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Firozabad News: पंचायत के पैसे से निजी ट्रैक्टर खरीदना पड़ा भारी
Fri, 20 Feb 2026 11:30 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Fri, 20 Feb 2026 11:30 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जसराना। सरकारी धन का निजी लाभ के लिए उपयोग करना ग्राम पंचायत पलिया खुर्द के प्रधान को भारी पड़ गया। ग्राम पंचायत की निधि से अपने नाम पर ट्रैक्टर खरीदने और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के मामले में डीएम रमेश रंजन ने प्रधान प्रवेंद्र कुमार के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं।
मामला ब्लॉक एका की ग्राम पंचायत पलिया खुर्द का है। गांव के ही शीलेंद्र सिंह ने डीएम को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि ग्राम प्रधान और सचिव ने पंचायत निधि का दुरुपयोग कर ट्रैक्टर और कृषि यंत्र खरीदे, जिन्हें प्रधान ने अपने निजी नाम पर दर्ज करा लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने एडीएम नमामि गंगे मोहनलाल गुप्ता को जांच सौंपी थी। एडीएम की जांच में शिकायत सही पाई गई।
पंचायत के पैसे से खरीदा गया ट्रैक्टर प्रधान के व्यक्तिगत नाम पर पंजीकृत मिला। ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों से होने वाली कमाई को सरकारी खाते में जमा नहीं किया गया। न तो ट्रैक्टर की लॉगबुक बनाई गई और न ही इन्हें परिसंपत्ति रजिस्टर में दर्ज किया गया। आरसीसी सेंटर और आंगनबाड़ी केंद्र कागजों में पूर्ण थे, लेकिन मौके पर वहां फसल के अवशेष भरे मिले। गांव में गंदगी का अंबार मिला, जबकि सफाईकर्मी की उपस्थिति लगातार प्रमाणित की जा रही थी।
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जसराना। सरकारी धन का निजी लाभ के लिए उपयोग करना ग्राम पंचायत पलिया खुर्द के प्रधान को भारी पड़ गया। ग्राम पंचायत की निधि से अपने नाम पर ट्रैक्टर खरीदने और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के मामले में डीएम रमेश रंजन ने प्रधान प्रवेंद्र कुमार के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं।
मामला ब्लॉक एका की ग्राम पंचायत पलिया खुर्द का है। गांव के ही शीलेंद्र सिंह ने डीएम को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि ग्राम प्रधान और सचिव ने पंचायत निधि का दुरुपयोग कर ट्रैक्टर और कृषि यंत्र खरीदे, जिन्हें प्रधान ने अपने निजी नाम पर दर्ज करा लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने एडीएम नमामि गंगे मोहनलाल गुप्ता को जांच सौंपी थी। एडीएम की जांच में शिकायत सही पाई गई।
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पंचायत के पैसे से खरीदा गया ट्रैक्टर प्रधान के व्यक्तिगत नाम पर पंजीकृत मिला। ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों से होने वाली कमाई को सरकारी खाते में जमा नहीं किया गया। न तो ट्रैक्टर की लॉगबुक बनाई गई और न ही इन्हें परिसंपत्ति रजिस्टर में दर्ज किया गया। आरसीसी सेंटर और आंगनबाड़ी केंद्र कागजों में पूर्ण थे, लेकिन मौके पर वहां फसल के अवशेष भरे मिले। गांव में गंदगी का अंबार मिला, जबकि सफाईकर्मी की उपस्थिति लगातार प्रमाणित की जा रही थी।
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