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तीन सौ साल पुराना है अट्टावाला जैन मंदिर
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सदर बाजार स्थित प्राचीन अट्टाबाला जैन मंदिर में सथापित प्राचीन प्रतिमाएं
- फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। श्री दिगंबर जैन अट्टावाला मंदिर नगर के प्राचीनतम जैन मंदिरों में से एक है। यह मंदिर 300 साल पुराना है। सरकारी गजेटियर में भी इसकी प्राचीनता का उल्लेख है। अग्रवाल जैन समाज के लोगों ने इस मंदिर की स्थापना की थी। यह मंदिर एक टीले पर बनाया गया था। बाद में इसका जीर्णोद्धार होता गया। भगवान नेमिनाथ की मूलनायक अतिशयकारी प्राचीन प्रतिमा चमत्कारिक है।
चंद्रवाड़ उजडने़ के बाद जब शहर बसा तब यहां प्रमुख रुप से तीन मंदिर स्थापित हुए थे, इनमें अट्टावाला जैन मंदिर भी शामिल है। शहर के बीचोंबीच बने इस मंदिर की ख्याति प्राचीनता के कारण दूर-दूर तक है। नगर की सभी जैन शोभायात्रा इसी मंदिर से निकलती हैं। मूल वेदी पर पंचवालयति की पांच प्रतिमाओं (भगवान वासपूज्य, मल्लिनाथ, नेमिनाथ, पार्श्रवनाथ, महावीर भगवान) वाला नगर का यह एकमात्र मंदिर है। वैसे भगवान आदिनाथ और भगवान चंद्रप्रभु की दो और वेदियां भी हैं। जिनमें सैकड़ों साल पुरानी प्रतिमाएं हैं। इन प्राचीन प्रतिमाओं के कारण ही यह मंदिर पुरातत्व विभाग में भी दर्ज है।
मंदिर का कराया गया है जीर्णोद्धार
इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया है। तीनों वेदियों के आसारों को तोड़कर मंदिर को आधुनिक रुप दे दिया गया है। चित्रकारों द्वारा पेंटिंग के माध्यम से इसे आकर्षक बना दिया है। मंदिर के बाहर नक्काशीदार पत्थरों पर कलात्मक पेंटिंग की गई है।
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चंद्रवाड़ उजडने़ के बाद जब शहर बसा तब यहां प्रमुख रुप से तीन मंदिर स्थापित हुए थे, इनमें अट्टावाला जैन मंदिर भी शामिल है। शहर के बीचोंबीच बने इस मंदिर की ख्याति प्राचीनता के कारण दूर-दूर तक है। नगर की सभी जैन शोभायात्रा इसी मंदिर से निकलती हैं। मूल वेदी पर पंचवालयति की पांच प्रतिमाओं (भगवान वासपूज्य, मल्लिनाथ, नेमिनाथ, पार्श्रवनाथ, महावीर भगवान) वाला नगर का यह एकमात्र मंदिर है। वैसे भगवान आदिनाथ और भगवान चंद्रप्रभु की दो और वेदियां भी हैं। जिनमें सैकड़ों साल पुरानी प्रतिमाएं हैं। इन प्राचीन प्रतिमाओं के कारण ही यह मंदिर पुरातत्व विभाग में भी दर्ज है।
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मंदिर का कराया गया है जीर्णोद्धार
इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया है। तीनों वेदियों के आसारों को तोड़कर मंदिर को आधुनिक रुप दे दिया गया है। चित्रकारों द्वारा पेंटिंग के माध्यम से इसे आकर्षक बना दिया है। मंदिर के बाहर नक्काशीदार पत्थरों पर कलात्मक पेंटिंग की गई है।
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