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बैंकों के बाहर टूट रहे हैं सामाजिक दूरी के मानक
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छिंगामल बाग स्थित बैंक ऑफ इंडिया के बाहर सड़क पर कतार में खड़ी महिलाएं
- फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। खाते से पैसे निकालने के लिए मंगलवार को शहर से लेकर कसबों तक बैंकों के बाहर उपभोक्ताओं की भीड़ नजर आई। बैंकों के बाहर भले ही सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात हो, लेकिन लोग कोरोना से बचाव के लिए लोग सामाजिक दूरी का पालन करते नजर नहीं आए। बैंक के बाहर लगी भीड़ में सर्वाधिक महिलाएं दिखती हैं, जो घर का सारा काम छोड़कर सुबह सात बजे से ही बैंक के बाहर लाइन लगाकर बैंक खुलने का इंतजार करने के साथ ही पैसे निकालने अथवा बंद पड़े जनधन के खाते को शुरू कराने का प्रयास करती दिखाई दीं।
जो महिलाएं खाता खुलवाने के लिए बैंक के बाहर लाइन में लगी थीं। वह पिछले कई दिनों से बैंक के चक्कर काट रहीं हैं। इसके बाद भी उनकी समस्या का निस्तारण होता नजर नहीं आ रहा। भले ही मंगलवार को बैंक अधिकारियों ने खाता खोलने के लिए फार्म का वितरण कर दिया। जिससे खातों को फिर से शुुरू किया जा सके, लेकिन फिर भी महिलाओं के खाते नहीं खुल सके और वह मायूस होकर घरों की ओर लौटने को विवश हो रहीं थीं।
पिछले करीब दो साल से पैसे जमा न करने के कारण जनधन का खाता बंद पड़ा है। अब पैसे की जरूरत पड़ रही है तो सोचा निकाल लें। लेकिन खाता बंद हो गया है। पिछले सात दिनों से बैंक आ रहे हैं, लेकिन अभी तक खाता शुरू नहीं हो सका।
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रश्मीदेवी, रानी नगर निवासी
घर पर एक पैसा नहीं है। पिछले पांच दिनों से चक्कर काट रहे हैं। राशन भी खत्म हो गया है। पैसा न होने के कारण दिक्कत आ रही है। कोई भी अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं देता कि पैसा निकलेगा या नहीं।
रेनू देेवी, रैपुरा निवासी
एक घंटे से अधिक का समय लाइन में लगे हो गया, लेकिन अभी तक बैंक के अंदर जाने का नंबर नहीं आया है। खेती के लिए पैसे की जरूरत है। मजदूरों को पैसा नहीं दे पा रहे हैं।
राज कुमार, दारापुर की ठार निवासी
पांच सौ रुपये निकालने के लिए करीब एक घंटे लाइन में लगना पड़ा था। घर से बैंक दूर होने के कारण भाई के साथ आए थे। भाई को भी परेशानी हुई, लेकिन पैसे तो निकल आए।
रश्मी देवी, राजा का ताल
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जो महिलाएं खाता खुलवाने के लिए बैंक के बाहर लाइन में लगी थीं। वह पिछले कई दिनों से बैंक के चक्कर काट रहीं हैं। इसके बाद भी उनकी समस्या का निस्तारण होता नजर नहीं आ रहा। भले ही मंगलवार को बैंक अधिकारियों ने खाता खोलने के लिए फार्म का वितरण कर दिया। जिससे खातों को फिर से शुुरू किया जा सके, लेकिन फिर भी महिलाओं के खाते नहीं खुल सके और वह मायूस होकर घरों की ओर लौटने को विवश हो रहीं थीं।
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पिछले करीब दो साल से पैसे जमा न करने के कारण जनधन का खाता बंद पड़ा है। अब पैसे की जरूरत पड़ रही है तो सोचा निकाल लें। लेकिन खाता बंद हो गया है। पिछले सात दिनों से बैंक आ रहे हैं, लेकिन अभी तक खाता शुरू नहीं हो सका।
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रश्मीदेवी, रानी नगर निवासी
घर पर एक पैसा नहीं है। पिछले पांच दिनों से चक्कर काट रहे हैं। राशन भी खत्म हो गया है। पैसा न होने के कारण दिक्कत आ रही है। कोई भी अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं देता कि पैसा निकलेगा या नहीं।
रेनू देेवी, रैपुरा निवासी
एक घंटे से अधिक का समय लाइन में लगे हो गया, लेकिन अभी तक बैंक के अंदर जाने का नंबर नहीं आया है। खेती के लिए पैसे की जरूरत है। मजदूरों को पैसा नहीं दे पा रहे हैं।
राज कुमार, दारापुर की ठार निवासी
पांच सौ रुपये निकालने के लिए करीब एक घंटे लाइन में लगना पड़ा था। घर से बैंक दूर होने के कारण भाई के साथ आए थे। भाई को भी परेशानी हुई, लेकिन पैसे तो निकल आए।
रश्मी देवी, राजा का ताल