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भागवत कथा सुनने पहुंचे श्रद्धालु
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Thu, 24 Dec 2015 11:22 PM IST
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अखिल भारतीय सोहम महामंडल के तत्वाधान में चल रहे विराट संत सम्मेलन में गुरुवार को भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का वर्णन किया, जिसे देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
सोहम पीठाधीश्वर स्वामी विवेकानंद महाराज ने कहा कि संघे शक्ति का ही प्रमाण है कि इस बड़े सत्संग के आयोजन में छोटे-बड़े सभी लोगों के द्वारा तन, मन, धन से सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने दान की विशेष महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि दान दुर्गति नाशनम, अर्थात दान जीवन में आई हुई परेशानियों को दूर कर देता है। सेवा धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि माता-पिता बुजुर्गों की सेवा से परमात्मा प्रसन्न होते हैं, इसलिए अंत:करण शुद्ध करने के लिए तन, मन, धन से पुण्य मन से भजन करना चाहिए। स्वामी शिवचैतन्य ने प्रेय एवं श्रेय विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रिय लगने वाली वस्तुएं प्रेय हैं तथा जो कल्याणकारी वस्तुएं हैं, वह श्रेय हैं। पीठ के उत्तराधिकारी सत्यानंद ने कहा कि जब तक व्यक्ति अपने स्वरूप में नहीं जागता, तब तक समस्या का समाधान नहीं हो सकता। कार्यक्रम के समापन सत्र में स्वामी विवेकानंद ने कार्यक्रम सहयोगी, आयोजन, कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद प्रदान किया। नगर आयुक्त रामऔतार रमन, डा. जीके अग्रवाल, संजीव मित्तल, पीके झिंदल, ओमप्रकाश शर्मा, रामवीर सिंह यादव, लक्ष्मीकांत बंसल, डा. केसी गुप्ता, परशुराम जयंती समिति के मनोज शर्मा, रविप्रकाश शर्मा, ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष जितेंद्र शर्मा, चंद्रप्रकाश शर्मा, संतोष अग्रवाल, आनंद अग्रवाल, संजय अग्रवाल, हरिओम वर्मा, प्रवीन अग्रवाल, राजेंद्र जैन, सर्वेश दीक्षित, मनोज शर्मा मौजूद थे।
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सोहम पीठाधीश्वर स्वामी विवेकानंद महाराज ने कहा कि संघे शक्ति का ही प्रमाण है कि इस बड़े सत्संग के आयोजन में छोटे-बड़े सभी लोगों के द्वारा तन, मन, धन से सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने दान की विशेष महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि दान दुर्गति नाशनम, अर्थात दान जीवन में आई हुई परेशानियों को दूर कर देता है। सेवा धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि माता-पिता बुजुर्गों की सेवा से परमात्मा प्रसन्न होते हैं, इसलिए अंत:करण शुद्ध करने के लिए तन, मन, धन से पुण्य मन से भजन करना चाहिए। स्वामी शिवचैतन्य ने प्रेय एवं श्रेय विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रिय लगने वाली वस्तुएं प्रेय हैं तथा जो कल्याणकारी वस्तुएं हैं, वह श्रेय हैं। पीठ के उत्तराधिकारी सत्यानंद ने कहा कि जब तक व्यक्ति अपने स्वरूप में नहीं जागता, तब तक समस्या का समाधान नहीं हो सकता। कार्यक्रम के समापन सत्र में स्वामी विवेकानंद ने कार्यक्रम सहयोगी, आयोजन, कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद प्रदान किया। नगर आयुक्त रामऔतार रमन, डा. जीके अग्रवाल, संजीव मित्तल, पीके झिंदल, ओमप्रकाश शर्मा, रामवीर सिंह यादव, लक्ष्मीकांत बंसल, डा. केसी गुप्ता, परशुराम जयंती समिति के मनोज शर्मा, रविप्रकाश शर्मा, ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष जितेंद्र शर्मा, चंद्रप्रकाश शर्मा, संतोष अग्रवाल, आनंद अग्रवाल, संजय अग्रवाल, हरिओम वर्मा, प्रवीन अग्रवाल, राजेंद्र जैन, सर्वेश दीक्षित, मनोज शर्मा मौजूद थे।
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