बाज नहीं आ रहे मिलावटखोर: मावा, पनीर, दूध के नाम पर आप खा रहें जहर, आंकड़े देख उड़ जाएंगे होश
फिरोजाबाद में मिलावटखोर अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे है। वह सिंथेटिक मावा, पनीर और दूध बाजार में बेच रहे हैं। इससे लोगों की सेहत खराब हो रही है।
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उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में मिलावटखोर खाने-पीने की चीजों में मिलावट से बाज नहीं आ रहे हैं। हालत यह है कि लगातार नमूनों की जांच, जुर्माने और मुकदमें दायर किए जा रहे हैं, लेकिन मिलावटखोरी का खेल नहीं थम रहा है। जांच को जो नमूने लिए जा रहे हैं, उनमें 70 फीसदी नमूने फेल आ रहे हैं। जो गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण बन रहे हैं।
ये है इस वर्ष का आंकड़ा
वर्ष 2023 की बात करें तो खाद्य विभाग की टीम ने मिलावट खोरी की शिकायत पर शहर से देहात तक 1145 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान 334 नमूने लिए गए। जिसमें अब तक 149 खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता मानक के अनुसार नहीं पाई गई। जबकि 68 खाद्य पदार्थों में केमिकल या अन्य अखाद्य पदार्थ पाए जाने के कारण प्रयोगशाला ने मानव जीवन के लिए असुरक्षित घोषित किया गया।
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मनमानी पर उतारू मिलावटखोर
इनमें से 56 नमूने खाद्य पदार्थ विभाग के मानक को पूरा नहीं कर रहे थे। खास बात यह है कि इसमें अब तक 268 वाद भी दायर हो चुके हैं। बावजूद इसके अभी भी मिलावटखोरी पर नकेल नहीं कसी जा सकी है। इतना ही नहीं मिलावटखोरी करने वालों पर एक करोड़ 24 लाख का अर्थदंड भी लग चुका है, लेकिन जुर्माने का डर छोड़कर लोग मनमानी करने में लगे हुए हैं।रिपोर्ट आने में हो जाती है देरी
जिले से लिए जाने वाले सैंपल की रिपोर्ट लखनऊ से आती है। यहां से सभी सैंपल भरकर लखनऊ को जाते हैं। पूरे राज्य की लैब होने पर रिपोर्ट काफी देरी से आ पाती है। जिस वजह से मिलावटखोरों के हौसले बढ़ते जाते हैं। चेकिंग के बाद फिर से मिलावटखोरी शुरू कर देते हैं।यह भी पढ़ेंः- शादी से पहले मामा का हंगामा: रखी ऐसी शर्त, सुनकर उड़े लोगों के होश; जयमाल भूल दूल्हा-दुल्हन पहुंचे
यह है उपभोक्ता के अधिकार
उपभोक्ता कभी भी अपनी स्थानीय प्रयोगशाला में जाकर जांच करवा सकता है।इसके लिए उपभोक्ता स्वतंत्र रूप से भी मिलावट होने पर वाद दायर कर सकता है और न्याय पा सकता है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की लखनऊ में मोबाइल वैन भी है जिस पर तुरंत रिपोर्ट निकाल सकते हैं।
पनीर, दूध के नमूने सर्वाधिक फेल
जिले में दूध, पनीर और मावा से बनीं मिठाईयों के नमूने सबसे ज्यादा फेल होते हैं। कई बार सिंथेटिक मावा, पनीर, दूध पकड़ा जा चुका है। खाद्य विभाग के मुताबिक, दूध के 80 फीसदी नमूने फेल होते हैं।यह भी पढ़ेंः- संबंध नहीं बनाने की इच्छा भी है बीमारी: घबराएं नहीं, इलाज संभव है, पढ़ें विशेषज्ञों की सलाह, कारण