{"_id":"57b0b8e44f1c1b67766eb07c","slug":"touched-the-sky-of-progress-challenges-still","type":"story","status":"publish","title_hn":"आजादी बाद छुआ तरक्की का आसमां, चुनौतियां अब भी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आजादी बाद छुआ तरक्की का आसमां, चुनौतियां अब भी
Amar Ujala
Updated Mon, 15 Aug 2016 12:34 AM IST
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तिरंगा
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आजाद देश के रूप में राष्ट्र आज 70 वें साल में प्रवेश कर रहा है। सुहाग नगरी भी आजादी का जश्न मना रही है। तिरंगे के रंग के विभिन्न आइटमों से बाजार सजा हुआ है। लेकिन जिले के तमाम क्षेत्रों में समस्याओं की दुश्वारियां हैं। कहीं बिजली न होने से अंधेरा है तो कहीं पीने को पानी नहीं है। कहीं सड़क नहीं है तो कहीं स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। देश की आजादी के बाद जिले में बहुत विकास हुआ, लेकिन विकास के पथ पर चुनौतियां अभी भी बहुत हैं।
आजादी से पहले फीरोजाबाद आगरा जिले का हिस्सा हुआ करता था। शिकोहाबाद, जसराना और सिरसागंज मैनपुरी से जुडे़े थे। देश की आजादी के बाद फीरोजाबाद एक छोटी तहसील थी। दो फरवरी 1989 को यह जिला बना तो विकास को पंख लग गए। आजादी की लड़ाई में यहां के तमाम लोगों ने बलिदान देकर शहादत के पन्नों में अपना नाम जुड़वाया था।
69 साल बाद भी जसराना में रेल नहीं
देश को आजाद हुए 69 वर्ष हो गए। लेकिन जिले की जसराना तहसील अभी भी रेल लाइन को तरस रही है। यहां के तत्कालीन सांसद राजबब्बर ने सबसे पहले जसराना में रेल लाइन के लिए गंभीर पहल की थी उन्होंने प्रस्ताव बना कर भी केंद्र सरकार को भेजा था लेकिन जसराना को रेल लाइन नहीं मिल सकी।
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अभी तक साढे़ चार सौ गांवों में बिजली नहीं
यूं तो जिले में आजादी के बाद विद्युत के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम हुए हैं लेकिन सैकड़ों ऐसे गांव हैं जहां अभी तक बिजली नहीं। जनपद की 25 लाख से अधिक आबादी को विद्युत आपूर्ति के लिए 17402 ट्रांसफार्मर स्थापित हैं लेकिन साढे़ चार सौ गांव ऐसे हैं, जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। इनमें अरांव ब्लाक में 52, एका में 45, फीरोजाबाद में 71, जसराना में 51, खैरगढ़ में 65, नारखी ब्लाक में 49, मदनपुर में 79 और शिकोहाबाद ब्लाक में 76 गांवों में बिजली नहीं है।
पानी का संकट, पीने को शुद्ध जल नहीं
आजादी के बाद शहर में कई पेयजल टंकियां बन गईं। कई किमी पेयजल पाइप लाइन डाल दी गई लेकिन जिले की आधी आबादी अभी तक पेयजल संकट से जूझ रही है। नारखी ब्लाक के बाशिंदों को पीने के लिए शुद्ध जल नहीं है। आधे से अधिक शहर पानी के लिए पूरी रात जागता है।
कस्बों के कई मार्गों पर आवागमन अभी भी दुर्गम
आजादी के बाद बेशक आवागमन के साधन बढ़े हैं। लेकिन जिले के तमाम क्षेत्र ऐसे रास्तों को तरस रहे हैं जहां वाहन रफ्तार पकड़ सकें। जसराना का मार्ग अब ठीक हो रहा है लेकिन फीरोजाबाद से एका जाने वाले रास्ते पर आवागमन काफी खस्ताहाल है। नारखी, फरिहा, खैरगढ़, नसीरपुर आदि कई बडे़ क्षेत्र ऐसे हैं जहां सिंगल रूट के चलते सफर काफी जोखिम भरा है। फीरोजाबाद से जलेसर एक मुख्य रास्ता है लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी यह मार्ग फोर लेन नहीं हो सका है।
गांव-कस्बों में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाली की गुलाम
जिले में 570 ग्राम पंचायतें और 822 राजस्व गांव हैं। लेकिन जिले में मात्र सात सीएचसी, पांच पीएचसी और 52 न्यू एडिशन पीएचसी हैं। इनमें 45 न्यू एडिशनल पीएचसी पर डाक्टर ही नहीं हैं। गांव में स्वास्थ्य सेवाओं का उजाला अभी तक नहीं पहुंचा है। उच्च शिक्षा तो शहरों तक सिमट गई है गांवों में प्राइमरी शिक्षा का भी बुरा हाल है। जिले में 42 ऐसे गांव हैं जहां अशिक्षा का अंधेरा है।
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आजादी से पहले फीरोजाबाद आगरा जिले का हिस्सा हुआ करता था। शिकोहाबाद, जसराना और सिरसागंज मैनपुरी से जुडे़े थे। देश की आजादी के बाद फीरोजाबाद एक छोटी तहसील थी। दो फरवरी 1989 को यह जिला बना तो विकास को पंख लग गए। आजादी की लड़ाई में यहां के तमाम लोगों ने बलिदान देकर शहादत के पन्नों में अपना नाम जुड़वाया था।
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69 साल बाद भी जसराना में रेल नहीं
देश को आजाद हुए 69 वर्ष हो गए। लेकिन जिले की जसराना तहसील अभी भी रेल लाइन को तरस रही है। यहां के तत्कालीन सांसद राजबब्बर ने सबसे पहले जसराना में रेल लाइन के लिए गंभीर पहल की थी उन्होंने प्रस्ताव बना कर भी केंद्र सरकार को भेजा था लेकिन जसराना को रेल लाइन नहीं मिल सकी।
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अभी तक साढे़ चार सौ गांवों में बिजली नहीं
यूं तो जिले में आजादी के बाद विद्युत के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम हुए हैं लेकिन सैकड़ों ऐसे गांव हैं जहां अभी तक बिजली नहीं। जनपद की 25 लाख से अधिक आबादी को विद्युत आपूर्ति के लिए 17402 ट्रांसफार्मर स्थापित हैं लेकिन साढे़ चार सौ गांव ऐसे हैं, जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। इनमें अरांव ब्लाक में 52, एका में 45, फीरोजाबाद में 71, जसराना में 51, खैरगढ़ में 65, नारखी ब्लाक में 49, मदनपुर में 79 और शिकोहाबाद ब्लाक में 76 गांवों में बिजली नहीं है।
पानी का संकट, पीने को शुद्ध जल नहीं
आजादी के बाद शहर में कई पेयजल टंकियां बन गईं। कई किमी पेयजल पाइप लाइन डाल दी गई लेकिन जिले की आधी आबादी अभी तक पेयजल संकट से जूझ रही है। नारखी ब्लाक के बाशिंदों को पीने के लिए शुद्ध जल नहीं है। आधे से अधिक शहर पानी के लिए पूरी रात जागता है।
कस्बों के कई मार्गों पर आवागमन अभी भी दुर्गम
आजादी के बाद बेशक आवागमन के साधन बढ़े हैं। लेकिन जिले के तमाम क्षेत्र ऐसे रास्तों को तरस रहे हैं जहां वाहन रफ्तार पकड़ सकें। जसराना का मार्ग अब ठीक हो रहा है लेकिन फीरोजाबाद से एका जाने वाले रास्ते पर आवागमन काफी खस्ताहाल है। नारखी, फरिहा, खैरगढ़, नसीरपुर आदि कई बडे़ क्षेत्र ऐसे हैं जहां सिंगल रूट के चलते सफर काफी जोखिम भरा है। फीरोजाबाद से जलेसर एक मुख्य रास्ता है लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी यह मार्ग फोर लेन नहीं हो सका है।
गांव-कस्बों में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाली की गुलाम
जिले में 570 ग्राम पंचायतें और 822 राजस्व गांव हैं। लेकिन जिले में मात्र सात सीएचसी, पांच पीएचसी और 52 न्यू एडिशन पीएचसी हैं। इनमें 45 न्यू एडिशनल पीएचसी पर डाक्टर ही नहीं हैं। गांव में स्वास्थ्य सेवाओं का उजाला अभी तक नहीं पहुंचा है। उच्च शिक्षा तो शहरों तक सिमट गई है गांवों में प्राइमरी शिक्षा का भी बुरा हाल है। जिले में 42 ऐसे गांव हैं जहां अशिक्षा का अंधेरा है।