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Firozabad News: बेरहम सिस्टम के शिकंजे में फंसा बेजुबान बंदर

Fri, 29 Mar 2024 12:16 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Fri, 29 Mar 2024 12:16 AM IST
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A voiceless monkey trapped in the clutches of a merciless system.
जसराना (फिरोजाबाद)। बेरहम सरकारी सिस्टम के शिकंजे में फंसे घायल बंदर को पिछले 15 दिनों से इलाज नहीं मिल पा रहा है। उसकी देखभाल करने वाले व्यक्ति ने पशु चिकित्सा विभाग, ब्लाॅक स्तर एवं वन विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन कोई भी अधिकारी या फिर विभाग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। जबकि बंदर की हालत गंभीर बनी हुई है। 15 दिन पहले एक बंदर घायलावस्था में पाढ़म निवासी अवधेश राजपूत के घर में घुस आया। पहले तो उन्होंने उसे भगाने का प्रयास किया, लेकिन नहीं जाने पर मानवता के नाते उसको खाना खिलाकर प्राथमिक उपचार दिलाया। बंदर की हालत काफी खराब होने की वजह से उन्होंने पशु चिकित्सा विभाग को बताया तो उन्होंने वन विभाग के संरक्षण में देने को कहा। कहा कि पहले वन विभाग के संरक्षण में बंदर को दिया जाए। इसके बाद नियमित उपचार शुरू होगा। अवधेश के अनुसार वन विभाग के अफसरों का कहना है कि बंदर जंगली जानवर की श्रेणी में नहीं आता है। ब्लाॅक या फिर नगर पंचायत में संपर्क करें। ब्लाॅक के अधिकारी किसी भी प्रकार के सरकारी आदेश नहीं होने की बात कर रहे हैं। अब सवाल है कि आखिर बंदर का उपचार कैसे होगा, यह कोई बताने को तैयार नहीं है।
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मामला संज्ञान में आया था, लेकिन बंदर को जंगली जानवर की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। इस कारण उसे अपने संरक्षण में नहीं ले सकते हैं। बंदर को नगर पंचायत या फिर ग्राम पंचायत को अपने संरक्षण में लेकर उपचार कराना चाहिए। जिसके पास बंदर है, उसे संबंधित ब्लाॅक के अधिकारियों से संपर्क करना होगा।
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-आशीष कुमार, रेंजर वन विभाग जसराना
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पाढ़म में किसी के पास घायलावस्था में बंदर के होने की जानकारी उनके पास नहीं हैं। वैसे भी ब्लाॅक स्तर पर बंदर को संरक्षित करने का कोई साधन नहीं है, न ही शासन के स्तर से उनके पास कोई आदेश है कि घायल बंदर का उपचार ग्राम पंचायत या फिर ब्लाॅक स्तर पर होना चाहिए।
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-सुमंत यादव, खंड विकास अधिकारी एका
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बंदर एक जंगली जानवर है, यही बताया गया था। लेकिन फिर भी मानवता के नाते उसका चार दिन तक उपचार किया गया था। वन विभाग को संरक्षण में लेना चाहिए। सरकारी आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत स्तर पर बंदर को संरक्षित करना होता है।
डॉ. शौर्य कुमार, पशु चिकित्साधिकारी पैढ़त एवं पाढ़म
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