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18 की मेहनत के बाद सफल हुआ आपरेशन किशन
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sat, 12 Sep 2015 11:26 PM IST
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फीरोजाबाद/सिरसागंज। प्रशासन की मशक्कत और दुआएं काम आईं। बोरवेल के गड्ढे में 60 फीट की गहराई पर फंसे दो साल के मासूम किशन को बचाने में सफलता मिल गई। 18 घंटे बाद शनिवार सुबह करीब 6.45 बजे 58 फीट की खोदाई के बाद बनाई गई सुरंग के माध्यम से उसे निकाला गया। नगला धर्म का युवक राजन जैसे ही किशन को लेकर बाहर निकला लोगों की धड़कनें रुक गईं। बाद में डाक्टरों ने किशन को सकुशल बताया तब कहीं जाकर उनकी जान में जान आई। अधिकारियों के साथ मासूम की मां सुमन देवी एवं दादी पुष्पादेवी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। डीएम विजय किरन आनंद तथा एसपी पीयूष श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी पूरी रात रहे।
गौरतलब है कि गांव कमरपुर बैजुआ निवासी ब्रजेश शुक्रवार को गहाई पर लिए आठ बीघा धान की फसल में पानी लगाने को पत्नी सुमन, दो वर्षीय बेटा किशन और दो माह के बेटे को लेकर गया था। खेत में पानी लगाने के बाद वह वीरेंद्र की नलकूप की कोठरी बंद कर बाहर निकला तो किशन नहीं था। वहां बने बोरवेल के गड्ढे से जब किशन की रोने की आवाज सुनी तो उनका कलेजा बैठ गया। ब्रजेश ने खुद बोरवेल में घुसकर किशन को निकलाने के प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। जानकारी अधिकारियों को लगी तो उन्होंने दौड़ लगा दी। एक पोंकलेन मशीन, चार बड़ी एवं एक छोटी जेसीबी, छह ग्रामीणों की ओर से लाए ट्रैक्टर, डेढ़ दर्जन ग्रामीणों की टीम शुक्रवार सुबह से शनिवार सुबह तक किशन को सकुशल निकालने में लगी रहीं। स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों की दो टीमें व फायर ब्रिगेड की गाड़ी, करीब 50 से अधिक पुलिस के जवानों की टीम में बचाव कार्य में लगी थी। डीएम विजय किरन आनंद, एसपी पीयूष श्रीवास्तव, एएसपी संजय यादव, नगर मजिस्ट्रेट रवींद्र सिंह, एसडीएम सदर डा.पंकज वर्मा, शिकोहाबाद चंद्रभानु सिंह, सीओ सदर जगदीश सिंह के साथ अन्य अधिकारी लगातार दिशा निर्देश दे रहे थे। शनिवार सुबह 6.45 बजे 58 फीट की खोदाई पूरी कर बोरवेल के गड्ढे के लिए बनाई गई सुरंग में नगला धर्म का युवक राजन घुसा तो सन्नाटा छा गया। राजन किशन को लेकर बाहर आया तो तुरंत ही चिकित्सकों की टीम ने आक्सीजन लगा उसका परीक्षण किया। चिकित्सकों के द्वारा किशन के सकुशल होने की जानकारी देते ही वहां मौजूद लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवारीजनों की आंखों से आंसू बह निकले। तुरंत ही किशन को जिला अस्पताल ले जाया गया वहां भी काफी संख्या में ग्रामीण पहुंच गए।
चिकित्सकीय टीम ने संभाली कमान
बच्चे को अरांव पीएचसी के फार्मासिस्ट राकेश ओझा और प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. कपिल, डा. प्रदीप के साथ सीधे पीएचसी लेकर पहुंचे। वहां भीड़ एकत्रित हुई तो बच्चे को जिला अस्पताल भेज दिया। जिला अस्पताल में सीएमओ डा. विनय माथुर के निर्देशन में बाल रोग विशेषज्ञ डा. एलके गुप्ता ने जांच पड़ताल की। उन्होंने कहा कि बच्चा पूरी तरह से सुरक्षित है। आपात कालीन विभाग में तैनात चिकित्सक डा. भूपेंद्र सिंह चाहर ने कहा कि 18 घंटे तक अंदर रहने के कारण उसके चेस्ट पर इंफेक्शन है। शीघ्र वह ठीक होगा।
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एक नजर आपरेशन किशन
- एक पोंकलेन मशीन, चार जेसीबी, एक मिनी जेसीबी, छह ट्रैक्टर, फायर ब्रिगेड की गाड़ी।
- पीएचसी अरांव की प्रभारी एवं जिला अस्पताल के एक चिकित्सक की टीम।
- प्रधान संघ अरांव के अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव के साथ ही ग्रामीण राजकुमार, विजेंद्र व नीतेश के नेतृत्व में डेढ़ दर्जन के करीब ग्रामीणों की टीम खोदाई में लगी रही।
विरोध देख दौड़े सीएम
रात्रि करीब ढाई बजे जेसीबी के चालकों को नींद आ गई तो एक-एक कर सभी ने काम बंद कर दिया। जेसीबी के बंद होते ही ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। विरोध को देखकर नगर मजिस्ट्रेट रवींद्र सिंह एवं एसडीएम चंद्रभानु ने चालकों को जगाया और उत्साह बढ़ाते हुए काम की शुरूआत की।
अधिकारियों जिंदाबाद के नारे
किशन के सुरक्षित निकलते ही ग्रामीणों ने डीएम और जिला प्रशासनिक अधिकारियों के जिंदाबाद के नारे लगाए।
सुरंगों से मिलती रही आक्सीजन
प्रशासन की टीम ने खोदाई के साथ बच्चे तक आक्सीजन पहुंचाने के लिए 20 फीट, 38 फीट पर जो सुरंगें बनाईं वही बच्चे के लिए जीवनदायी साबित हुईं। सुरंगों से किशन को आक्सीजन मिली तो घुटन भी नहीं हुई।
डाक्टरों का भी योगदान
किशन जिला अस्पताल आता इससे पूर्व ही प्रभारी सीएमओ डा.विनय माथुर इमरजेंसी कक्ष में पहुंच गए। जबकि सीएमएस नहीं थे। इतना ही नहीं उन्हें महिला अस्पताल में तैनात डा. एलके गुप्ता को बुलाना पड़ा। मासूम किशन के आते ही उपचार शुरू कर दिया। हालांकि डा. एलके गुप्ता का सहयोग भी इमरजेंसी में तैनात डा. भूपेंद्र चाहर कर रहे थे।
मोए किशना के जिंदा होइवे की उम्मीद नाएं थी
किशना सुरक्षित निकलवे पर मैंने बालाजी पर नेजा की बोल दई
अमर उजाला ब्यूरो
फीरोजाबाद। मोए किशना के जिंदा होइवे की उम्मीद नाएं थी। बालाजी महाराज ते मैंने नेजा चढ़ाइवे की बोल दई थी। बालाजी महाराजन ने मेरी सुनलई। मैं अब तो परिवार के साथ नेजा चढ़ाइवे जाऊंगी। आप सबही के सहयोग तो किशना बच गओ....।
स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ जिला अस्पताल में आई मासूम किशन की दादी पुष्पादेवी ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान ये बात कहीं। वह बोली मैं तो गरीब हूं। मेरे पांच बच्चों में ब्रजेश सबसे बड़ा है। उसके दो बेटे हैं। मैंने जब गड्ढा देखा तो लगा कि दो साल के किशना का कहा बचेगा। मोए किशना के बचवे की उम्मीद नाएं थी। लेकिन मैंने बालाजी से नेजा चढ़ाइवे को बोल दई और मेरी बालाजी महाराज ने सुन ली...। बालाजी महाराज का मैं तो लाख-लाख शुक्रिया अदा करूंगी। नेजा चढ़ाइवे कूं तो परिवार को साथ जाऊंगी। पुष्पा देवी ने डीएम व प्रशासन का धन्यवाद भी अपने शब्दों में दिया।
परिवार में खुशी, बांटा गया मिष्ठान
मासूम किशन के सुरक्षित बाहर निकलने के साथ परिवार में खुशी का आलम है। बुजुर्ग बाबा दीवान सिंह राजपूत ने किशन उर्फ बंटू के सुरक्षित निकलने पर मिष्ठान बांट दिया। शाम के वक्त हर ग्रामीण प्रशासन की पहल की तारीफ करता दिखाई दिया।
घटनाक्रम मिनट दर मिनट
रात 12.00 बजे: आधा दर्जन ग्रामीण ट्रैक्टर ट्राली लेकर खुद ही मिट्टी निकालने को पहुंचे।
1.00: 38 फीट खोदाई के बाद दूसरी सुरंग की और बच्चे के रोने की आवाज आई।
2.00: जेसीबी मशीन चालकों के आई नींद काम रोका तो विरोध शुरू।
2.15: नगर मजिस्ट्रेट व एसडीएम ने चालकों को फिर से जगाया।
3.00: पोकलेन मशीन को जगह कम होने के कारण बाहर निकालकर चौड़ाई बढ़ानी पड़ीं।
सुबह 4.30: जेसीबी को बंद कर, फावड़ों से मिट्टी हटाने का काम शुरू किया।
5.30: 58 फुट पर प्रशासन की टीम ने तीसरी सुरंग बनाई।
6.40: बजे डीएम के निर्देशन में नगला धर्म निवासी युवक राजन ने किशन को निकालने को सुरंग में प्रवेश किया।
6.45: राजन ने बच्चे को बाहर निकालकर पीएचसी की टीम को सौंपा।
6.48: बजे अरांव पीएचसी पर बच्चे को लेकर उपचार भी शुरू किया।
7.35: बजे बच्चे को दादी पुष्पादेवी के साथ अरांव की टीम उसे जिला अस्पताल लाई।
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गौरतलब है कि गांव कमरपुर बैजुआ निवासी ब्रजेश शुक्रवार को गहाई पर लिए आठ बीघा धान की फसल में पानी लगाने को पत्नी सुमन, दो वर्षीय बेटा किशन और दो माह के बेटे को लेकर गया था। खेत में पानी लगाने के बाद वह वीरेंद्र की नलकूप की कोठरी बंद कर बाहर निकला तो किशन नहीं था। वहां बने बोरवेल के गड्ढे से जब किशन की रोने की आवाज सुनी तो उनका कलेजा बैठ गया। ब्रजेश ने खुद बोरवेल में घुसकर किशन को निकलाने के प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। जानकारी अधिकारियों को लगी तो उन्होंने दौड़ लगा दी। एक पोंकलेन मशीन, चार बड़ी एवं एक छोटी जेसीबी, छह ग्रामीणों की ओर से लाए ट्रैक्टर, डेढ़ दर्जन ग्रामीणों की टीम शुक्रवार सुबह से शनिवार सुबह तक किशन को सकुशल निकालने में लगी रहीं। स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों की दो टीमें व फायर ब्रिगेड की गाड़ी, करीब 50 से अधिक पुलिस के जवानों की टीम में बचाव कार्य में लगी थी। डीएम विजय किरन आनंद, एसपी पीयूष श्रीवास्तव, एएसपी संजय यादव, नगर मजिस्ट्रेट रवींद्र सिंह, एसडीएम सदर डा.पंकज वर्मा, शिकोहाबाद चंद्रभानु सिंह, सीओ सदर जगदीश सिंह के साथ अन्य अधिकारी लगातार दिशा निर्देश दे रहे थे। शनिवार सुबह 6.45 बजे 58 फीट की खोदाई पूरी कर बोरवेल के गड्ढे के लिए बनाई गई सुरंग में नगला धर्म का युवक राजन घुसा तो सन्नाटा छा गया। राजन किशन को लेकर बाहर आया तो तुरंत ही चिकित्सकों की टीम ने आक्सीजन लगा उसका परीक्षण किया। चिकित्सकों के द्वारा किशन के सकुशल होने की जानकारी देते ही वहां मौजूद लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवारीजनों की आंखों से आंसू बह निकले। तुरंत ही किशन को जिला अस्पताल ले जाया गया वहां भी काफी संख्या में ग्रामीण पहुंच गए।
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चिकित्सकीय टीम ने संभाली कमान
बच्चे को अरांव पीएचसी के फार्मासिस्ट राकेश ओझा और प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. कपिल, डा. प्रदीप के साथ सीधे पीएचसी लेकर पहुंचे। वहां भीड़ एकत्रित हुई तो बच्चे को जिला अस्पताल भेज दिया। जिला अस्पताल में सीएमओ डा. विनय माथुर के निर्देशन में बाल रोग विशेषज्ञ डा. एलके गुप्ता ने जांच पड़ताल की। उन्होंने कहा कि बच्चा पूरी तरह से सुरक्षित है। आपात कालीन विभाग में तैनात चिकित्सक डा. भूपेंद्र सिंह चाहर ने कहा कि 18 घंटे तक अंदर रहने के कारण उसके चेस्ट पर इंफेक्शन है। शीघ्र वह ठीक होगा।
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- एक पोंकलेन मशीन, चार जेसीबी, एक मिनी जेसीबी, छह ट्रैक्टर, फायर ब्रिगेड की गाड़ी।
- पीएचसी अरांव की प्रभारी एवं जिला अस्पताल के एक चिकित्सक की टीम।
- प्रधान संघ अरांव के अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव के साथ ही ग्रामीण राजकुमार, विजेंद्र व नीतेश के नेतृत्व में डेढ़ दर्जन के करीब ग्रामीणों की टीम खोदाई में लगी रही।
विरोध देख दौड़े सीएम
रात्रि करीब ढाई बजे जेसीबी के चालकों को नींद आ गई तो एक-एक कर सभी ने काम बंद कर दिया। जेसीबी के बंद होते ही ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। विरोध को देखकर नगर मजिस्ट्रेट रवींद्र सिंह एवं एसडीएम चंद्रभानु ने चालकों को जगाया और उत्साह बढ़ाते हुए काम की शुरूआत की।
अधिकारियों जिंदाबाद के नारे
किशन के सुरक्षित निकलते ही ग्रामीणों ने डीएम और जिला प्रशासनिक अधिकारियों के जिंदाबाद के नारे लगाए।
सुरंगों से मिलती रही आक्सीजन
प्रशासन की टीम ने खोदाई के साथ बच्चे तक आक्सीजन पहुंचाने के लिए 20 फीट, 38 फीट पर जो सुरंगें बनाईं वही बच्चे के लिए जीवनदायी साबित हुईं। सुरंगों से किशन को आक्सीजन मिली तो घुटन भी नहीं हुई।
डाक्टरों का भी योगदान
किशन जिला अस्पताल आता इससे पूर्व ही प्रभारी सीएमओ डा.विनय माथुर इमरजेंसी कक्ष में पहुंच गए। जबकि सीएमएस नहीं थे। इतना ही नहीं उन्हें महिला अस्पताल में तैनात डा. एलके गुप्ता को बुलाना पड़ा। मासूम किशन के आते ही उपचार शुरू कर दिया। हालांकि डा. एलके गुप्ता का सहयोग भी इमरजेंसी में तैनात डा. भूपेंद्र चाहर कर रहे थे।
मोए किशना के जिंदा होइवे की उम्मीद नाएं थी
किशना सुरक्षित निकलवे पर मैंने बालाजी पर नेजा की बोल दई
अमर उजाला ब्यूरो
फीरोजाबाद। मोए किशना के जिंदा होइवे की उम्मीद नाएं थी। बालाजी महाराज ते मैंने नेजा चढ़ाइवे की बोल दई थी। बालाजी महाराजन ने मेरी सुनलई। मैं अब तो परिवार के साथ नेजा चढ़ाइवे जाऊंगी। आप सबही के सहयोग तो किशना बच गओ....।
स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ जिला अस्पताल में आई मासूम किशन की दादी पुष्पादेवी ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान ये बात कहीं। वह बोली मैं तो गरीब हूं। मेरे पांच बच्चों में ब्रजेश सबसे बड़ा है। उसके दो बेटे हैं। मैंने जब गड्ढा देखा तो लगा कि दो साल के किशना का कहा बचेगा। मोए किशना के बचवे की उम्मीद नाएं थी। लेकिन मैंने बालाजी से नेजा चढ़ाइवे को बोल दई और मेरी बालाजी महाराज ने सुन ली...। बालाजी महाराज का मैं तो लाख-लाख शुक्रिया अदा करूंगी। नेजा चढ़ाइवे कूं तो परिवार को साथ जाऊंगी। पुष्पा देवी ने डीएम व प्रशासन का धन्यवाद भी अपने शब्दों में दिया।
परिवार में खुशी, बांटा गया मिष्ठान
मासूम किशन के सुरक्षित बाहर निकलने के साथ परिवार में खुशी का आलम है। बुजुर्ग बाबा दीवान सिंह राजपूत ने किशन उर्फ बंटू के सुरक्षित निकलने पर मिष्ठान बांट दिया। शाम के वक्त हर ग्रामीण प्रशासन की पहल की तारीफ करता दिखाई दिया।
घटनाक्रम मिनट दर मिनट
रात 12.00 बजे: आधा दर्जन ग्रामीण ट्रैक्टर ट्राली लेकर खुद ही मिट्टी निकालने को पहुंचे।
1.00: 38 फीट खोदाई के बाद दूसरी सुरंग की और बच्चे के रोने की आवाज आई।
2.00: जेसीबी मशीन चालकों के आई नींद काम रोका तो विरोध शुरू।
2.15: नगर मजिस्ट्रेट व एसडीएम ने चालकों को फिर से जगाया।
3.00: पोकलेन मशीन को जगह कम होने के कारण बाहर निकालकर चौड़ाई बढ़ानी पड़ीं।
सुबह 4.30: जेसीबी को बंद कर, फावड़ों से मिट्टी हटाने का काम शुरू किया।
5.30: 58 फुट पर प्रशासन की टीम ने तीसरी सुरंग बनाई।
6.40: बजे डीएम के निर्देशन में नगला धर्म निवासी युवक राजन ने किशन को निकालने को सुरंग में प्रवेश किया।
6.45: राजन ने बच्चे को बाहर निकालकर पीएचसी की टीम को सौंपा।
6.48: बजे अरांव पीएचसी पर बच्चे को लेकर उपचार भी शुरू किया।
7.35: बजे बच्चे को दादी पुष्पादेवी के साथ अरांव की टीम उसे जिला अस्पताल लाई।