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Firozabad News: हुंडा वाला मंदिर-दुकान विवाद में एडीजे ने खारिज की याचिका
Tue, 11 Aug 2026 11:23 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Tue, 11 Aug 2026 11:23 PM IST
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सांकेतिक
फिरोजाबाद। शहर के हुंडा वाला मंदिर (बौहरान गली) स्थित दुकानों के मालिकाना हक, कब्जे, बकाया किराया वसूली तथा परिसर में बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय के कमरे से जुड़े मामले में एडीजे-10 निर्दोष कुमार की अदालत ने दांडिक पुनरीक्षण याचिका को निरस्त कर दिया है। नगर दंडाधिकारी के द्वारा पूर्व में जारी आदेश को सही ठहराया है।
राजवर्धन तिवारी निवासी हुंडा वाला मंदिर, बौहरान गली ने याचिका में मुख्य रूप से यह तथ्य उठाया था कि उनकी पैतृक संपत्ति पर एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय संचालित होता था। विद्यालय का स्थानांतरण होने के बाद प्रधानाचार्य कमरे पर ताला लगाकर चले गए। सीलन के कारण गिरासू हो चुके इस कमरे के संबंध में प्राथमिक शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन शिक्षा विभाग ने कोई संज्ञान नहीं लिया। इसके अलावा उनके पिता की मृत्यु (25 जनवरी 2004) के बाद दुकानों में मौजूद किरायेदारों ने किराया देना बंद कर दिया और अवैध कब्जा जमा लिया है। विपक्षी/किरायेदार केशव, नेपाली, कालीचरन, बॉबी, विनोद कुमार, राम सिंह, राजेंद्र, राजीव कक्कड़, मनोज, अजय सैनी, मुन्नालाल कारोबार करते हैं। इनके अलावा प्राथमिक शिक्षा अधिकारी, यशवर्धन तिवारी, सुषमा तिवारी व उत्तर प्रदेश सरकार को भी पक्षकार बनाया गया था। अपर सत्र न्यायाधीश निर्दोष कुमार ने स्पष्ट किया कि भू-स्वामी द्वारा रखे गए किरायेदारों को बेदखल करने, दुकानों का कब्जा वापस लेने या बकाया किराया-क्षतिपूर्ति दिलाने का अधिकार दंडाधिकारी के पास नहीं है। इन अधिकारों का निर्धारण केवल दीवानी न्यायालय द्वारा ही किया जा सकता है।
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राजवर्धन तिवारी निवासी हुंडा वाला मंदिर, बौहरान गली ने याचिका में मुख्य रूप से यह तथ्य उठाया था कि उनकी पैतृक संपत्ति पर एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय संचालित होता था। विद्यालय का स्थानांतरण होने के बाद प्रधानाचार्य कमरे पर ताला लगाकर चले गए। सीलन के कारण गिरासू हो चुके इस कमरे के संबंध में प्राथमिक शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन शिक्षा विभाग ने कोई संज्ञान नहीं लिया। इसके अलावा उनके पिता की मृत्यु (25 जनवरी 2004) के बाद दुकानों में मौजूद किरायेदारों ने किराया देना बंद कर दिया और अवैध कब्जा जमा लिया है। विपक्षी/किरायेदार केशव, नेपाली, कालीचरन, बॉबी, विनोद कुमार, राम सिंह, राजेंद्र, राजीव कक्कड़, मनोज, अजय सैनी, मुन्नालाल कारोबार करते हैं। इनके अलावा प्राथमिक शिक्षा अधिकारी, यशवर्धन तिवारी, सुषमा तिवारी व उत्तर प्रदेश सरकार को भी पक्षकार बनाया गया था। अपर सत्र न्यायाधीश निर्दोष कुमार ने स्पष्ट किया कि भू-स्वामी द्वारा रखे गए किरायेदारों को बेदखल करने, दुकानों का कब्जा वापस लेने या बकाया किराया-क्षतिपूर्ति दिलाने का अधिकार दंडाधिकारी के पास नहीं है। इन अधिकारों का निर्धारण केवल दीवानी न्यायालय द्वारा ही किया जा सकता है।
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