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सीबीआई ने नायब तहसीलदार और पुलिस कर्मियों से की पूछताछ
अमर उजाला
Updated Fri, 23 Dec 2016 12:14 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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सारा हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में जुटी सीबीआई टीम गुरुवार को फिर से जिला अस्पताल पहुंची। कई बिंदुओं पर जांच करने के साथ ही सारा के शव का पंचनामा भरने वाले उपनिरीक्षक, तत्कालीन नायब तहसीलदार और पंचनामे पर हस्ताक्षर करने वाले लोगों सेे पूछताछ की। सीबीआई टीम सारा की हत्या से जुड़े दस्तावेजों को साथ लेकर आई थी। पूछताछ और जांच की कार्रवाई तकरीबन दो घंटे तक चली।
सीबीआई के अपर पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार यादव टीम के साथ गुरुवार सुबह तकरीबन सवा ग्यारह बजे जिला अस्पताल सीएमएस डा. अजय शुक्ला के आफिस पहुंचे। इसके बाद करीब साढ़े ग्यारह बजे स्टाफ कक्ष में सीबीआई ने पूछताछ की कार्रवाई शुरू की। सबसे पहले मटसेना थाने में तैनात एसआई उमर फारूख से पूछताछ की। सारा के शव के पोस्टमार्टम के कागज उमर फारूख ने ही तत्कालीन नायब तहसीलदार कृष्ण मुरारी दीक्षित की देखरेख भरे थे। टीम ने नायब तहसीलदार कृष्ण मुरारी दीक्षित को भी पूछताछ के लिए जिला अस्पताल बुलाया। उन लोगों से भी पूछताछ की गई, जिन्होंने सारा के पंचनामे पर बतौर गवाह हस्ताक्षर किए थे। इस दौरान सिपाही भगवती सिंह को भी टीम ने तलब कर पूछताछ की। सारा के शव का पोस्टमार्टम सिपाही भगवती और होमगार्ड सुनील ने कराया था। सीबीआई ने अमनमणि के अलावा पंचनामे पर हस्ताक्षर करने वाले फिरोज निवासी हाजीपुरा, आसिम निवासी बरी का नगला, स्वालीन और तौहीद खां निवासी शीशग्रान थाना रसूलपुर से पूछताछ की। पूछताछ के बाद एक बजकर दस मिनट पर टीम जिला अस्पताल से रवाना हो गई।
ड्यूटी छोड़कर बयान दर्ज कराने आए अधिकारी
सारा की मौत के समय कृष्ण मुरारी दीक्षित की पोस्टिंग सदर तहसील में नायब तहसीलदार के पद पर थी। इसके बाद उनका तबादला शाहजहांपुर हो गया। टीम ने नायब तहसीलदार को बयान दर्ज कराने के लिए शाहजहांपुर से फीरोजाबाद बुलाया था। वहीं एसआई उमर फारुक की ड्यूटी सोफी साहब के मेले में थी। उन्हें भी बयान दर्ज कराने ड्यूटी छोड़कर बुलाया गया। वहीं सिपाही भगवती अस्पताल की पुलिस चौकी पर ही तैनात है।
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यह है मामला
नौ जुलाई 2015 को कद्दावर नेता अमरमणि त्रिपाठी की पुत्रवधू सारा की फीरोजाबाद में मौत हो गई थी। सारा के पति अमनमणि त्रिपाठी ने हादसे में मौत होने की बात कही थी। जबकि सारा की मां सीमा सिंह ने इसे सुनियोजित हत्या बताया था। उन्होंने बताया था कि उस दिन करीब 1.38 बजे सारा के भाई सिद्धार्थ के मोबाइल पर एक व्यक्ति ने हादसे होने की जानकारी दी थी, उसके बाद अमनमणि ने सारा के मोबाइल से उसकी मौत होने की बात कही। बाद में 18 जुलाई 2015 को सीमा सिंह की तहरीर पर सिरसागंज पुलिस ने अमनमणि के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।14 अक्तूबर 2015 को मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।
2013 में हुई थी शादी
रिपोर्ट में कहा गया था कि जुलाई 2013 में अमनमणि ने सारा के साथ आर्य समाज मंदिर अलीगढ़ में विवाह किया। शादी के चार पांच माह तक सब कुछ ठीक ठाक चला। इसके बाद अमनमणि ने सारा को परेशान करना शुरू कर दिया। घटना से करीब छह माह पूर्व सारा ने मुझे फोन पर बताया कि अमनमणि मारपीट और झगड़ा करता है और वह मुझसे छुटकारा चाहता है।
अस्पताल से भेजा गया था सारा की मौत का मीमो
सारा की मौत की सूचना उत्तर पुलिस को देेकर जिला अस्पताल से मीमो भेजा गया था। मीमो को वार्ड ब्वाय शराफत अली थाने लेकर गया था। इसके साथ ही उत्तर पुलिस ने मीमो के आधार पर सारा के शव का पंचायतनामा भरा।
क्षतिग्रस्त कार भी जांच का हिस्सा
हादसे के दिन जिस कार से सारा अमनमणि त्रिपाठी के साथ लखनऊ से दिल्ली जा रही थी, वह कार सारा की साइड से हाईवे किनारे खंदी में पलट गई थी। इसके चलते कार क्षतिग्रस्त हुई। सूत्र बताते हैं कि कार का पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त होने और डिग्गी का खुल जाने के बिंदु पर जांच की जा रही है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में टीम तलाश रही सवालों के जवाब
फीरोजाबाद। सारा की हत्या के मामले में जांच कर रही सीबीआई टीम का फोकस पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है। तमाम सवाल सीबीआई अधिकारियों के पास है जिनके जवाब वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तलाशने की कोशिश कर रही है। सीबीआई की टीम का बार-बार अस्पताल में दस्तक देना भी इसी तरफ इशारा करता है। सूत्र बताते हैं कि सारा के शव का पोस्टमार्टम पैनल बनाकर न होने के पीछे क्या कारण रहा ? पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी नहीं कराई गई ? जबकि यह हाईप्रोफाइल मामला था। शव के पोस्टमार्टम के बाद बिसरा भी प्रिर्जव नहीं किया गया। सारा की मां ने भी समय-समय पर पुलिस की जांच से लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे। पोस्टमार्टम पैनल न बना कर एक ही चिकित्सक द्वारा किया गया था। घटना के बाद कुछ रिश्तेदारों का समय से जल्दी मौके पर पहुंचना भी जांच का हिस्सा बन गया है।
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सीबीआई के अपर पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार यादव टीम के साथ गुरुवार सुबह तकरीबन सवा ग्यारह बजे जिला अस्पताल सीएमएस डा. अजय शुक्ला के आफिस पहुंचे। इसके बाद करीब साढ़े ग्यारह बजे स्टाफ कक्ष में सीबीआई ने पूछताछ की कार्रवाई शुरू की। सबसे पहले मटसेना थाने में तैनात एसआई उमर फारूख से पूछताछ की। सारा के शव के पोस्टमार्टम के कागज उमर फारूख ने ही तत्कालीन नायब तहसीलदार कृष्ण मुरारी दीक्षित की देखरेख भरे थे। टीम ने नायब तहसीलदार कृष्ण मुरारी दीक्षित को भी पूछताछ के लिए जिला अस्पताल बुलाया। उन लोगों से भी पूछताछ की गई, जिन्होंने सारा के पंचनामे पर बतौर गवाह हस्ताक्षर किए थे। इस दौरान सिपाही भगवती सिंह को भी टीम ने तलब कर पूछताछ की। सारा के शव का पोस्टमार्टम सिपाही भगवती और होमगार्ड सुनील ने कराया था। सीबीआई ने अमनमणि के अलावा पंचनामे पर हस्ताक्षर करने वाले फिरोज निवासी हाजीपुरा, आसिम निवासी बरी का नगला, स्वालीन और तौहीद खां निवासी शीशग्रान थाना रसूलपुर से पूछताछ की। पूछताछ के बाद एक बजकर दस मिनट पर टीम जिला अस्पताल से रवाना हो गई।
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ड्यूटी छोड़कर बयान दर्ज कराने आए अधिकारी
सारा की मौत के समय कृष्ण मुरारी दीक्षित की पोस्टिंग सदर तहसील में नायब तहसीलदार के पद पर थी। इसके बाद उनका तबादला शाहजहांपुर हो गया। टीम ने नायब तहसीलदार को बयान दर्ज कराने के लिए शाहजहांपुर से फीरोजाबाद बुलाया था। वहीं एसआई उमर फारुक की ड्यूटी सोफी साहब के मेले में थी। उन्हें भी बयान दर्ज कराने ड्यूटी छोड़कर बुलाया गया। वहीं सिपाही भगवती अस्पताल की पुलिस चौकी पर ही तैनात है।
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यह है मामला
नौ जुलाई 2015 को कद्दावर नेता अमरमणि त्रिपाठी की पुत्रवधू सारा की फीरोजाबाद में मौत हो गई थी। सारा के पति अमनमणि त्रिपाठी ने हादसे में मौत होने की बात कही थी। जबकि सारा की मां सीमा सिंह ने इसे सुनियोजित हत्या बताया था। उन्होंने बताया था कि उस दिन करीब 1.38 बजे सारा के भाई सिद्धार्थ के मोबाइल पर एक व्यक्ति ने हादसे होने की जानकारी दी थी, उसके बाद अमनमणि ने सारा के मोबाइल से उसकी मौत होने की बात कही। बाद में 18 जुलाई 2015 को सीमा सिंह की तहरीर पर सिरसागंज पुलिस ने अमनमणि के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।14 अक्तूबर 2015 को मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।
2013 में हुई थी शादी
रिपोर्ट में कहा गया था कि जुलाई 2013 में अमनमणि ने सारा के साथ आर्य समाज मंदिर अलीगढ़ में विवाह किया। शादी के चार पांच माह तक सब कुछ ठीक ठाक चला। इसके बाद अमनमणि ने सारा को परेशान करना शुरू कर दिया। घटना से करीब छह माह पूर्व सारा ने मुझे फोन पर बताया कि अमनमणि मारपीट और झगड़ा करता है और वह मुझसे छुटकारा चाहता है।
अस्पताल से भेजा गया था सारा की मौत का मीमो
सारा की मौत की सूचना उत्तर पुलिस को देेकर जिला अस्पताल से मीमो भेजा गया था। मीमो को वार्ड ब्वाय शराफत अली थाने लेकर गया था। इसके साथ ही उत्तर पुलिस ने मीमो के आधार पर सारा के शव का पंचायतनामा भरा।
क्षतिग्रस्त कार भी जांच का हिस्सा
हादसे के दिन जिस कार से सारा अमनमणि त्रिपाठी के साथ लखनऊ से दिल्ली जा रही थी, वह कार सारा की साइड से हाईवे किनारे खंदी में पलट गई थी। इसके चलते कार क्षतिग्रस्त हुई। सूत्र बताते हैं कि कार का पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त होने और डिग्गी का खुल जाने के बिंदु पर जांच की जा रही है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में टीम तलाश रही सवालों के जवाब
फीरोजाबाद। सारा की हत्या के मामले में जांच कर रही सीबीआई टीम का फोकस पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है। तमाम सवाल सीबीआई अधिकारियों के पास है जिनके जवाब वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तलाशने की कोशिश कर रही है। सीबीआई की टीम का बार-बार अस्पताल में दस्तक देना भी इसी तरफ इशारा करता है। सूत्र बताते हैं कि सारा के शव का पोस्टमार्टम पैनल बनाकर न होने के पीछे क्या कारण रहा ? पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी नहीं कराई गई ? जबकि यह हाईप्रोफाइल मामला था। शव के पोस्टमार्टम के बाद बिसरा भी प्रिर्जव नहीं किया गया। सारा की मां ने भी समय-समय पर पुलिस की जांच से लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे। पोस्टमार्टम पैनल न बना कर एक ही चिकित्सक द्वारा किया गया था। घटना के बाद कुछ रिश्तेदारों का समय से जल्दी मौके पर पहुंचना भी जांच का हिस्सा बन गया है।