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मरीजों को दी नहीं, ड्रग स्टोर में ही खराब हो गईं 34 प्रकार की दवाइयां
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मरीजों को दी नहीं, ड्रग स्टोर में ही खराब हो गईं 34 प्रकार की दवाइयां
8.97 लाख रुपये बताईं जा रही इनकी कीमत, सीएमओ बोले- रिपोर्ट मांगी गई है
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण सिरसागंज स्थित ड्रग वेयर हाउस में एक साल में 34 प्रकार की दवाइयां खराब हो गईं। इनकी कीमत करीब 8.97 लाख रुपये है। इस संबंध में सीएमओ ने रिपोर्ट मांगने की बात कही है।
यह बात तब सामने आई है जब लखनऊ में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन के गोदाम पर छापा मारा। इसके बाद जिले के स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी सक्रिय हुए। सूत्रों की मानें तो ड्रग वेयर हाउस के प्रभारी ने एक्सपायर हुईं दवाओं के संबंध में उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीएमएससीएल) के महाप्रबंधक को भी पत्र लिखा है। इसमें दवाइयों का भी जिक्र किया गया है। इनकी संख्या 34 बताई जा रही है। दरअसल, मेडिकल कॉलेज हो या फिर सीएचसी, पीएचसी शायद ही मरीजों को पर्चे की पूरी दवाइयां मिल पाती हैं। सूत्रों के मुताबिक, खराब हुई दवाइयों में आयरन, कैल्शियम और दर्द निवारक निवारक टेबलेट और इंजेक्शन शामिल हैं। कोविड में प्रयोग होने वाले हाइड्रोक्लोरोक्वीन भी खराब दवाइयों की सूची में है।
गर्भवतियों को नहीं मिली दवाएं तो बच्चों पर पड़ा असर
गर्भवती महिलाओं को आयरन, फॉलिक एसिड की दवा दी जाती है। जिससे महिलाओं में खून की कमी न रहे। गर्भ में पल रहा बच्चा भी स्वस्थ रहे। जनपद में बड़ी मात्रा में आयरन की दवाएं एक्सपायर हुईं हैं। संभवत: यदि ये दवाइयां गर्भवतियों तक पहुंच जाती तो जनपद में 3500 से अधिक बच्चे कम वजन के पैदा न हुए होते।
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अस्पताल में चिकित्सकों का न रहना भी कारण
दवा एक्सपायर होने की बात सामने आने के बाद कई सवाल भी उठ रहे हैं। चर्चा इस बात की भी है कि कुछ चिकित्सक अस्पतालों में ही नहीं बैठते। ऐसे में जब दवाइयां ही नहीं लिखी जाएंगी तो दवा की मांग कैसे होगी। चिकित्सकों के अस्पतालों से नदारद रहने की बात हाल में सीएमओ और अन्य वरिष्ठ अफसरों के निरीक्षण में भी सामने आ चुकी है। कई वेलनेस सेंटर तो निरीक्षण में बंद भी मिले हैं। हाल में ही सीएमओ ने किए निरीक्षण के दौरान 50 से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मी अनुपस्थित भी मिले हैं।
कुछ दवाइयां एक्सपायर हो गई हैं। उनमें वह दवाएं भी शामिल हैं, जिनके सैंपल फेल आए थे और उनके वितरण भी रोका गया। इन एक्सपायर दवाओं को बायोमेडिकल बेस्ट के माध्यम से निस्तारण किया जाएगा।
- दुर्गेश तिवारी, प्रभारी अधिकारी
ड्रग वेयर हाउस
हमने रिपोर्ट मांगी है कि कितनी दवाएं एक्सपायर हुईं हैं। दवाएं नियमित बंटे, इसलिए हम इसके लिए निरीक्षण किया जाएगा। ओपीडी रजिस्टर को भी देखेंगे। दवाओं पर गंभीरता रखी जाएगी।
- डॉ. दिनेश प्रेमी, सीएमओ
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8.97 लाख रुपये बताईं जा रही इनकी कीमत, सीएमओ बोले- रिपोर्ट मांगी गई है
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण सिरसागंज स्थित ड्रग वेयर हाउस में एक साल में 34 प्रकार की दवाइयां खराब हो गईं। इनकी कीमत करीब 8.97 लाख रुपये है। इस संबंध में सीएमओ ने रिपोर्ट मांगने की बात कही है।
यह बात तब सामने आई है जब लखनऊ में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन के गोदाम पर छापा मारा। इसके बाद जिले के स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी सक्रिय हुए। सूत्रों की मानें तो ड्रग वेयर हाउस के प्रभारी ने एक्सपायर हुईं दवाओं के संबंध में उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीएमएससीएल) के महाप्रबंधक को भी पत्र लिखा है। इसमें दवाइयों का भी जिक्र किया गया है। इनकी संख्या 34 बताई जा रही है। दरअसल, मेडिकल कॉलेज हो या फिर सीएचसी, पीएचसी शायद ही मरीजों को पर्चे की पूरी दवाइयां मिल पाती हैं। सूत्रों के मुताबिक, खराब हुई दवाइयों में आयरन, कैल्शियम और दर्द निवारक निवारक टेबलेट और इंजेक्शन शामिल हैं। कोविड में प्रयोग होने वाले हाइड्रोक्लोरोक्वीन भी खराब दवाइयों की सूची में है।
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गर्भवतियों को नहीं मिली दवाएं तो बच्चों पर पड़ा असर
गर्भवती महिलाओं को आयरन, फॉलिक एसिड की दवा दी जाती है। जिससे महिलाओं में खून की कमी न रहे। गर्भ में पल रहा बच्चा भी स्वस्थ रहे। जनपद में बड़ी मात्रा में आयरन की दवाएं एक्सपायर हुईं हैं। संभवत: यदि ये दवाइयां गर्भवतियों तक पहुंच जाती तो जनपद में 3500 से अधिक बच्चे कम वजन के पैदा न हुए होते।
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अस्पताल में चिकित्सकों का न रहना भी कारण
दवा एक्सपायर होने की बात सामने आने के बाद कई सवाल भी उठ रहे हैं। चर्चा इस बात की भी है कि कुछ चिकित्सक अस्पतालों में ही नहीं बैठते। ऐसे में जब दवाइयां ही नहीं लिखी जाएंगी तो दवा की मांग कैसे होगी। चिकित्सकों के अस्पतालों से नदारद रहने की बात हाल में सीएमओ और अन्य वरिष्ठ अफसरों के निरीक्षण में भी सामने आ चुकी है। कई वेलनेस सेंटर तो निरीक्षण में बंद भी मिले हैं। हाल में ही सीएमओ ने किए निरीक्षण के दौरान 50 से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मी अनुपस्थित भी मिले हैं।
कुछ दवाइयां एक्सपायर हो गई हैं। उनमें वह दवाएं भी शामिल हैं, जिनके सैंपल फेल आए थे और उनके वितरण भी रोका गया। इन एक्सपायर दवाओं को बायोमेडिकल बेस्ट के माध्यम से निस्तारण किया जाएगा।
- दुर्गेश तिवारी, प्रभारी अधिकारी
ड्रग वेयर हाउस
हमने रिपोर्ट मांगी है कि कितनी दवाएं एक्सपायर हुईं हैं। दवाएं नियमित बंटे, इसलिए हम इसके लिए निरीक्षण किया जाएगा। ओपीडी रजिस्टर को भी देखेंगे। दवाओं पर गंभीरता रखी जाएगी।
- डॉ. दिनेश प्रेमी, सीएमओ