{"_id":"6320c8eab5940515614e9a15","slug":"case-filed-firozabad-news-agr5467359114","type":"story","status":"publish","title_hn":"आगरा के सिपाही पर रसूलपुर थाने में दर्ज हुआ था केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आगरा के सिपाही पर रसूलपुर थाने में दर्ज हुआ था केस
सार
जांच में पता चला कि किशोरी को लेकर आरोपी मथुरा के एक होटल में गया था। चूंकि किशोरी रामगढ़ थाने की थी, ऐसे में थाना रसूलपुर का मामला भी मथुरा में दर्ज मुकदमे के साथ जुड़ गया।सीबीआई जांच की जद में रामगढ़ के थाना प्रभारी भी विशेष जांच टीम को फर्जी केस में फंसाने में 35 पुलिसकर्मी दोषी मिले हैं। थानाध्यक्ष रामगढ़ हरर्वेंद्र मिश्रा का कहना है कि इस मामले से उनका कोई लेना देना नहीं है।
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विस्तार
फिरोजाबाद। फर्जी केस मामले में विगत 24 मार्च 2022 को पीड़िता के परिजन ने आगरा के पुलिस लाइन में तैनात सिपाही के खिलाफ रसूलपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद जांच आगरा ट्रांसफर कर दी गई। पीड़िता की मां का कहना था कि वह रामगढ़ के मोहल्ला सम्राट नगर की रहने वाली है। उसने 16 वर्षीय बेटी के पास एक मोबाइल फोन देखा तो इस बारे में बेटी से पूछताछ की क्योंकि परिवार ने मोबाइल फोन नहीं दिलाया था। बेटी ने बताया कि फोन उसके दोस्त ने दिलाया है।
मां के अनुसार, 24 मार्च को वह कपड़े दिलाने के लिए बेटी को हाजीपुरा बाजार लेकर गई थी। इस बीच बेटी के पास फोन आया और कुछ देर बाद बेटी लापता हो गई। इसका मुकदमा रसूलपुर थाने में दर्ज कराया गया। थानाध्यक्ष रसूलपुर कमलेश कुमार सिंह ने बताया कि जांच में आरोपी का नाम दीपेंद्र निवासी आगरा आया। वह पुलिस लाइन में तैनात था। जांच में पता चला कि किशोरी को लेकर आरोपी मथुरा के एक होटल में गया था। सिपाही व किशोरी की लोकेशन भी उसायनी क्षेत्र में मिली थी। और मथुरा के होटल में भी दोनों की लोकेशन जांच में पता चली थी। किशोरी के घर के पास में ही आरोपी युवक की रिश्तेदारी थी जहां से आने जाने के दौरान प्रेम संबंध बने थे।
किशोरी को पुलिस ने 29 मार्च 2022 को आगरा के हरीपर्वत क्षेत्र से बरामद किया और बयान दर्ज कराए गए थे। बाद में विवेचना फिरोजाबाद से आगरा स्थानांतरित कर दी गई। न्यायालय से कुर्की की कार्रवाई के लिए अनुमति ले ली गई थी। सिपाही और किशोरी के मोबाइल की बातचीत की डिटेल भी पुलिस के रिकार्ड में है। सिपाही शादीशुदा था लेकिन उसने इस तथ्य को छिपाया था। किशोरी ने शादी के लिए कहा तो सिपाही ने मना कर दिया। बाद में सिपाही के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज कराया गया।
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सिपाही के भाई पर 12 जनवरी 2012 को दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मथुरा के गोविंदनगर थाने में एक मुकदमा 12 जनवरी 2012 को दर्ज हुआ था। इस मुकदमे में पुलिस ने आगरा निवासी पुनीत को पकड़ा था। साथ ही 13 जनवरी 2012 को प्रार्थना पत्र दिया गया। इसमें कहा गया था कि पुनीत के परिजन को झूठा फंसाया जा रहा है। बाद में मामला मानवाधिकार आयोग और फिर कोर्ट में चला गया। रसलूपुर थाने में 24 मार्च 2022 को किशोरी को ले जाने का मुकदमा दर्ज हुआ। पुनीत जिसके खिलाफ थाना मथुरा में प्रकरण चल रहा था, उसके सिपाही भाई दीपेंद्र के खिलाफ रसूलपुर में केस दर्ज हुआ था। चूंकि किशोरी रामगढ़ थाने की थी, ऐसे में थाना रसूलपुर का मामला भी मथुरा में दर्ज मुकदमे के साथ जुड़ गया।
सीबीआई जांच की जद में रामगढ़ के थाना प्रभारी भी
विशेष जांच टीम को फर्जी केस में फंसाने में 35 पुलिसकर्मी दोषी मिले हैं। इस सूची में थानाध्यक्ष रामगढ़ हरर्वेंद्र मिश्रा का नाम भी है। हरर्वेंद्र मिश्रा उस वक्त मथुरा में एसओजी प्रभारी थे। वर्तमान में वे फिरोजाबाद जिले के रामगढ़ थाने के थानाध्यक्ष हैं। इस मामले में प्रयागराज हाईकोर्ट ने 35 पुलिसकर्मियों के खिलाफ सीबीआई की जांच बैठाई है। थानाध्यक्ष रामगढ़ हरर्वेंद्र मिश्रा का कहना है कि इस मामले से उनका कोई लेना देना नहीं है।
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मां के अनुसार, 24 मार्च को वह कपड़े दिलाने के लिए बेटी को हाजीपुरा बाजार लेकर गई थी। इस बीच बेटी के पास फोन आया और कुछ देर बाद बेटी लापता हो गई। इसका मुकदमा रसूलपुर थाने में दर्ज कराया गया। थानाध्यक्ष रसूलपुर कमलेश कुमार सिंह ने बताया कि जांच में आरोपी का नाम दीपेंद्र निवासी आगरा आया। वह पुलिस लाइन में तैनात था। जांच में पता चला कि किशोरी को लेकर आरोपी मथुरा के एक होटल में गया था। सिपाही व किशोरी की लोकेशन भी उसायनी क्षेत्र में मिली थी। और मथुरा के होटल में भी दोनों की लोकेशन जांच में पता चली थी। किशोरी के घर के पास में ही आरोपी युवक की रिश्तेदारी थी जहां से आने जाने के दौरान प्रेम संबंध बने थे।
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किशोरी को पुलिस ने 29 मार्च 2022 को आगरा के हरीपर्वत क्षेत्र से बरामद किया और बयान दर्ज कराए गए थे। बाद में विवेचना फिरोजाबाद से आगरा स्थानांतरित कर दी गई। न्यायालय से कुर्की की कार्रवाई के लिए अनुमति ले ली गई थी। सिपाही और किशोरी के मोबाइल की बातचीत की डिटेल भी पुलिस के रिकार्ड में है। सिपाही शादीशुदा था लेकिन उसने इस तथ्य को छिपाया था। किशोरी ने शादी के लिए कहा तो सिपाही ने मना कर दिया। बाद में सिपाही के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज कराया गया।
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सिपाही के भाई पर 12 जनवरी 2012 को दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मथुरा के गोविंदनगर थाने में एक मुकदमा 12 जनवरी 2012 को दर्ज हुआ था। इस मुकदमे में पुलिस ने आगरा निवासी पुनीत को पकड़ा था। साथ ही 13 जनवरी 2012 को प्रार्थना पत्र दिया गया। इसमें कहा गया था कि पुनीत के परिजन को झूठा फंसाया जा रहा है। बाद में मामला मानवाधिकार आयोग और फिर कोर्ट में चला गया। रसलूपुर थाने में 24 मार्च 2022 को किशोरी को ले जाने का मुकदमा दर्ज हुआ। पुनीत जिसके खिलाफ थाना मथुरा में प्रकरण चल रहा था, उसके सिपाही भाई दीपेंद्र के खिलाफ रसूलपुर में केस दर्ज हुआ था। चूंकि किशोरी रामगढ़ थाने की थी, ऐसे में थाना रसूलपुर का मामला भी मथुरा में दर्ज मुकदमे के साथ जुड़ गया।
सीबीआई जांच की जद में रामगढ़ के थाना प्रभारी भी
विशेष जांच टीम को फर्जी केस में फंसाने में 35 पुलिसकर्मी दोषी मिले हैं। इस सूची में थानाध्यक्ष रामगढ़ हरर्वेंद्र मिश्रा का नाम भी है। हरर्वेंद्र मिश्रा उस वक्त मथुरा में एसओजी प्रभारी थे। वर्तमान में वे फिरोजाबाद जिले के रामगढ़ थाने के थानाध्यक्ष हैं। इस मामले में प्रयागराज हाईकोर्ट ने 35 पुलिसकर्मियों के खिलाफ सीबीआई की जांच बैठाई है। थानाध्यक्ष रामगढ़ हरर्वेंद्र मिश्रा का कहना है कि इस मामले से उनका कोई लेना देना नहीं है।