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सुहागनगरी की चूड़ियों पर हड़ताल का खतरा
ब्यूरो/अमर उजाला फिरोजाबाद
Updated Thu, 27 Apr 2017 09:49 PM IST
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कारखानों में हड़ताल
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दुनिया में जिस कारण से सुहागनगरी फिरोजाबाद की पहचान है वह संकट में पड़ती नजर आ रही है। मुद्दा है फिरोजाबाद के कांच के कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों की मजदूरी का। दिन रात पकाई भट्टियों में अपने शरीर को तपाने वाले मजदूर वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। सेवायोजकों और ठेकेदारों के बीच मेहनताना बढ़ाने को लेकर समझौता भी हुआ है लेकिन गुरुवार को भी करीब एक दर्जन कारखानों में सन्नाटा रहा। ऐसे में लगता है समझौते सहमत न हों। वहीं सहायक श्रमायुक्त कार्यालय में सेवायोजकों के वार्ता में न पहुंचने से आक्रोशित चूड़ी जुड़ाई श्रमिक भी आंदोलन की राह पकड़ने की तैयारी में हैं।
बता दें कि फिरोजाबाद के माउथ ब्लोइंग कारखानों में कार्यरत हजारों श्रमिकों ने 21 अप्रैल को मेहनताना बढ़ाने की मांग को लेकर बिना सूचना के औजार छोड़ दिए थे। श्रमिकों ने कामबंद हड़ताल के साथ राजा का ताल, इंडस्ट्रियल एरिया, नगला भाऊ, स्टेशन रोड, नई बस्ती में संचालित कारखाने भी बंद करा दिए। मेहनताना बढ़ाने को लेकर लामबंद श्रमिक छह दिनों से काम पर नहीं लौटे हैं। हालांकि कुछ उद्यमियों ने ठेकेदारों से वार्ता की और मेहनताना बढ़ाने पर तैयार हो गए लेकिन श्रमिक समझौता वार्ता से खुश नहीं थे। ऐसे में गुरुवार को भी राजा का ताल, नगला भाऊ, इंडस्ट्रियल एरिया सहित अन्य स्थानों के एक दर्जन कारखानों में सन्नाटा रहा।
इधर कांच उद्योग क्रांतिकारी मजदूर संघ के मंत्री भूरी सिंह यादव के नेतृत्व में श्रमिकों ने सहायक श्रमायुक्त नदीम अहमद को ज्ञापन सौंपा और कहा कि कारखानों में श्रम कानून का उल्लंघन हो रहा है। सेवायोजकों द्वारा उन्हें शासन द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जा रहा। ऐसे में औद्योगिक अशांति होने की पूर्ण संभावना है। अगर 14 दिन के अंदर त्रिपक्षीय वार्ता बुलाकर समस्या का समधान नहीं हुआ तो हालात बिगड़ जाएंगे।
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वहीं माउथ ब्लोइंग श्रमिकों के बाद चूड़ी जुड़ाई श्रमिक भी आंदोलन की राह पकड़ने की तैयारी में हैं। चूड़ी श्रमिकों की मांग के संबंध में सहायक श्रमायुक्त को 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया था। गुरुवार को सेवायोजक और श्रमिक संगठन के बीच वार्ता होनी थी। वार्ता के लिए श्रमिक 12 बजे श्रम कार्यालय पहुंच गए और दो घंटे तक सेवायोजकों के आने का इंतजार करते रहे लेकिन सेवायोजकों के वार्ता में नहीं आए। ऐसे में श्रमिकों में आक्रोश दिखा। मिलाप सिंह ने बताया कि रविवार को गांधीपार्क में शाम चार बजे विशाल बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। महेश बाबू, दिनेश कुमार, रामदास मानव, कायम सिंह, रामनरेश, लाखन सिंह, सूरजकांत आदि मौजूद रहे।
- सभी श्रेणी के श्रमिकों के नाम फार्म नं. 12 में अंकित किए जाएं।
- श्रमिकों को हाजिरी कार्ड और परिचय पत्र प्रदान किए जाएं।
- भीषण महंगाई को देखते हुए शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन भुगतान का पालन कराया जाए।
- श्रमिकों के वेतन में 18 प्रतिशत की वृद्धि की जाए।
- कार्यरत श्रमिकों को ईएसआईसी का सदस्यता कार्ड दिया जाए।
- कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की स्लिप और कोड नंबर दिया जाए।
- श्रमिकों को राष्ट्रीय त्योहार व राष्ट्रीय पर्वों का सवेतन अवकाश दिया जाए।
- शासनादेश के अनुसार जनवरी से 1950 रुपये प्रति सैकड़ा तोड़ा की दर से मजदूरी दी जाए।
- मजदूरों को चूड़ी जुड़ाई के लिए 14 तोड़ों पर एक लीटर मिट्टी का तेल दिया जाए।
- 100 तोड़े पर लगने वाले 16 श्रमिकों की मजदूरी के निर्धारण के लिए एक कमेटी गठित की जाए।
- चूड़ी जुड़ाई श्रमिकोें की छंटनी बंद की जाए।
- मजदूरी का भुगतान कारखाने के नाम के चेक से कराया जाए।
- बड़ी खराब, चटक, भंगार के नाम पर कटौती बंद की जाए।
- जुड़े तोड़े कारखाने के स्टॉक पर जमा कराए जाएं।
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बता दें कि फिरोजाबाद के माउथ ब्लोइंग कारखानों में कार्यरत हजारों श्रमिकों ने 21 अप्रैल को मेहनताना बढ़ाने की मांग को लेकर बिना सूचना के औजार छोड़ दिए थे। श्रमिकों ने कामबंद हड़ताल के साथ राजा का ताल, इंडस्ट्रियल एरिया, नगला भाऊ, स्टेशन रोड, नई बस्ती में संचालित कारखाने भी बंद करा दिए। मेहनताना बढ़ाने को लेकर लामबंद श्रमिक छह दिनों से काम पर नहीं लौटे हैं। हालांकि कुछ उद्यमियों ने ठेकेदारों से वार्ता की और मेहनताना बढ़ाने पर तैयार हो गए लेकिन श्रमिक समझौता वार्ता से खुश नहीं थे। ऐसे में गुरुवार को भी राजा का ताल, नगला भाऊ, इंडस्ट्रियल एरिया सहित अन्य स्थानों के एक दर्जन कारखानों में सन्नाटा रहा।
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इधर कांच उद्योग क्रांतिकारी मजदूर संघ के मंत्री भूरी सिंह यादव के नेतृत्व में श्रमिकों ने सहायक श्रमायुक्त नदीम अहमद को ज्ञापन सौंपा और कहा कि कारखानों में श्रम कानून का उल्लंघन हो रहा है। सेवायोजकों द्वारा उन्हें शासन द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जा रहा। ऐसे में औद्योगिक अशांति होने की पूर्ण संभावना है। अगर 14 दिन के अंदर त्रिपक्षीय वार्ता बुलाकर समस्या का समधान नहीं हुआ तो हालात बिगड़ जाएंगे।
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वहीं माउथ ब्लोइंग श्रमिकों के बाद चूड़ी जुड़ाई श्रमिक भी आंदोलन की राह पकड़ने की तैयारी में हैं। चूड़ी श्रमिकों की मांग के संबंध में सहायक श्रमायुक्त को 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया था। गुरुवार को सेवायोजक और श्रमिक संगठन के बीच वार्ता होनी थी। वार्ता के लिए श्रमिक 12 बजे श्रम कार्यालय पहुंच गए और दो घंटे तक सेवायोजकों के आने का इंतजार करते रहे लेकिन सेवायोजकों के वार्ता में नहीं आए। ऐसे में श्रमिकों में आक्रोश दिखा। मिलाप सिंह ने बताया कि रविवार को गांधीपार्क में शाम चार बजे विशाल बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। महेश बाबू, दिनेश कुमार, रामदास मानव, कायम सिंह, रामनरेश, लाखन सिंह, सूरजकांत आदि मौजूद रहे।
ये हैं माउथ ब्लोइंग श्रमिकों की मांग
- सभी श्रेणी के श्रमिकों के नाम फार्म नं. 12 में अंकित किए जाएं।
- श्रमिकों को हाजिरी कार्ड और परिचय पत्र प्रदान किए जाएं।
- भीषण महंगाई को देखते हुए शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन भुगतान का पालन कराया जाए।
- श्रमिकों के वेतन में 18 प्रतिशत की वृद्धि की जाए।
- कार्यरत श्रमिकों को ईएसआईसी का सदस्यता कार्ड दिया जाए।
- कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की स्लिप और कोड नंबर दिया जाए।
- श्रमिकों को राष्ट्रीय त्योहार व राष्ट्रीय पर्वों का सवेतन अवकाश दिया जाए।
ये हैं चूड़ी जुड़ाई श्रमिकों की मांग
- शासनादेश के अनुसार जनवरी से 1950 रुपये प्रति सैकड़ा तोड़ा की दर से मजदूरी दी जाए।
- मजदूरों को चूड़ी जुड़ाई के लिए 14 तोड़ों पर एक लीटर मिट्टी का तेल दिया जाए।
- 100 तोड़े पर लगने वाले 16 श्रमिकों की मजदूरी के निर्धारण के लिए एक कमेटी गठित की जाए।
- चूड़ी जुड़ाई श्रमिकोें की छंटनी बंद की जाए।
- मजदूरी का भुगतान कारखाने के नाम के चेक से कराया जाए।
- बड़ी खराब, चटक, भंगार के नाम पर कटौती बंद की जाए।
- जुड़े तोड़े कारखाने के स्टॉक पर जमा कराए जाएं।