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एंबुलेंस को इलाज की जरूरत
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Thu, 14 May 2015 11:14 PM IST
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जिले में बदइंतजामी और लापरवाही के चलते स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे अस्पतालों में दवाइयों की कमी भी रहती है। बीमारों को इलाज समय से नहीं मिलता और एंबुलेंस भी समय से नहीं पहुंचती। बदलते मौसम के साथ जिले के स्वास्थ्य महकमे ने कोई इंतजाम नहीं किया है। इलाज के नाम पर अस्पतालों में मरीजों को घंटों लाइन में लगना पड़ता है। बेड पर चादर नहीं हैं तो गर्मी में पंखे तक नहीं चलते। दवाइयां बाहर से लाना मरीजों की मजबूरी है।
फीरोजाबाद। इलाज मुहैया कराने और मरीजों को सहूलियत देने के लिए संचालित एंबुलेंस सेवा का हाल भी भगवान भरोसे है। आपातकालीन सेवा में एंबुलेंस के लिए अगर आप कभी कॉल करें तो वह घंटों देरी से पहुंचे या फिर आए ही नहीं। खटारा बन चुकी एंबुलेंस को धक्का लगाकर स्टार्ट करना भी मजबूरी बन जाता है। अस्पतालों में चिकित्सक नहीं हैं तो स्टाफ की कमी भी आड़े आती है।
स्वास्थ्य विभाग स्वयं बीमारी से जूझता नजर आ रहा है। ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर चलने से 108 एंबुलेंस की स्थिति काफी खराब दिखने लगी है। लोग प्राइवेट एंबुलेंस के भरोसे रहते हैं। सरकारी एंबुलेंस रास्ते में कब खराब हो जाए पता नहीं। यही नहीं घंटो इंतजार के बाद भी वह पहुंचे या नहीं इसकी भी गारंटी नहीं रहती। नए वाहन आवंटन नहीं होने से पुरानी एंबुलेंस से ही काम चलाया जा रहा है। हालात है कि एंबुलेंस दो लाख से भी ज्यादा किलोमीटर तक चल चुकी हैं। सुविधाओं से युक्त होने वाली एंबुलेंस खुद हांफ रही हैं।
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एक जगह खड़ी रहती हैं एंबुलेंस
सरकार ने एंबुलेंस सेवा को आपातकालीन घोषित करते हुए 108 और 102 नंबर निर्धारित किए हैं। सभी को एंबुलेंसों के क्षेत्र बांटे गए हैं ताकि हर कोने में समय से एंबुलेंस पहुंच सके। मगर जिला अस्पताल परिसर में कई एंबुलेंस एक स्थान पर खड़ी रहती हैं।
हांफें नहीं तो क्या करें
ब्लाक की एंबुलेंस किलोमीटर लाख में
जसराना 2, 05,000
एका 2,00,000
सिरसागंज 2, 56,000
शिकोहाबाद 2,30,000
फीरोजाबाद 2,20,000
मटसेना 1, 95,000
टूंडला में एंबुलेंस बनी खटारा
102, 108 एंबुलेंस सुविधा शुरू होने से पहले टूंडला और जसराना स्वास्थ्य केंद्र पर एंबुलेंस थी। टूंडला में एंबुलेंस तो पूरी तरह खटारा हो चुकी है। जबकि जसराना की एंबुलेंस को स्वास्थ्य विभाग ने दबरई अटैच कर लिया है।
जनपद में एंबुलेंस को समय पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। जिस कंपनी को ठेका है, उसके द्वारा एंबुलेंस का रखरखाव कराया जाता है। नई एंबुलेंस के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
डा. आरएम गुप्ता, एसीएमओ
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फीरोजाबाद। इलाज मुहैया कराने और मरीजों को सहूलियत देने के लिए संचालित एंबुलेंस सेवा का हाल भी भगवान भरोसे है। आपातकालीन सेवा में एंबुलेंस के लिए अगर आप कभी कॉल करें तो वह घंटों देरी से पहुंचे या फिर आए ही नहीं। खटारा बन चुकी एंबुलेंस को धक्का लगाकर स्टार्ट करना भी मजबूरी बन जाता है। अस्पतालों में चिकित्सक नहीं हैं तो स्टाफ की कमी भी आड़े आती है।
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स्वास्थ्य विभाग स्वयं बीमारी से जूझता नजर आ रहा है। ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर चलने से 108 एंबुलेंस की स्थिति काफी खराब दिखने लगी है। लोग प्राइवेट एंबुलेंस के भरोसे रहते हैं। सरकारी एंबुलेंस रास्ते में कब खराब हो जाए पता नहीं। यही नहीं घंटो इंतजार के बाद भी वह पहुंचे या नहीं इसकी भी गारंटी नहीं रहती। नए वाहन आवंटन नहीं होने से पुरानी एंबुलेंस से ही काम चलाया जा रहा है। हालात है कि एंबुलेंस दो लाख से भी ज्यादा किलोमीटर तक चल चुकी हैं। सुविधाओं से युक्त होने वाली एंबुलेंस खुद हांफ रही हैं।
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एक जगह खड़ी रहती हैं एंबुलेंस
सरकार ने एंबुलेंस सेवा को आपातकालीन घोषित करते हुए 108 और 102 नंबर निर्धारित किए हैं। सभी को एंबुलेंसों के क्षेत्र बांटे गए हैं ताकि हर कोने में समय से एंबुलेंस पहुंच सके। मगर जिला अस्पताल परिसर में कई एंबुलेंस एक स्थान पर खड़ी रहती हैं।
हांफें नहीं तो क्या करें
ब्लाक की एंबुलेंस किलोमीटर लाख में
जसराना 2, 05,000
एका 2,00,000
सिरसागंज 2, 56,000
शिकोहाबाद 2,30,000
फीरोजाबाद 2,20,000
मटसेना 1, 95,000
टूंडला में एंबुलेंस बनी खटारा
102, 108 एंबुलेंस सुविधा शुरू होने से पहले टूंडला और जसराना स्वास्थ्य केंद्र पर एंबुलेंस थी। टूंडला में एंबुलेंस तो पूरी तरह खटारा हो चुकी है। जबकि जसराना की एंबुलेंस को स्वास्थ्य विभाग ने दबरई अटैच कर लिया है।
जनपद में एंबुलेंस को समय पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। जिस कंपनी को ठेका है, उसके द्वारा एंबुलेंस का रखरखाव कराया जाता है। नई एंबुलेंस के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
डा. आरएम गुप्ता, एसीएमओ