चूड़ी का बंपर स्टॉक जमा हो गया है। केरोसिन नहीं मिलने के कारण फिरोजाबाद, मक्खनपुर और आसपास के गांव में रहने वाले 50 हजार से अधिक चूड़ी जुड़ाई श्रमिक करीब 10 दिन से हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। केरोसिन की किल्लत के चलते जहां एक ओर चूड़ी की जुड़ाई का काम प्रभावित है। वहीं, अब शहर संचालित चूड़ी पकाई भट्ठियों पर भी सन्नाटा पसर गया है। शहर में करीब 15 चूड़ी पकाई भट्ठी पर काम बंद हो गया है। कामगारों की संचालकों ने छुट्टी कर दी है। आने वाले एक-दो दिन में हालत सामान्य नहीं हुए तो लगभग 50 करोड़ से अधिक वार्षिक कारोबार वाला चूड़ी उद्योग पूरी तरह से ठप हो जाएगा।
चूड़ी कारोबार से जुड़े इन कामगारों के सामने रोजी रोटी का संकट-
कुटीर उद्योग की तरह संचालित चूड़ी कारोबार से अलग-अलग किस्म के 20 से अधिक कामगारों को आजीविका सुलभ होती है। इसमें कारखानों में काम करने वाले पुरईया, बैलनिया, पकाईया, छटईया, ठंडी व गर्म बती देने वाले कारीगर, झलाईया, सदईया, चकलईया, चूड़ी जुडईया के अलावा कारखानों से जुड़ाई अड्ढा व पकाई भट़ठी तक माल पहुंचाने वाले ठेल चालकों सहित हजारों कामगार सीधे तौर कांच चूड़ी कारोबार से जुड़े हैं। इनमें से अगर एक भी काम प्रभावित होता है। तो फिर चूड़ी निर्माण की चेन वहीं की वही रुक जाती है। हालत अगर बिगड़े तो शहर लाइफ लाइन प्रभावित होने की आशंका गहरा जाएगी।
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चूड़ी पकाई संचालक की बात-
चूड़ी की जुड़ाई नहीं होने पकाई भट्ठियों पर पकाई के लिए माल नहीं हा रहा है। जब चूड़ी नहीं आएगी तो फिर बेवजह हजारों की गैस फुंकने का कोई मतलब नहीं। हमने काम की कमी की कारण ही एक लेयर बंद कर दी है। श्रमिक की भी घर पर बैठ गए हैं।
रवि कुमार चूड़ी पकाई भट्ठी संचालक
हमने प्रशासन को चूड़ी उद्योग के वर्तमान हालातों को अवगत करा दिया है। चूड़ी जुड़ाई श्रमिक काम ठप होने की वजह से बेरोजगार हो गए हैं। अब झलाई, सदाई, पकाई और छटाई करने वाले श्रमिकों ने भी काम बंद होने की शिकायत करना शुरू कर दिया है। हमने प्रशासन से चूड़ी उद्योग को पटरी पर लाने अन्यथा इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की गुहार लगाई है।
रामदास मानव, मंत्री चूड़ी पकाई श्रमिक यूनियन
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करीब दस दिन से शहर में सफेद केरोसिन की किल्लत चल रही है। ऐसे में कारखानों में प्रतिदिन तैयार होने वाले करीब 1.25 लाख तोड़ा चूड़ी की जुड़ाई का काम प्रभावित है। कारखानों में कटी हुई चूड़ी का बंपर स्टॉक जमा हो गया है। केरोसिन नहीं मिलने के कारण फिरोजाबाद, मक्खनपुर और आसपास के गांव में रहने वाले 50 हजार से अधिक चूड़ी जुड़ाई श्रमिक करीब 10 दिन से हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। केरोसिन की किल्लत के चलते जहां एक ओर चूड़ी की जुड़ाई का काम प्रभावित है। वहीं, अब शहर संचालित चूड़ी पकाई भट्ठियों पर भी सन्नाटा पसर गया है। शहर में करीब 15 चूड़ी पकाई भट्ठी पर काम बंद हो गया है। कामगारों की संचालकों ने छुट्टी कर दी है। आने वाले एक-दो दिन में हालत सामान्य नहीं हुए तो लगभग 50 करोड़ से अधिक वार्षिक कारोबार वाला चूड़ी उद्योग पूरी तरह से ठप हो जाएगा।
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चूड़ी कारोबार से जुड़े इन कामगारों के सामने रोजी रोटी का संकट-
कुटीर उद्योग की तरह संचालित चूड़ी कारोबार से अलग-अलग किस्म के 20 से अधिक कामगारों को आजीविका सुलभ होती है। इसमें कारखानों में काम करने वाले पुरईया, बैलनिया, पकाईया, छटईया, ठंडी व गर्म बती देने वाले कारीगर, झलाईया, सदईया, चकलईया, चूड़ी जुडईया के अलावा कारखानों से जुड़ाई अड्ढा व पकाई भट़ठी तक माल पहुंचाने वाले ठेल चालकों सहित हजारों कामगार सीधे तौर कांच चूड़ी कारोबार से जुड़े हैं। इनमें से अगर एक भी काम प्रभावित होता है। तो फिर चूड़ी निर्माण की चेन वहीं की वही रुक जाती है। हालत अगर बिगड़े तो शहर लाइफ लाइन प्रभावित होने की आशंका गहरा जाएगी।
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चूड़ी पकाई संचालक की बात-
चूड़ी की जुड़ाई नहीं होने पकाई भट्ठियों पर पकाई के लिए माल नहीं हा रहा है। जब चूड़ी नहीं आएगी तो फिर बेवजह हजारों की गैस फुंकने का कोई मतलब नहीं। हमने काम की कमी की कारण ही एक लेयर बंद कर दी है। श्रमिक की भी घर पर बैठ गए हैं।
रवि कुमार चूड़ी पकाई भट्ठी संचालक
हमने प्रशासन को चूड़ी उद्योग के वर्तमान हालातों को अवगत करा दिया है। चूड़ी जुड़ाई श्रमिक काम ठप होने की वजह से बेरोजगार हो गए हैं। अब झलाई, सदाई, पकाई और छटाई करने वाले श्रमिकों ने भी काम बंद होने की शिकायत करना शुरू कर दिया है। हमने प्रशासन से चूड़ी उद्योग को पटरी पर लाने अन्यथा इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की गुहार लगाई है।
रामदास मानव, मंत्री चूड़ी पकाई श्रमिक यूनियन