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Firozabad News: तेज लाइट से चौंधियाई आंखें, नहीं दिखे लोग... खौफ में भगाई कार
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फोटो 58 घायल कार चालक जगदीश। संवाद
फिरोजाबाद। छटनपुरा हादसे के पीछे की मुख्य वजह पुलिस की पूछताछ में सामने आई है। कार चला रहे 55 वर्षीय चालक जगदीश ने पुलिस के सामने पूरी घटना का सिलसिलेवार ब्योरा दिया है। उसने बताया कि वह शिकोहाबाद-बटेश्वर मार्ग से गुजर रहा था। छटनपुरा के पास सामने से आ रहे एक वाहन की तेज सफेद लाइट से उसकी आंखें चौंधिया गईं, जिससे उसे कुछ भी दिखना बंद हो गया। इसी वजह से सड़क किनारे मौजूद लोगों पर उसकी नजर नहीं गई और पहली टक्कर हो गई।
हादसे के बाद वह और उसके साथी बुरी तरह डर गए। उन्हें लगा कि यदि वे रुके तो भीड़ उन पर टूट पड़ेगी। इसी डर और हड़बड़ाहट में उन्होंने कार भगा ली। शिकोहाबाद की तरफ भागते समय वे रास्ता भटक गए और घूमकर दोबारा छटनपुरा गांव की ओर ही आ निकले, जहां उन्होंने फिर से भीड़ को रौंद दिया। आगे ग्रामीणों ने सड़क पर ट्रैक्टर लगाकर रास्ता ब्लॉक कर रखा था। बेकाबू कार जब ट्रैक्टर से टकराकर नीचे पलट गई, तब आक्रोशित ग्रामीणों ने उन पर हमला बोल दिया। लोगों ने लात-घूंसों, डंडों और ईंट-पत्थरों से उनकी पिटाई की, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें बचाया और अस्पताल पहुंचाया।
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पीछे से मौत बनकर आई कार, फिर कुछ याद नहीं रहा
सबहेड
ट्रॉमा सेंटर में भर्ती घायल मां-बेटी ने बयां किया छटनपुरा हादसे का खौफनाक मंजर
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। छटनपुरा हादसे में घायल सुदेश देवी (50) और उनकी बेटी संगीता सरकारी मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर के सर्जरी वार्ड में भर्ती हैं। हादसे के खौफनाक मंजर को याद कर दोनों मां-बेटी आज भी सिहर उठती हैं। अस्पताल के बेड पर दर्द से कराह रही संगीता (निवासी बटेश्वर, बाह, आगरा) ने बताया कि वह शनिवार को ही अपने भाई राजाचंद्र को देखने के लिए मायके (छटनपुरा) आई थी। रविवार को गांव में टेसू-झांझी के विवाह और विसर्जन का कार्यक्रम था, जिसमें वह भी परिवार के अन्य सदस्यों के साथ शामिल होने गई थी।
सुदेश देवी ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि गांव में बरी (बरगद) के पेड़ के पास तालाब के किनारे सभी लोग टेसू-झांझी का विसर्जन करने जा रहे थे। लोग जश्न मना रहे थे और लोकगीत गा रहे थे। तभी अचानक एक तेज रफ्तार कार ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही वह बेहोश हो गईं। सोमवार तड़के करीब चार बजे उनकी आंख खुली, जबकि उनकी बेटी संगीता को सुबह करीब सात बजे होश आया। चिकित्सकों की देखरेख में दोनों का इलाज जारी है।
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हादसे के बाद वह और उसके साथी बुरी तरह डर गए। उन्हें लगा कि यदि वे रुके तो भीड़ उन पर टूट पड़ेगी। इसी डर और हड़बड़ाहट में उन्होंने कार भगा ली। शिकोहाबाद की तरफ भागते समय वे रास्ता भटक गए और घूमकर दोबारा छटनपुरा गांव की ओर ही आ निकले, जहां उन्होंने फिर से भीड़ को रौंद दिया। आगे ग्रामीणों ने सड़क पर ट्रैक्टर लगाकर रास्ता ब्लॉक कर रखा था। बेकाबू कार जब ट्रैक्टर से टकराकर नीचे पलट गई, तब आक्रोशित ग्रामीणों ने उन पर हमला बोल दिया। लोगों ने लात-घूंसों, डंडों और ईंट-पत्थरों से उनकी पिटाई की, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें बचाया और अस्पताल पहुंचाया।
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पीछे से मौत बनकर आई कार, फिर कुछ याद नहीं रहा
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ट्रॉमा सेंटर में भर्ती घायल मां-बेटी ने बयां किया छटनपुरा हादसे का खौफनाक मंजर
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। छटनपुरा हादसे में घायल सुदेश देवी (50) और उनकी बेटी संगीता सरकारी मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर के सर्जरी वार्ड में भर्ती हैं। हादसे के खौफनाक मंजर को याद कर दोनों मां-बेटी आज भी सिहर उठती हैं। अस्पताल के बेड पर दर्द से कराह रही संगीता (निवासी बटेश्वर, बाह, आगरा) ने बताया कि वह शनिवार को ही अपने भाई राजाचंद्र को देखने के लिए मायके (छटनपुरा) आई थी। रविवार को गांव में टेसू-झांझी के विवाह और विसर्जन का कार्यक्रम था, जिसमें वह भी परिवार के अन्य सदस्यों के साथ शामिल होने गई थी।
सुदेश देवी ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि गांव में बरी (बरगद) के पेड़ के पास तालाब के किनारे सभी लोग टेसू-झांझी का विसर्जन करने जा रहे थे। लोग जश्न मना रहे थे और लोकगीत गा रहे थे। तभी अचानक एक तेज रफ्तार कार ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही वह बेहोश हो गईं। सोमवार तड़के करीब चार बजे उनकी आंख खुली, जबकि उनकी बेटी संगीता को सुबह करीब सात बजे होश आया। चिकित्सकों की देखरेख में दोनों का इलाज जारी है।

फोटो 58 घायल कार चालक जगदीश। संवाद