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1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध में जिले दो होमगार्ड हुए थे शामिल

Thu, 16 Dec 2021 11:38 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 16 Dec 2021 11:38 PM IST
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District Two Home Guards were involved in the 1971 Indo-Pakistani War
फिरोजाबाद ! 1971 में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध में भाग लेने वाले शंकर लाल के परिजन मेडल एवं प्रमाण पत् - फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध में फिरोजाबाद शहर के दो होमगार्डों ने अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें अदम्य साहस के लिए तत्कालीन सरकार ने मेडल नवाजा था। उस समय युद्ध में शामिल दोनों होमगार्डों की मौत हो चुकी है। हालांकि देश के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले दोनों बहादुरों के परिवार वर्तमान में तंग हाल में जीने को मजबूर हैं। जीवित रहते हुए दोनों ने मदद के लिए उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र भेजा था लेकिन शासन की अनदेखी के कारण होमगार्डों के परिवार आज भी मुफलिसी में जीवन जी रहे हैं।
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भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 में युद्ध हुआ था। इस दौरान युद्ध में दोनों ओर से 3900 जवान शहीद हुए और 9851 जवान घायल हो गए थे। हालांकि भारतीय फौज के अदम्य साहस के कारण पाक के 93 हजार जवानों ने आत्मसमर्पण किया था। पाकिस्तान को मिली हार के बाद उस समय के पूर्वी पाकिस्तान, जिसे वर्तमान में बांग्लादेश कहते हैं, को आजादी मिली थी। इस युद्ध में फिरोजाबाद के पैमेश्वर गेट निवासी शंकरलाल ने अपने साथी रामनगर निवासी राजकिशोर कुलश्रेष्ठ के साथ हिस्सा लिया था।
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शंकरलाल के परिजनों ने बताया कि फौज में सैनिकों की कमी के चलते होमगार्डों को आगरा पुलिस लाइन में हथियार चलाने का प्रशिक्षण देकर युद्ध में भेजा गया था। इस युद्ध में प्रतिभाग करने के बाद दोनों लौटे तो उन्हें मेडल प्रदान किए गए थे। ये मेडल शंकरलाल के परिजनों के पास आज भी सुरक्षित हैं। हालांकि देश के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले बहादुरों के परिजनों को शासन की अनदेखी का सामना करना पड़ रहा है।
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26 जनवरी 1999 को मुख्यमंत्री को भेजा था पत्र
परिजनों के मुताबिक, शंकरलाल ने जीवित रहते हुए 26 जनवरी 1999 को प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजा था। इसमें स्पष्ट लिखा था कि 20 साल तक होमगार्ड विभाग में रहकर निशुल्क बिना किसी स्वार्थ के केवल खाना-खुराक पर उन्होंने सेवा की। देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत होकर 1971 भारत- पाक युद्ध में देश की ओर से हिस्सा लिया और जीत पाई। युद्ध के दौरान देश सेवा करने वाले जवानों की प्रदेश सरकार ने सुधि नहीं ली। वर्तमान में उनके परिवार में दो पुत्र सत्यप्रकाश एवं श्री कृष्ण चित्तौड़ी तथा दो बेटी प्रेमवती एवं विद्यादेवी हैं। शासन की अनदेखी के कारण उनका परिवार ईंट एवं गारे से बनाए गए पुराने मकान में जीवन जीने को मजबूर है। इससे पहले मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में मुख्यमंत्री के उपसचिव ने शंकरलाल के पत्र का जवाब भेजा था।
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